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नागपुर।
नागपुर महानगरपालिका चुनाव के नतीजे घोषित होते ही शहर की राजनीति में एक नया सवाल केंद्र में आ गया है, अगला महापौर (Mayor) कौन होगा? भारतीय जनता पार्टी को स्पष्ट बहुमत मिलने के बाद भी महापौर पद को लेकर तस्वीर अब तक साफ नहीं हो पाई है। इसकी सबसे बड़ी वजह महापौर आरक्षण की लॉटरी की घोषणा न होना है। आमतौर पर मनपा चुनाव से पहले या प्रभाग रचना के समय महापौर पद का आरक्षण तय कर दिया जाता है, जिससे यह स्पष्ट हो जाता है कि किस वर्ग के पार्षद इस पद के लिए पात्र होंगे। लेकिन इस बार राज्य में पहली बार ऐसा हुआ है कि चुनाव परिणाम आ जाने के बाद भी महापौर आरक्षण की प्रक्रिया अधर में लटकी हुई है, जिससे प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में असमंजस की स्थिति बनी हुई है।
आरक्षण प्रक्रिया पर संशय, संभावित नामों पर अटकलें
महापौर आरक्षण को लेकर अब दो प्रमुख संभावनाओं पर चर्चा हो रही है। क्या पूर्व चुनावों में तय किए गए रोटेशन के अनुसार ही आरक्षण लागू रहेगा या फिर ‘जीरो रोस्टर’ के तहत नई प्रक्रिया शुरू की जाएगी। इस अस्पष्टता के चलते भाजपा के भीतर संभावित महापौर उम्मीदवारों के नामों को लेकर कयास तेज हो गए हैं। विभिन्न वर्गों से जुड़े कई पार्षदों को मजबूत दावेदार माना जा रहा है, वहीं कुछ इच्छुक नेताओं द्वारा शीर्ष नेतृत्व से समर्थन मिलने के दावे भी किए जा रहे हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि आरक्षण की स्थिति स्पष्ट होते ही तस्वीर तेजी से बदलेगी और पार्टी नेतृत्व को अंतिम फैसला लेना होगा। फिलहाल, नागपुर में महापौर की कुर्सी को लेकर सियासी चर्चाओं का बाजार पूरी तरह गर्म है।