- नीरज पांडे की अब तक की सबसे स्मार्ट थ्रिलर
- कस्टम्स काउंटर के उस पार की सिहरन
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एबी न्यूज नेटवर्क।
कभी हवाई सफर के दौरान कस्टम्स अधिकारी की एक अतिरिक्त नजर से दिल की धड़कन तेज हो जाती है भले ही छुपाने को कुछ न हो। नेटफ्लिक्स की नई सीरीज ‘तस्करी: द स्मगलर्स वेब’ (Taskari The Smugglers Web) इसी बेचैनी को अपनी ताकत बनाती है। नीरज पांडे की यह थ्रिलर कस्टम्स और स्मगलिंग की उस अंधेरी दुनिया का दरवाजा खोलती है, जिसे फिल्मों में अब तक सिर्फ एक लाइन या संदर्भ में छुआ गया था। करीब चार घंटे में फैली यह कहानी धीरे-धीरे उस नेटवर्क को उघाड़ती है, जहां तेज़ दिमाग, जोखिम और कानून के बीच खतरनाक खेल चलता है। नेटफ्लिक्स की साल की पहली ओरिजिनल सीरीज़ होने के नाते, ‘टास्करी’ एक दमदार और यादगार शुरुआत करती है।
कहानी और ट्रीटमेंट
कहानी तीन निलंबित कस्टम्स अधिकारियों के इर्द-गिर्द घूमती है, जिन्हें एक हाई-रिस्क ऑपरेशन के लिए दोबारा बुलाया जाता है। इसके बाद दर्शक स्मगलिंग की ऐसी परतों में उतरता है, जो चौंकाती भी हैं और डराती भी। सात एपिसोड की यह सीरीज तेज रफ्तार के साथ आगे बढ़ती है, लेकिन कहीं भी सतही नहीं लगती। एक सीन में रूटीन चेक के दौरान बंदर की तस्करी का खुलासा हो जाना इस दुनिया की अजीब और खौफनाक सच्चाई दिखा देता है। नीरज पांडे और विपुल के. रावल की लेखनी जानकारी भी देती है और रोमांच भी, जिससे हर एपिसोड आपको बांधे रखता है।
शोर नहीं, असरदार सिनेमा
इमरान हाशमी यहां बिना हीरोइज्म के एक संयमित कस्टम्स अधिकारी के रूप में छा जाते हैं। शरद केलकर ‘बड़े चौधरी’ के रोल में मजबूत प्रभाव छोड़ते हैं, वहीं नंदीश संधू, जोया अफरोज और अमृता खानविलकर अपनी भूमिकाओं में सटीक हैं। नीरज पांडे का निर्देशन कहानी को केंद्र में रखता है, किसी एक किरदार को महिमामंडित नहीं करता। कुल मिलाकर, ‘टास्करी: द स्मगलर्स वेब’ एक स्मार्ट, सधी हुई और जरूर देखने लायक थ्रिलर है, जो अगली बार कस्टम्स काउंटर पर खड़े होने से पहले आपको सोचने पर मजबूर कर देगी।