25 हजार रुपये का जुर्माना पतंग उड़ाने पर! 2.5 लाख रुपए विक्रेताओं पर! नायलॉन मांझे के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट का सख्त रुख

14 Jan 2026 16:49:32
- जानलेवा धागे पर न्यायालय की कड़ी चेतावनी

Bombay High Court Image Source:(Internet) 
एबी न्यूज़ नेटवर्क।
मकर संक्रांति जैसे पर्वों की खुशियों के बीच जिस नायलॉन मांझे ने वर्षों से जान का खतरा पैदा किया है, उस पर अब बॉम्बे हाईकोर्ट (Bombay High Court) ने निर्णायक प्रहार किया है। पतंगबाजी के नाम पर इस्तेमाल होने वाला यह तेज़ और अदृश्य धागा हर साल इंसानों, पक्षियों और पशुओं की जान लेता रहा है। बार-बार की घटनाओं, चेतावनियों और सरकारी दावों के बावजूद हालात जस के तस बने रहने पर न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है। औरंगाबाद और नागपुर पीठों ने अलग-अलग आदेशों में साफ कहा कि नायलॉन मांझे पर नियंत्रण न कर पाना केवल प्रशासनिक विफलता नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन है। अब यह मुद्दा सिर्फ सुरक्षा का नहीं, बल्कि शासन की जवाबदेही का बन चुका है।
 
अनुच्छेद 21 और 48A का हवाला, शासन पर सवाल
9 जनवरी को पारित आदेश में औरंगाबाद पीठ ने कहा कि नायलॉन मांझे पर लगाम न लग पाना संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार को सीधे प्रभावित करता है। न्यायालय ने यह भी रेखांकित किया कि यह खतरा केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है, बल्कि पक्षियों और अन्य जीवों की क्रूर मौतें अनुच्छेद 48A और 51A(g) में निहित पर्यावरण संरक्षण के दायित्वों का उल्लंघन हैं। न्यायमूर्ति विभा कंकणवाडी और हितेन एस. वेनेगावकर की पीठ ने प्रशासन की कार्यप्रणाली को “एपिसोडिक और औपचारिक” बताते हुए कहा कि मीडिया में घटना आते ही छापे और विशेष अभियान शुरू होते हैं, लेकिन कुछ समय बाद सब कुछ फिर ढीला पड़ जाता है।
 
नागपुर पीठ का कड़ा फैसला: जुर्माना और जवाबदेही तय
12 जनवरी को नागपुर पीठ ने और भी सख्त कदम उठाते हुए आदेश दिया कि नायलॉन मांझे से पतंग उड़ाते पाए जाने पर व्यक्ति पर 25,000 रुपए का जुर्माना लगाया जाएगा। यदि दोषी नाबालिग हुआ, तो यह राशि उसके माता-पिता से वसूली जाएगी। इतना ही नहीं, नायलॉन मांझा रखने या बेचने वाले विक्रेताओं पर 2.5 रुपए लाख का भारी जुर्माना तय किया गया है। यह आदेश 2021 में अखबारों की रिपोर्ट के आधार पर शुरू की गई स्वतः संज्ञान जनहित याचिका में पारित किया गया। न्यायालय ने माना कि बिना सख्त दंड के इस खतरे पर रोक संभव नहीं है।
 
हर साल जानलेवा हादसे, फिर भी हालात जस के तस
न्यायमूर्ति अनिल एस. किलोर और राज डी. वाकोडे की पीठ ने कहा कि हर साल नायलॉन मांझे से लोगों की मौतें और गंभीर चोटें सामने आती हैं, जिनकी खबरें मीडिया में नियमित रूप से प्रकाशित होती हैं। इसके बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ। राज्य सरकार द्वारा स्पष्ट कानून या नियम न बनाए जाने से प्रवर्तन एजेंसियों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। इसी कारण अदालत को “डिटरेंट पनिशमेंट” यानी निवारक दंड का रास्ता अपनाना पड़ा।
 
पुलिस अधिकारियों पर भी गिरेगी गाज
नागपुर पीठ ने आदेश में यह भी स्पष्ट किया कि भविष्य में यदि नायलॉन मांझे से कोई अप्रिय घटना होती है, तो संबंधित क्षेत्र के पुलिस अधिकारी को जवाबदेह ठहराया जाएगा। ऐसे मामलों में पुलिस आयुक्त या पुलिस अधीक्षक को संबंधित अधिकारी को नोटिस जारी करना होगा और यह बताना होगा कि कोर्ट के आदेशों का पालन न करने पर उसके खिलाफ कार्रवाई क्यों न की जाए। इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट भी न्यायालय में प्रस्तुत करनी होगी। इससे पहली बार स्पष्ट संदेश गया है कि लापरवाही की कीमत केवल नागरिक नहीं, अधिकारी भी चुकाएंगे।
 
छोटे विक्रेताओं पर कार्रवाई काफी नहीं: औरंगाबाद पीठ
औरंगाबाद पीठ ने राज्य सरकार के रवैये पर तीखी टिप्पणी करते हुए कहा कि केवल छोटे विक्रेताओं या उपयोगकर्ताओं पर कार्रवाई करना पर्याप्त नहीं है। अदालत ने सवाल उठाया कि अब तक निर्माताओं, थोक आपूर्तिकर्ताओं, फाइनेंसरों और संगठित नेटवर्क के खिलाफ क्या ठोस कदम उठाए गए हैं। पीठ ने यह भी चिंता जताई कि नायलॉन मांझा आज भी ऑनलाइन मार्केटप्लेस और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर आसानी से उपलब्ध है, और डिजिटल आयाम को नजरअंदाज करना मौजूदा दौर में गंभीर चूक है।
 
स्पेशल टास्क फोर्स और मुआवजा नीति के निर्देश
अदालत ने पुलिस महानिदेशक को निर्देश दिया कि नायलॉन मांझे के निर्माण, भंडारण, बिक्री, ऑनलाइन मार्केटिंग और उपयोग से जुड़े अपराधों पर लगाम लगाने के लिए तत्काल राज्य स्तरीय स्पेशल टास्क फोर्स गठित की जाए। साथ ही, पीड़ितों के लिए मुआवजा कोष स्थापित करने और भविष्य में होने वाली चोटों के दावों के लिए चार सप्ताह में नीति बनाने का आदेश दिया गया। न्यायालय ने चेतावनी दी कि यदि केवल “कॉस्मेटिक अनुपालन” किया गया, तो वरिष्ठ अधिकारियों की व्यक्तिगत जवाबदेही तय की जाएगी। यह फैसला साफ संकेत देता है कि अब नायलॉन मांझे के खिलाफ लड़ाई केवल कागज़ों में नहीं, ज़मीन पर दिखनी चाहिए।
Powered By Sangraha 9.0