सत्र के बीच भी किताबों का इंतजार! 11 हजार से अधिक विद्यार्थी बिना पाठ्यपुस्तकों के

31 Jan 2026 21:14:04
 
without Textbooks
 Image Source:(Internet)
नागपुर।
सरकारी स्कूलों की शिक्षा गुणवत्ता सुधारने के दावों के बीच जमीनी हकीकत एक बार फिर चिंता बढ़ा रही है। नागपुर जिले के जिला परिषद (जिप) स्कूलों में पढ़ने वाले 11 हजार से अधिक विद्यार्थी शैक्षणिक सत्र 2025–26 के आधे से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक अपनी पाठ्यपुस्तकों (Textbooks) का इंतजार कर रहे हैं। जिले में 1,500 से ज्यादा जिप स्कूलों में करीब 60 हजार से अधिक विद्यार्थी नामांकित हैं। सरकारी नियमों के अनुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें दी जानी हैं, लेकिन इस वर्ष किताबों की आपूर्ति वास्तविक छात्र संख्या के अनुरूप नहीं हो पाई है। इसका सीधा असर बच्चों की पढ़ाई और सीखने की प्रक्रिया पर पड़ रहा है।
 
कक्षा पहली से आठवीं तक आपूर्ति में भारी कमी
शिक्षा विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार कक्षा पहली से आठवीं तक के कई विद्यार्थियों को अब तक पाठ्यपुस्तकें नहीं मिली हैं। हालांकि जिले में 11,559 विद्यार्थियों को पूर्ण सेट उपलब्ध कराए जाने का दावा किया गया है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में बच्चे जरूरी शैक्षणिक सामग्री से वंचित हैं। अधिकारियों का कहना है कि विभाग ने समय रहते सरकार को अतिरिक्त मांग पत्र भेजे थे, इसके बावजूद जनवरी माह तक भी आवश्यक किताबें प्राप्त नहीं हो सकीं। कई स्कूलों में प्रधानाध्यापकों ने पुराने पाठ्यपुस्तकों को बांटकर स्थिति संभालने की कोशिश की, लेकिन यह व्यवस्था जरूरत के मुकाबले नाकाफी साबित हुई।
 
डिजिटल खर्च बनाम बुनियादी जरूरतें
सूत्रों के अनुसार जब स्कूलों ने स्थानीय स्तर पर किताबें खरीदने के लिए निधि की मांग की, तो उन्हें स्थानीय निकायों से संपर्क करने की सलाह दी गई। हालांकि, स्थानीय निकायों के पास भी पर्याप्त स्टॉक नहीं होने से समस्या जस की तस बनी हुई है। यह स्थिति ऐसे समय में सामने आई है, जब जिला परिषद स्कूलों में स्मार्ट टीवी, टैबलेट और नया फर्नीचर जैसे डिजिटल और बुनियादी ढांचे पर भारी खर्च किया जा रहा है। अभिभावकों और शिक्षकों का कहना है कि जब तक बच्चों के हाथ में किताबें नहीं होंगी, तब तक डिजिटल सुविधाओं का लाभ सीमित रहेगा। यह मामला शिक्षा विभाग की प्राथमिकताओं और योजना क्रियान्वयन पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
Powered By Sangraha 9.0