- विभागीय सतर्कता एवं मान्यता समिति की बैठक संपन्न
- समिति की बैठकें नियमित रूप से आयोजित करने के दिए गए निर्देश
नागपुर।
अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत हर घटना को दर्ज किया जाना चाहिए और जांच तुरंत पूरी की जानी चाहिए, इस आशय के निर्देश संभागायुक्त विजयलक्ष्मी बिदारी ने गुरुवार को विभाग में विविध स्तरों पर पीड़ितों को तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के लिए दिए। संभागायुक्त कार्यालय में विजयलक्ष्मी बिदरी की अध्यक्षता में संभागीय सतर्कता एवं नियंत्रण समिति की बैठक आयोजित की गई। वे उस समय बोल रही थीं। जिलाधिकारी विपिन इटनकर, जिला पुलिस अधीक्षक हर्ष पोद्दार, पुलिस उपायुक्त गोयल, जिला लोक अभियोजक श्याम कुले, बीबी नेमाने, प्रशांत सागरे, क्षेत्रीय उपायुक्त और समाज कल्याण विभाग के सदस्य सचिव सिद्धार्थ गायकवाड़, सहायक आयुक्त सुकेशिनी तेलगोटे और संभाग के जिलों के सभी जिलाधिकारी एवं पुलिस अधीक्षक वीडियो कॉन्फ़्रेंसिंग के जरिए उपस्थित थे।
1989 से लेकर अब तक संभाग में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत 334 मामले दर्ज किए गए हैं, जिनमें हत्या, बलात्कार, छेड़छाड़, जातीय दुर्व्यवहार आदि गंभीर अपराध शामिल हैं। पुलिस विभाग द्वारा जांच की गई है और सभी आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 257 मामले कोर्ट में लंबित हैं। बैठक में संभागायुक्त ने सुझाव दिया कि न्यायालय में लंबित मामलों के निष्पादन को लेकर जिला सरकारी अभियोजक के माध्यम से गति दी जाए। अत्याचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज करने के बाद संबंधित पीड़ित की मेडिकल जांच के साथ-साथ अपराध दर्ज करने, अदालत में आरोप पत्र दाखिल करने और अपराध का निपटारा होने तक विविध स्तर पर सरकारी सहायता प्रदान की जाती है। पीड़ितों को यह सहायता तुरंत मिल सके इसके लिए वित्तीय प्रावधान किया गया है। 31 मार्च तक संभाग में 3.15 करोड़ रुपए निधि उपलब्ध कराया गया है। इसके अनुसार बताया गया कि जिला स्तर पर धनराशि का आवंटन पूरा हो चुका है और अतिरिक्त धनराशि की मांग की गई है।
हत्या, मृत्यु, बलात्कार, सामूहिक बलात्कार, स्थायी विकलांगता और डकैती आदि के मामलों में मृतक के उत्तराधिकारियों को 5 हजार रुपए प्रतिमाह देने का प्रावधान है। साथ ही, पीड़ितों के बच्चों की शिक्षा और भरण-पोषण का पूरा खर्च सरकार द्वारा प्रदान किया जाता है। बैठक में सुझाव दिया गया कि तमाम जिला कलेक्टर ऐसे मामलों में संवेदनशीलता से कार्य करें और तत्काल सहायता प्रदान करें।
नियमित बैठकों का करें आयोजन
अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम के लिए उपमंडल स्तर के साथ-साथ जिला स्तर पर भी नियमित बैठकों का आयोजन किया जाना चाहिए। इन बैठकों में संभागायुक्त ने प्रकरणों की समीक्षा कर रिपोर्ट संभागीय सतर्कता एवं नियंत्रण समिति को सौंपने के निर्देश दिए हैं। प्रारंभ में क्षेत्रीय उपायुक्त एवं सदस्य सचिव सिद्धार्थ गायकवाड ने 1989 से फरवरी 2024 तक विभाग में दर्ज प्रकरणों की जानकारी दी। इसमें पुलिस द्वारा जांच किए जा रहे मामले, कोर्ट में लंबित मामले, पीड़ित परिवारों को दी गई आर्थिक सहायता और प्रताड़ना के शिकार लोगों पर की गई कार्रवाई की रिपोर्ट भी पेश की गई।