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मुंबई।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मंगलवार को मुंबई में आयोजित मुंबई क्लाइमेट वीक (Mumbai Climate Week) का उद्घाटन करते हुए कहा कि महाराष्ट्र जलवायु वित्त के क्षेत्र में ग्लोबल साउथ के लिए प्रमुख प्रवेश द्वार बन सकता है। उन्होंने वैश्विक संस्थानों से अपील की कि वे उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए टिकाऊ और विस्तार योग्य बुनियादी ढांचा मॉडल विकसित करने में साझेदारी करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि विकासशील देशों को जलवायु अनुकूल परियोजनाओं के लिए बड़े निवेश की आवश्यकता है और यह मंच सामूहिक समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
जलवायु परिवर्तन का असर जमीनी हकीकत
मुख्यमंत्री फडणवीस ने कहा कि यह मंच जलवायु कार्रवाई को तेज करने के लिए भारत का पहला समर्पित प्लेटफॉर्म है और इसके लिए मुंबई से बेहतर शहर कोई नहीं हो सकता। उन्होंने कहा कि जलवायु परिवर्तन के प्रभाव यहां स्पष्ट रूप से महसूस किए जाते हैं। जब अत्यधिक बारिश होती है तो यह सिर्फ आंकड़ा नहीं होता, बल्कि ट्रेनें रुकती हैं, घरों में पानी भरता है और लोगों की आजीविका प्रभावित होती है। इसी तरह बढ़ती गर्मी का असर सीधे श्रमिकों, फुटपाथ विक्रेताओं और किसानों पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि शहर की चुनौतियां ही इसे जलवायु समाधान की प्रयोगशाला बनाती हैं।
स्वच्छ ऊर्जा में भारत की प्रगति, हरित विकास पर जोर
सीएम फडणवीस ने स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में भारत की तेज प्रगति का उल्लेख करते हुए कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने 260 गीगावाट से अधिक नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली है। उन्होंने बताया कि महाराष्ट्र हरित हाइड्रोजन, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, बायोफ्यूल और टिकाऊ बुनियादी ढांचे को तेजी से बढ़ावा दे रहा है। औद्योगिक गलियारों में नवीकरणीय ऊर्जा का विस्तार हो रहा है और शहरी परिवहन प्रणाली में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ रही है। राज्य की नई परियोजनाओं में पर्यावरणीय स्थिरता को डिजाइन स्तर पर ही शामिल किया जा रहा है।
टिकाऊ जीवनशैली पर बल
उन्होंने कहा मुंबई देश की वित्तीय राजधानी होने के नाते वैश्विक जलवायु वित्त का केंद्र बन सकती है। विकासशील देशों को टिकाऊ बुनियादी ढांचे के लिए भारी निवेश की जरूरत है और भारत साझेदारी के लिए तैयार है। उन्होंने जिम्मेदार उपभोग, संसाधनों के कुशल उपयोग और जागरूक जीवनशैली को भी जलवायु परिवर्तन से निपटने का महत्वपूर्ण आधार बताया। उनके अनुसार नीति, वित्त, तकनीक और व्यवहार जब एक साथ आते हैं, तभी वास्तविक परिवर्तन संभव होता है। उन्होंने कहा कि भविष्य में देशों का मूल्यांकन उनके कार्यान्वयन से होगा, न कि केवल घोषणाओं से।
वैश्विक नेतृत्व की मौजूदगी
इस सम्मेलन में कई प्रमुख नेता और विशेषज्ञ शामिल हुए, जिनमें केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी, राज्य मंत्री पंकजा मुंडे, मुंबई की महापौर रितु तावड़े, एमएमआरडीए के आयुक्त संजय मुखर्जी, यूएनईपी के ग्लोबल प्रमुख मार्टिन क्रॉस और प्रोजेक्ट मुंबई के प्रतिनिधि शामिल रहे। सम्मेलन का उद्देश्य केवल संवाद नहीं, बल्कि ठोस समाधान और क्रियान्वयन सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री फडणवीस ने स्पष्ट किया कि मुंबई नेतृत्व के लिए तैयार है और भारत वैश्विक साझेदारी के लिए प्रतिबद्ध है।