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नई दिल्ली : संक्रांति का विशेष धार्मिक महत्व होता है। इस दिन लोग सुबह जल्दी उठकर पवित्र स्नान करने के लिए गंगा, यमुना या सरस्वती तीनों में से किसी एक नदी में जाते हैं। लेकिन बहुत से लोग नहीं जानते कि यह पवित्र स्नान संक्रांति के अवसर पर क्यों किया जाता है, इसके पीछे क्या महत्व है?
दरअसल, संक्रांति के दिन होने वाले इस पवित्र स्नान का काफी महत्व माना जाता है। कड़ाके की ठंड के बावजूद श्रद्धालुओं का उत्साह कम नहीं हो रहा है। इस ठंड के मौसम में भी श्रद्धालु गंगा स्नान के लिए जाते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार गंगा, यमुना और सरस्वती की पवित्र नदियों में स्नान करने से सभी पाप धुल जाते हैं। वह समस्त पापों से छुटकारा पा लेते है। कहा जाता है कि मकर संक्रांति पर पवित्र स्नान करना चाहिए और दान देना चाहिए। यदि गंगा स्नान के लिए जाना संभव न हो तो घर में नहाने के पानी में गंगाजल और तिल मिलाकर स्नान करने का भी महत्व है।
इस पृष्ठभूमि में शनिवार से ही लाखों की संख्या में श्रद्धालु पवित्र नदियों के तट पर नजर आ रहे हैं। इस तरह उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, पंजाब जैसे विभिन्न राज्यों में नदियों के किनारे की तस्वीर सामने आई है।
पश्चिम बंगाल के गंगासागर मेले के दौरान कोलकाता के बाबू घाट पर कई जगहों से श्रद्धालु उमड़े। इस मेले में नागा साधुओं के साथ-साथ कई हिंदू भक्तों ने भाग लिया है।
इस बीच, श्रद्धालुओं ने पंजाब के स्वर्ण मंदिर में पवित्र डुबकी भी लगाई।
माघ मास और मकर संक्रांति के एक और स्नान पर्व के अवसर पर संगम नगरी प्रयागराज में भी विशेष तैयारी की गई है। आज पहला प्रमुख स्नान पर्व है। इस मौके पर पुलिस और प्रशासन को तैनात किया गया है क्योंकि प्रयागराज में लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा सकती है।
मकर संक्रांति साल की शुरुआत में आने वाला पहला पर्व है। यह त्योहार न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भारत में गुजरात राज्य में सबसे महत्वपूर्ण है। इस दौरान गुजरात समेत देश के अन्य राज्यों में भी मकर संक्रांति का भव्य नजारा देखा जाता है।