बीड जिला अस्पताल अमानवीयता का मामला! बुजुर्ग महिला को दरवाजे के सामने लिटाकर स्टाफ हुआ रवाना

22 Jan 2026 20:04:00
- इलाज के इंतजार में तड़पती रही बुजुर्ग, वीडियो वायरल

Beed District HospitalImage Source:(Internet) 
बीड।
बीड़ (Beed) जिला अस्पताल से मानवता को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है। इलाज के लिए आई एक बीमार बुजुर्ग महिला को सोनोग्राफी के इंतजार में केंद्र के दरवाज़े के सामने जमीन पर लिटा दिया गया, लेकिन इसके बावजूद अस्पताल स्टाफ ने केंद्र बंद कर वहां से चले जाने की संवेदनहीनता दिखाई। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद लोगों में जबरदस्त आक्रोश है। बुधवार को हुई इस घटना ने एक बार फिर सरकारी अस्पतालों की कार्यप्रणाली और कर्मचारियों की संवेदनशीलता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पहले से ही जिला अस्पताल के कर्मचारियों द्वारा समय पालन न किए जाने को लेकर मरीजों में नाराजगी थी, ऐसे में इस घटना ने गुस्से को और भड़का दिया है। नागरिकों और सामाजिक संगठनों की ओर से दोषी कर्मचारियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है।
 
लिफ्ट बंद, तीसरी मंज़िल से गोद में उठाकर लाई गई मरीज
जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग महिला को डॉक्टरों ने सोनोग्राफी कराने की सलाह दी थी। महिला जिला अस्पताल की तीसरी मंज़िल पर भर्ती थी, लेकिन अस्पताल की लिफ्ट बंद होने के कारण कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने उसे गोद में उठाकर नीचे सोनोग्राफी केंद्र तक पहुंचाया। महिला शाम छह बजे से पहले ही केंद्र पर पहुंच गई थी, बावजूद इसके वहां मौजूद महिला कर्मचारी ने पौने छह बजे ही सोनोग्राफी केंद्र का दरवाजा बंद कर दिया। गंभीर हालत में दरवाजे के सामने लेटी बुजुर्ग महिला की ओर कर्मचारी ने ध्यान तक नहीं दिया। परिजनों द्वारा पूछताछ करने पर कर्मचारी ने उनसे भी बदसलूकी से बात की और केंद्र बंद कर वहां से चली गई।
 
जांच के आदेश, दोषियों पर कार्रवाई का भरोसा
घटना के सामने आने के बाद जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर सवालों की बौछार हो गई है। वीडियो वायरल होते ही स्वास्थ्य विभाग हरकत में आया। जिला शल्य चिकित्सक डॉ. सतीशकुमार सोलंके ने बताया कि मामले की प्राथमिक जांच कर ली गई है और लापरवाही बरतने वाली नर्स और डॉक्टर के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि मरीजों के साथ इस तरह का व्यवहार किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। वहीं, स्थानीय नागरिकों का कहना है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों के साथ इंसानियत का व्यवहार होना चाहिए, लेकिन इस घटना ने सिस्टम की संवेदनहीनता को उजागर कर दिया है। अब सभी की नजरें प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हैं कि दोषियों पर वास्तव में कितनी सख्त कार्रवाई होती है।
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