डिजिटल युग में बच्चों की ब्रेन पावर बढ़ाने में यूसीएमएएस बना सशक्त माध्यम

18 Jan 2026 20:53:58
 
UCMAS
 Image Source:(Internet)
नागपुर |
आज का दौर पूरी तरह डिजिटल हो चुका है, जहां बच्चों को पढ़ाई और खेलकूद से जुड़ी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध हो जाती हैं। इसके चलते बच्चों को अधिक मेहनत या गहन एकाग्रता की आवश्यकता कम पड़ती है, जिसका सीधा असर उनके कंसंट्रेशन लेवल पर देखने को मिल रहा है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए ग्लोबल चाइल्ड डेवलपमेंट प्रोग्राम यूसीएमएएस (UCMAS) को विकसित किया गया है, जो बच्चों की ब्रेन पावर, मेमोरी, कंसन्ट्रेशन और प्रॉब्लम सॉल्विंग स्किल्स को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रहा है।
 
मिनटों में 200 प्रश्न हल
रविवार को रेशिमबाग स्थित डॉ. हेडगेवार स्मारक समिति के महर्षि व्यास सभागृह में यूसीएमएएस की इसी तकनीक की प्रभावशाली झलक देखने को मिली। यहां 5 से 13 वर्ष की आयु के बच्चों ने कुछ ही मिनटों में 200 गणितीय प्रश्न हल कर उपस्थित अभिभावकों और दर्शकों को चौंका दिया। बच्चों का उत्साह बढ़ाने के लिए उनके माता-पिता भी बड़ी संख्या में मौजूद रहे और तालियों के माध्यम से उनका हौसला बढ़ाया।
 

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8 लेवल पुरे करने वालों को पुरस्कार
यह प्रतियोगिता यूसीएमएएस की 14वीं नागपुर रीजन स्टेट लेवल प्रतियोगिता थी, जो कोविड के बाद आयोजित की गई। इसमें राज्य के विभिन्न शहरों से 1200 से अधिक विद्यार्थियों ने भाग लिया। प्रतियोगिता तीन श्रेणियों विजुअल, लिसनिंग और फ्लैश में आयोजित की गई, जहां बच्चों ने एबेकस तकनीक की मदद से गणितीय प्रश्नों को सटीकता और तेजी से हल किया। कार्यक्रम के अंत में 8 लेवल पूरे करने वाले विद्यार्थियों का ग्रेजुएशन समारोह और पुरस्कार वितरण भी संपन्न हुआ।
 
एक्सपर्ट्स ने रखे विचार....
इस अवसर पर छत्तीसगढ़ स्टेट और नागपुर रिजन के सीईओ दिलीप जैन ने कहा, “जिस तरह सरकार नई शिक्षा नीति (एनईपी) के तहत रटने के बजाय समझ कर पढ़ने और बच्चों को स्किल्ड बनाने पर जोर दे रही है, उसी दिशा में यह प्रोग्राम प्रभावी रूप से काम कर रहा है। यहां आए सभी बच्चों ने शानदार प्रदर्शन किया है, जो इस कॉन्सेप्ट की सफलता को दर्शाता है।”
 

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यूसीएमएएस इंडिया हेड सिम्प्लिसियो मेनेज ने बताया, “हमारे कॉन्सेप्ट में ‘6 फिंगर टेक्निक’ सबसे महत्वपूर्ण है। इसके जरिए बच्चे गणित को आसान और रोचक तरीके से सीखते हैं। इससे उनकी विजुअलाइजेशन, लिसनिंग स्किल्स, मेमोरी और कंसंट्रेशन पावर में उल्लेखनीय सुधार होता है, जो पढ़ाई के साथ-साथ जीवन के अन्य क्षेत्रों में भी उपयोगी साबित होता है।”

पेरेंट्स भी उत्साहित
अभिभावक तेजस्विनी सावरबांधे ने इसे “बेहतरीन और प्रभावशाली कॉन्सेप्ट” बताते हुए कहा कि इससे बच्चों को पढ़ाई में जबरदस्ती करने की जरूरत नहीं पड़ती और वे स्वाभाविक रूप से रुचि लेकर सीखते हैं। वहीं पैरेंट प्रेमकुमार मेश्राम ने कहा कि राज्य भर से आए बच्चों के बीच हेल्दी कॉम्पिटिशन देखने को मिला, जो बच्चों को आत्मविश्वासी और भविष्य के लिए सक्षम बना रहा है। यूसीएमएएस कार्यक्रम आज के डिजिटल युग में बच्चों के समग्र विकास की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।
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