मनपा चुनाव में उभरी युवा शक्ति! सबसे कम उम्र की नगरसेविका बनी हट्टीठेले

17 Jan 2026 19:21:22
 
Youth power emerges
नागपुर।
नागपुर नगर निगम (एनएमसी) चुनावों (Elections) में इस बार राजनीति की तस्वीर कुछ अलग ही नजर आई, जहां युवाओं ने न केवल बढ़-चढ़कर मतदान किया, बल्कि नेतृत्व की जिम्मेदारी भी अपने हाथों में ली। महज 21 वर्ष की लक्ष्मी हट्टीठेले ने इतिहास रचते हुए एनएमसी की अब तक की सबसे कम उम्र की नगरसेविका बनने का गौरव हासिल किया है। पांचवें सेमेस्टर की बीए (मनोविज्ञान) की छात्रा लक्ष्मी ने भाजपा के टिकट पर प्रभाग 5-ए से चुनाव लड़ते हुए शानदार जीत दर्ज की। शुरुआती मतगणना में पिछड़ने के बावजूद, उन्होंने धैर्य और विश्वास के साथ मुकाबला जारी रखा और अंततः विजय हासिल कर यह साबित किया कि उम्र नहीं, सोच और संकल्प मायने रखते हैं।
 
रोमांचक मतगणना और मजबूत जीत
मतगणना के पहले 12 राउंड तक लक्ष्मी अपने प्रतिद्वंद्वी से पीछे चल रही थीं, जिससे उनकी हार लगभग तय मानी जा रही थी। लेकिन 13वें राउंड में अचानक बाजी पलटी और उन्होंने 181 मतों की बढ़त बना ली। इसके बाद लक्ष्मी ने लगातार बढ़त कायम रखी और अंत में 1,024 मतों के अंतर से चुनाव जीत लिया। लक्ष्मी राजनीतिक रूप से सक्रिय परिवार से आती हैं। वह दिवंगत राजू हट्टीठेले और दुर्गा हट्टीठेले की पुत्री हैं, जो दोनों पूर्व में नगरसेवक रह चुके हैं। इससे पहले जाति प्रमाणपत्र विवाद के चलते उनकी मां को अयोग्य ठहराया गया था, जिसके बाद यह जीत परिवार के लिए एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।
 
जनता और जेन-जी को दिया धन्यवाद
जीत के बाद लक्ष्मी हट्टीठेले ने मतदाताओं, विशेषकर युवाओं का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि जेन-ज़ी मतदाताओं का समर्थन उनके लिए प्रेरणादायक है। लक्ष्मी ने भरोसा दिलाया कि वह पार्टी और नागरिकों की अपेक्षाओं पर खरा उतरने का हर संभव प्रयास करेंगी। उनकी जीत को स्थानीय स्वराज्य संस्थाओं में युवाओं की बढ़ती भागीदारी और बदलते राजनीतिक दृष्टिकोण का संकेत माना जा रहा है। राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यह परिणाम आने वाले समय में युवा नेतृत्व को और मजबूती दे सकता है।
 
एआईएमआईएम की अलीशा फहीम खान की चौंकाने वाली जीत
चुनाव परिणामों में एक और बड़ा उलटफेर यशोधरा नगर के प्रभाग 3डी में देखने को मिला, जहां एआईएमआईएम की 29 वर्षीय उम्मीदवार अलीशा खान ने भाजपा की वरिष्ठ प्रत्याशी भाग्यश्री कानतोड़े को करीब 1,900 मतों से हराया। अपने पहले ही चुनाव में अलीशा ने 9,455 वोट हासिल किए, जबकि कानतोड़े को 7,580 मत मिले। अलीशा की जीत ऐसे समय में हुई है, जब उनका परिवार व्यक्तिगत संकटों से गुजर रहा है। उनके पति फहीम मार्च 2025 के महाल दंगों के मुख्य आरोपी हैं और घटना के बाद नागपुर महानगरपालिका द्वारा परिवार का मकान तोड़ा गया था, जिसे परिवार ने अवैध करार दिया। जानकारों का मानना है कि सहानुभूति और कथित अन्याय की भावना ने मतदाताओं को प्रभावित किया, जिसका असर सीधे चुनाव परिणामों में दिखाई दिया।
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