पीएम मोदी ने मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल पर दी देशवासियों को शुभकामनाएं

14 Jan 2026 14:53:38
नई शुरुआत और सकारात्मकता का संदेश

PM ModiImage Source:(Internet) 
एबी न्यूज़ नेटवर्क।
नई फसल, नए संकल्प और नई ऊर्जा के प्रतीक पर्वों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Modi) ने देशवासियों के नाम भावपूर्ण संदेश दिया। बुधवार, 14 जनवरी 2026 को उन्होंने मकर संक्रांति, माघ बिहू और पोंगल के अवसर पर अलग-अलग पत्रों के माध्यम से शुभकामनाएं दी। अपने संदेश में पीएम मोदी ने इन पर्वों को केवल परंपरा तक सीमित न मानते हुए, उन्हें आशा, एकता और सकारात्मकता का जीवंत प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि सूर्य की गति के साथ जीवन में भी नई शुरुआत होती है और यही संदेश ये पर्व देते हैं। भारत जैसे विविधताओं से भरे देश में जब अलग-अलग नामों और रूपों में एक ही भावना के साथ त्योहार मनाए जाते हैं, तो यह हमारी सांस्कृतिक समृद्धि और सामाजिक एकजुटता को दर्शाता है।
 
किसानों के सम्मान और कृतज्ञता का पर्व
पीएम मोदी ने मकर संक्रांति को किसानों और उनके परिवारों से गहराई से जुड़ा पर्व बताते हुए कहा कि यह त्योहार हमें अन्नदाताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर देता है। सूर्य के मकर राशि में प्रवेश के साथ मनाया जाने वाला यह मध्य-शीतकालीन फसल पर्व देशभर में अलग-अलग परंपराओं के साथ मनाया जाता है। उन्होंने कहा कि संक्रांति समाज में आशा, आत्मविश्वास और सामूहिकता की भावना को मजबूत करती है। उन्होंने कामना की कि यह वर्ष सभी के लिए समृद्धि, स्वास्थ्य और सुख लेकर आए तथा घर-घर में खुशहाली और समाज में सौहार्द बना रहे।
 
असमिया संस्कृति की आत्मा
माघ बिहू के अवसर पर प्रधानमंत्री ने असम और पूर्वोत्तर भारत के लोगों को शुभकामनाएं देते हुए इसे आनंद, भाईचारे और संतोष का पर्व बताया। उन्होंने कहा कि माघ बिहू फसल कटाई के समापन का उत्सव है, जो किसानों की मेहनत और योगदान को सम्मान देता है। यह पर्व हमें संतोष, उदारता और आपसी देखभाल की सीख देता है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में कामना की कि माघ बिहू सभी के जीवन में शांति, अच्छा स्वास्थ्य और खुशहाली लेकर आए तथा आने वाला वर्ष सफलता और समृद्धि से भरा हो।
 
तमिल परंपराओं की वैश्विक पहचान
पोंगल को तमिल संस्कृति की चमकदार पहचान बताते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने इसे प्रकृति और मानव श्रम के गहरे संबंध का प्रतीक कहा। उन्होंने कहा कि यह पर्व कृषि, ग्रामीण जीवन और परिश्रम की गरिमा से जुड़ा है। परिवारों का एक साथ आकर पारंपरिक व्यंजन बनाना और खुशियां बांटना पीढ़ियों के बीच संबंधों को मजबूत करता है। प्रधानमंत्री ने यह भी उल्लेख किया कि दुनिया की प्राचीनतम भाषाओं में से एक तमिल की सांस्कृतिक विरासत के कारण पोंगल आज वैश्विक पर्व बन चुका है, जिसे देश-विदेश में तमिल समुदाय पूरे उत्साह के साथ मनाता है।
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