एनआईटी में चल रहे ठगी के रैकेट का भंडाफोड़

    01-Feb-2024
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-प्लाट के दस्तावेज चुराकर बनाते थे नकली दस्तावेज: पुलिस ने 11 आरोपियों को किया गिरफ्तार
 
fraud racket running in nit busted
 
नागपुर।
नागपुर सुधार प्रन्यास के ऑफिस से दस्तावेज, वहीं कार्यरत कर्मचारियों की मदद से गायब कर उसके आधार पर नकली दस्तावेज बनाकर प्लॉट की बिक्री करने वाले रैकेट का पुलिस ने पर्दाफाश किया है। इस मामले में पुलिस ने 11 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में एनआईटी और सब-रजिस्ट्रार ऑफिस में काम करने 2 कर्मचारी भी शामिल है। आरोपी दस्तावेजों को चोरी करते थे और उन्हें पुराना दिखाने के लिए चाय के पानी में डूबा देते थे।
 
घोटाले में सुधार प्रन्यास के कई अधिकारियों के भी शामिल होने की आशंका है। सम्बंधित दोनों विभागों के कई अधिकरियों को नोटिस जारी किया गया है। मामले की जांच कर रहे डीसीपी मदने ने कहा कि मामले में अभी और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है। गिरफ्तार आरोपियों में प्रवीण मोरेश्वर सहारे (उम्र 46 साल, प्लाट नं 72, साई मंदिर रोड, गोधनी निवासी), पवन कुमार जंगेला (उम्र 34 साल, अभिनव अपार्टमेंट, मनीष नगर निवासी), कौशल हिवंज (उम्र 22 साल, परसोड़ी, वर्धा रोड निवासी), अधर्वा कृष्ण भाग्यवंत (उम्र 22 साल, गोपाल नगर दूसरा बस स्टॉप निवासी), प्रतिभा मेश्राम (उम्र 46 साल, अभ्यंकर चौक निवासी), कार्तिक उर्फ रजत शिवराम लोनारे (उम्र 30 साल, लालगंज, मेहदी बाग रोड निवासी), सिद्धार्थ वासुदेव चव्हाण (उम्र 40 साल, सेहदीप कॉलोनी, जरीपटका निवासी) मोहम्मद रियाज उर्फ बब्लू अब्दुल रउफ (उम्र 54 साल, क़स्बापुर मस्जिद के पास, हंसापुरी निवासी), नासिर हसन खान (उम्र 45 साल, स्वागत नगर, काटोल रोड निवासी) इमरान अली अख्तर अली (उम्र 43 साल, आयशा मस्जिद, राज चौक निवासी) और रुपेश अरुण वारजुरकर (उम्र 34 साल, महात्मा फुले नगर, रामश्वरी रिंगरोड निवासी) का समावेश है।
 
ज्ञात हो कि, बीते साल नवंबर महीने में सदर पुलिस थाने में फरियादी निशा राजकुमार जाजू ने धोखाधड़ी का एक मामला दर्ज करवाया था। जिसमें नारी परिसर में उनके 3 हजार स्क्वायर फीट के दो प्लॉट को जाली दस्तावेज के आधार पर आरोपियों ने बेच दिया था। इस मामले की जांच के दौरान पुलिस ने इस पूरे रैकेट का खुलासा किया है। पुलिस ने 16 लोगों के खिलाफ मामला किया था। बीते एक महीने से पुलिस मामले की जांच कर रही थी। जहां अभी तक 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। वहीं पांच अभी भी फरार है, जिनकी तलाश पुलिस कर रही है।
 
दस्तावेजों को पुराना दिखाने चाय के पानी में डुबाया जाता था
पुलिस की जांच में अब तक पता चला है कि पिछले कई सालों से इस रैकेट के जरिए नए कागज को चाय के पानी में भिगोकर पुराने दस्तावेज के रूप में दिखाया जाता था और उसके आधार पर ही जाली दस्तावेज तैयार कर इस पूरे रैकेट को चलाया जा रहा था। संगठित गिरोह होने के चलते ही अब पुलिस से इस टोली पर मकोका के तहत कार्रवाई करने की तैयारी कर रही है।
 
एनआईटी के कई अधिकारी भी लिप्त होने की आशंका
इस मामले में गिरफ्तार रजत लोनारे और रुपेश वाजुरकर एनआईटी और सब-रजिस्टर विभाग में काम करते हैं। दोनों आरोपी लगातार भूमि से जुड़े हुई फाइलों को चोरी करते और अन्य आरोपियों को दे देते थे। जहां बनावट दस्तावेज बनाकर भूमि को अन्य लोगों को बेंच देते थे। पुलिस के अनुसार, इस घोटाले में एनआईटी के दोनों विभागों के कई अधिकारी भी शामिल है। मामला सामने आने के बाद शक के दायरे में आने वाले अधिकारियों को नोटिस जारी किया गया है। पुलिस के अनुसार, अभी इस मामले में और गिरफ्तारियां हो सकती है।