- डिजिटल पॉपुलैरिटी से वीजा तक
- इमिग्रेशन से भी मिला जवाब
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एबी न्यूज़ नेटवर्क।
डिजिटल युग में टैलेंट की परिभाषा तेजी से बदली है। जहां पहले मंच, स्टूडियो या खेल के मैदान से पहचान बनती थी, वहीं आज सोशल मीडिया के व्यूज, फॉलोअर्स और एंगेजमेंट भी सफलता का पैमाना हैं। इसी बदलाव का प्रतीक बनी हैं कैनेडियन सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर जूलिया ऐन, जिन्हें अमेरिका का प्रतिष्ठित O-1B वीजा मिला। जूलिया का दावा, “मुझे अपने ब्रेस्ट की वजह से US O-1B वीज़ा मिला” सोशल मीडिया पर वायरल हो गया और बहस छिड़ गई कि क्या डिजिटल पॉपुलैरिटी अब ‘असाधारण प्रतिभा’ की श्रेणी में आती है। यह मामला न केवल सोशल मीडिया की ताकत दिखाता है, बल्कि अमेरिकी इमिग्रेशन सिस्टम के बदलते नजरिए को भी उजागर करता है।
वीडियो बने सबूत: कंटेंट ही बना ताकत
25 वर्षीय जूलिया ऐन तब सुर्खियों में आईं जब उन्होंने अपने वीज़ा आवेदन में पारंपरिक परफॉर्मेंस के बजाय सोशल मीडिया कंटेंट को अपनी मुख्य योग्यता बताया। उन्होंने एप्लीकेशन के साथ कई वीडियो सबमिट किए कुछ में वह लो-कट शर्ट में नजर आती हैं, तो कुछ में हल्के-फुल्के अंदाज में सवाल पूछते या सैंडविच खाते दिखती हैं। जूलिया ने स्वीकार किया कि ये वीडियो अमेरिकी अधिकारियों को भेजे गए थे। उनका कहना है कि उनका कंटेंट ह्यूमरस है और वैश्विक माहौल में बढ़ती नकारात्मकता के बीच लोगों को राहत देता है। आंकड़े भी उनकी लोकप्रियता की पुष्टि करते हैं एक वीडियो को 11 मिलियन से अधिक व्यूज, लाखों लाइक्स और हजारों कमेंट्स मिले हैं।
O-1B वीज़ा का बदलता इतिहास
O-1B वीज़ा को अमेरिका में “कला के क्षेत्र में असाधारण प्रतिभा” के लिए दिया जाता है। इसकी जड़ें 1972 तक जाती हैं, जब इसे जॉन लेनन को अमेरिका में रहने की अनुमति देने के लिए इस्तेमाल किया गया। 1990 में इसे औपचारिक रूप से कलाकारों के लिए लागू किया गया। पिछले एक दशक में इसकी प्रोफ़ाइल बदली है जहां पहले बड़े गायक, कलाकार और सांस्कृतिक हस्तियां आवेदन करती थीं, वहीं अब सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, ई-स्पोर्ट्स खिलाड़ी और डिजिटल क्रिएटर्स की संख्या बढ़ी है। 2024 में लगभग 20,000 लोगों को यह वीज़ा मिलने की संभावना बताई गई है।
कानूनी नजरिया और इकॉनमी का तर्क
इमिग्रेशन वकीलों का कहना है कि सिर्फ बोल्ड वीडियो या शारीरिक बनावट से O-1B वीज़ा नहीं मिलता। आवेदक को अपने क्षेत्र में विशिष्टता, राष्ट्रीय/अंतरराष्ट्रीय पहचान, मजबूत फैन फॉलोइंग, आय के दस्तावेज और प्रोफेशनल सफलता के प्रमाण देने होते हैं। जूलिया ने भी ब्रांड सहयोग, प्लेटफॉर्म्स और इनकम से जुड़े सबूत पेश किए। इमिग्रेशन एडवोकेट्स मानते हैं कि ऐसे क्रिएटर्स अमेरिकी इकॉनमी में योगदान देते हैं और डिजिटल एंटरटेनमेंट को आगे बढ़ाते हैं। तीन साल के लिए जारी होने वाला O-1B वीज़ा रिन्यू भी हो सकता है और यही वजह है कि जूलिया ऐन का मामला आज डिजिटल टैलेंट पर नई बहस का केंद्र बन गया है।