- मुंबई हाईकोर्ट की कड़ी टिप्पणी, सरकार से मांगा जवाब
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एबी न्यूज़ नेटवर्क।
महाड नगर परिषद चुनाव के दौरान हुई हिंसा को लेकर मुंबई हाईकोर्ट (High Court) ने महाराष्ट्र सरकार पर कड़ी नाराजगी जताई है। कोर्ट ने मंत्री भरत गोगावले के बेटे और अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी न होने पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि “ऐसा लगता है कि मुख्यमंत्री इतने लाचार हैं कि इस मामले में कुछ भी नहीं कर पा रहे।” हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह इस संबंध में मुख्यमंत्री और मंत्री भरत गोगावले से स्पष्ट निर्देश लेकर अपना रुख अदालत के सामने रखे। अदालत के अनुसार, जब आरोपी सत्ता से जुड़े हों तो कानून की प्रक्रिया ठप पड़ती नजर आती है, जो राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल
कोर्ट ने पुलिस और सरकार की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। हाईकोर्ट ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि पुलिस यदि चाहे तो 24 घंटे के भीतर किसी को भी गिरफ्तार कर सकती है, लेकिन जब सरकार या तंत्र गिरफ्तारी नहीं करना चाहता, तब इस तरह के हलफनामे दाखिल किए जाते हैं। अदालत ने यह भी टिप्पणी की कि महाराष्ट्र में कानून का राज कमजोर होता दिख रहा है। इस मामले में मंत्री भरत गोगावले के बेटे विकास गोगावले, भतीजे महेश गोगावले, पूर्व विधायक माणिक जगताप के बेटे और एनसीपी नेता श्रीयांश जगताप के खिलाफ मामला दर्ज है। इसके बावजूद अब तक किसी भी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं होने पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है।
हिंसा का मामला और राजनीतिक पृष्ठभूमि
महाड नगर परिषद चुनाव के दौरान नवे नगर इलाके में भारी तनाव फैल गया था। विकास गोगावले और सुशांत जाबरे के समर्थकों के बीच जमकर झड़प हुई, जिसमें मारपीट और तोड़फोड़ की घटनाएं सामने आईं। शुरुआती जानकारी के अनुसार, सुशांत जाबरे और उनके बॉडीगार्ड पर हमला किया गया, वहीं उनके समर्थकों की कई गाड़ियों में तोड़फोड़ हुई। इस दौरान जाबरे समर्थकों द्वारा रिवॉल्वर दिखाए जाने और बाद में वही रिवॉल्वर लेकर विकास गोगावले के पुलिस थाने पहुंचने की भी चर्चा रही। दोनों पक्षों की ओर से महाड पुलिस स्टेशन में परस्पर शिकायत दर्ज की गईं। अग्रिम जमानत याचिकाएं खारिज होने के बाद सभी आरोपी फरार हो गए, लेकिन पुलिस अब तक विकास गोगावले को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। इस पूरे घटनाक्रम के पीछे महायुति सरकार बनने के बाद से भरत गोगावले और सुनील तटकरे के बीच संरक्षक मंत्री पद को लेकर चल रही राजनीतिक खींचतान को भी अहम वजह माना जा रहा है, जिसका असर सीधे तौर पर चुनावी हिंसा में दिखाई दिया।