- मीडियम कैलिबर एम्यूनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का रक्षा मंत्री ने किया उद्घाटन
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नागपुर:
देश की रक्षा क्षमता को आत्मनिर्भरता की नई ऊंचाइयों तक ले जाने की दिशा में एक और निर्णायक कदम नागपुर में देखने को मिला, जब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह (Rajnath Singh) ने सोलर डिफेंस एंड एयरोस्पेस लिमिटेड के मीडियम कैलिबर एम्यूनिशन मैन्युफैक्चरिंग फैसिलिटी का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम केवल एक औद्योगिक परियोजना का शुभारंभ नहीं था, बल्कि भारत के उस विजन की झलक थी, जिसमें देश न सिर्फ अपनी रक्षा जरूरतें स्वयं पूरी करेगा, बल्कि वैश्विक स्तर पर रक्षा उत्पादन का एक प्रमुख केंद्र भी बनेगा। आत्मनिर्भर भारत की सोच को केंद्र में रखते हुए रक्षा मंत्री ने यह स्पष्ट किया कि सरकार गोला-बारूद निर्माण में आत्मनिर्भरता को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। एक समय था जब एम्युनिशन की कमी से देश की सैन्य तैयारियों पर असर पड़ता था, लेकिन आज भारत उसी कमजोरी को अपनी सबसे बड़ी ताकत में बदलने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
नागपुर में आधुनिक एम्युनिशन फैसिलिटी का शुभारंभ
रक्षा मंत्री द्वारा उद्घाटित यह अत्याधुनिक और पूर्णतः स्वचालित संयंत्र 30 मिमी गोला-बारूद का निर्माण करेगा, जिसका उपयोग भारतीय सेना और नौसेना द्वारा व्यापक रूप से किया जाता है। उद्घाटन के दौरान राजनाथ सिंह ने पिनाका रॉकेट निर्माण इकाई का भी दौरा किया और आर्मेनिया के लिए गाइडेड पिनाका रॉकेट्स की पहली खेप को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह न केवल भारत की तकनीकी क्षमता का प्रमाण है, बल्कि रक्षा निर्यात के क्षेत्र में बढ़ते आत्मविश्वास को भी दर्शाता है। उन्होंने निजी क्षेत्र की भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि सोलर समूह द्वारा निर्मित नागास्त्र ड्रोन का ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सफल उपयोग भारत की रणनीतिक क्षमता को साबित करता है।
निजी क्षेत्र की बढ़ती भूमिका, रक्षा क्षेत्र की नई रीढ़
राजनाथ सिंह ने कहा कि रक्षा निर्माण और अनुसंधान एवं विकास में निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी समय की आवश्यकता है। उन्होंने ‘भार्गवास्त्र’ काउंटर ड्रोन सिस्टम के सफल परीक्षण का उल्लेख करते हुए कहा कि यह निजी क्षेत्र की तकनीकी दक्षता का उत्कृष्ट उदाहरण है। रक्षा मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकार का लक्ष्य है कि आने वाले समय में रक्षा उत्पादन में निजी क्षेत्र की भागीदारी 50 प्रतिशत या उससे अधिक हो। सरकार द्वारा प्लेटफॉर्म, सिस्टम और सब-सिस्टम के क्रमिक स्वदेशीकरण तथा न्यूनतम 50 प्रतिशत स्वदेशी सामग्री सुनिश्चित करने के निर्णय से निजी उद्योगों का मनोबल बढ़ा है।
आत्मनिर्भर भारत से वैश्विक रक्षा निर्यातक बनने की राह
रक्षा मंत्री ने आंकड़ों के माध्यम से आत्मनिर्भरता की उपलब्धियों को रेखांकित किया। उन्होंने बताया कि वर्ष 2014 में जहां देश का रक्षा उत्पादन मात्र 46,425 करोड़ रुपये था, वहीं आज यह बढ़कर लगभग 1.51 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच चुका है, जिसमें 33,000 करोड़ रुपये से अधिक का योगदान निजी क्षेत्र का है। इसी तरह, रक्षा निर्यात जो एक दशक पहले 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, आज रिकॉर्ड 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। उन्होंने कहा कि भारत के पास सार्वजनिक और निजी क्षेत्र का एक अनोखा व संतुलित रक्षा निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र है, जिसे और मजबूत कर राष्ट्रीय हित में उपयोग करने की आवश्यकता है।