डेकोरेटिव गुंबद से उठा विवाद, रातों रात हटाया गया ढांचा

    18-Feb-2026
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Decorative Dome
 Image Source:(Internet)
गोरखपुर :
उत्तर प्रदेश के पिपराइच रेलवे स्टेशन पर लगाए गए एक सजावटी हरे गुंबद (Dome) को लेकर अचानक विवाद खड़ा हो गया। बताया जा रहा है कि स्टेशन भवन पर लगाए गए इस गुंबद के नीचे कुछ लोगों ने नमाज अदा करना शुरू कर दिया, जिसके बाद स्थानीय स्तर पर आपत्तियां उठने लगीं। शिकायत मिलने के बाद रेलवे प्रशासन ने देर रात कार्रवाई करते हुए गुंबद को हटाकर स्टेशन भवन की छत के एक किनारे रख दिया। अधिकारियों का कहना है कि अब इसकी जगह किसी अन्य रंग का गुंबद लगाया जाएगा। मामले ने स्थानीय स्तर पर काफी चर्चा बटोरी और रेलवे प्रशासन ने इस पर जांच शुरू कर दी है।
 
प्रशासन की त्वरित कार्रवाई
यह स्टेशन उत्तर पूर्व रेलवे के वाराणसी मंडल के अंतर्गत आता है। पूरे प्रकरण की शुरुआत तब हुई जब पूर्व नगर पार्षद सुभाष चंद ने रेलवे के उच्च अधिकारियों से शिकायत की। उन्होंने आरोप लगाया कि हरे रंग का गुंबद दूर से देखने पर मस्जिद जैसा प्रतीत होता है, जिसके कारण कुछ लोग वहां नमाज़ पढ़ने लगे। शिकायत के बाद रेलवे प्रशासन हरकत में आया और बिना किसी सार्वजनिक बयान के रात में ही गुंबद को हटवा दिया गया। हालांकि आधिकारिक तौर पर रेलवे ने अभी तक इस विषय पर विस्तृत टिप्पणी नहीं की है, लेकिन यह जांच की जा रही है कि गुंबद लगाने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया था और डिजाइन की स्वीकृति किसने दी।
 
स्टेशन पुनर्निर्माण और गुंबद लगाने की पृष्ठभूमि
दरअसल, गोरखपुर कैंट रेलवे स्टेशन से पनियहवा रेलवे स्टेशन के बीच रेल लाइन डबलिंग का काम चल रहा है। इसी परियोजना के तहत कई स्टेशनों के प्लेटफॉर्म और भवनों का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। पिपराइच का पुराना स्टेशन भवन भी इसी क्रम में तोड़कर नया बनाया गया था। नई इमारत के केंद्र में सौंदर्य बढ़ाने के उद्देश्य से गुंबदनुमा संरचना की योजना बनाई गई थी। ठेकेदार ने इस गुंबद को हरे रंग की एस्बेस्टस शीट से ढक दिया, जिससे यह दूर से धार्मिक ढांचे जैसा दिखाई देने लगा। यही डिजाइन बाद में विवाद का कारण बन गया और स्थानीय लोगों ने इसे लेकर आपत्ति जताई।
 
विवाद बढ़ने पर बदला गया निर्णय, जांच जारी
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया कि ठेकेदार ने रेलवे अधिकारियों की मिलीभगत से ऐसा डिजाइन तैयार किया, जिससे स्टेशन पर धार्मिक संरचना जैसा आभास होता है। जब यह मुद्दा मीडिया और स्थानीय चर्चा में आया तो रेलवे प्रशासन ने तुरंत कदम उठाते हुए गुंबद को हटवा दिया। अब नए रंग का गुंबद लगाने की बात कही जा रही है, ताकि किसी प्रकार की धार्मिक या सांप्रदायिक गलतफहमी न हो। फिलहाल प्रशासन यह पता लगाने में जुटा है कि निर्माण प्रक्रिया के दौरान डिजाइन को लेकर उचित समीक्षा क्यों नहीं की गई। इस पूरे घटनाक्रम ने सार्वजनिक भवनों की वास्तुकला और संवेदनशीलता को लेकर नए सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनका जवाब आने वाली जांच रिपोर्ट से मिलने की उम्मीद है।