मलद्वार से भी ली जा सकेगी सांस? जापानी वैज्ञानिकों के निष्कर्ष ने दी लोगों को उम्मीद

    23-Jun-2022
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टोक्यो: कई जानवर सांस लेने और छोड़ने के लिए फेफड़ों (Lungs) या गलफड़ों (Gills) का उपयोग करते हैं। एकमात्र लोच (Elasticity), कैटफ़िश (Cat Fish) और मकड़ी (Spider) ऐसे जीव है जो वातावरण में ऑक्सीजन की कमी होने पर आंतों (Intestines) से सांस लेते हैं। इसी बीच, जापानी वैज्ञानिकों (Japanese Scientists) द्वारा एक ऐसी जानकारी सामने आई है जिसे सुनकर आप चौंक जायेंगे।
 

Anus Breathing Image Source: Internet
 
दरअसल, जापानी वैज्ञानिकों (Japanese Scientists) के अनुसार कुछ प्राणी मलाशय (Rectum) जिसे गुदा या मलद्वार (Anas) भी कहते है, से भी सांस ले सकते है। जापानी वैज्ञानिकों द्वारा किए गए निष्कर्ष ने सांस से संबंधित होने वाली समस्याओं वाले लोगों के लिए एक रास्ता खोल दिया है। यह शोध जर्नल ऑफ द क्लिनिकल एंड ट्रांसलेशनल रिसर्च एंड टेक्नोलॉजी इनसाइट (Journal of the Clinical and Translational Research and Technology Insight) में भी प्रकाशित हुआ है।
 
टोक्यो (Tokyo) विश्वविद्यालय में रिसर्च
 
पिछले साल टोक्यो मेडिकल एंड डेंटल यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं (Researchers from Tokyo Medical and Dental University) द्वारा किए गए एक अध्ययन में, शोधकर्ताओं ने पाया कि चूहों और सूअरों को रक्त की आपूर्ति उनके मलाशय के माध्यम से की जाती थी। इस विधि को आंतों का वेंटिलेशन कहा जाता है। अभी यह सोचना थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन भविष्य में इस तकनीक का इस्तेमाल एक दिन सांस की गंभीर समस्या से जूझ रहे लोगों को ऑक्सीजन की आपूर्ति करने में मददगार साबित हो सकता है। CTRTI जर्नल में प्रकाशित डेली स्टार की एक रिपोर्ट के अनुसार, वैज्ञानिकों के एक समूह ने कछुओं के चयापचय के आधार पर सुअरों और चूहों पर कई प्रयोग किए।
 
चूहों और सूअरों पर प्रयोग
 
इस प्रयोग में, वैज्ञानिकों ने म्यूकोसल लाइनिंग चूहों और सूअरों जैसे जानवरों की आंतों को पतला करने के लिए आंतों की स्क्रबिंग की। इससे रक्त का प्रवाह कम हो गया। इस प्रक्रिया का उद्देश्य जानवरों की आंतों को साफ करना था। फिर उन्हें ऑक्सीजन रहित कमरे में रखा गया। ऐसा माना जाता है कि कछुओं की इतनी पतली परत होती है। नतीजतन, वे अपने गुदा के माध्यम से सांस लेने में सक्षम होते हैं। यह उन्हें सर्दी से बचाने के लिए सुरक्षित है।
 
हालांकि, रिपोर्ट में यह नहीं बताया गया कि वैज्ञानिकों की टीम कहां से आई है। इस प्रयोग से पता चला कि जिन जानवरों को आंतों से ऑक्सीजन (Intestinal ventilation) नहीं मिला और जिनकी सांस नियंत्रित थी, 11 मिनट के बाद उनकी मृत्यु हो गई। दूसरी ओर, जिन जानवरों की आंत पतली (Bowel Cleansing) नहीं थी, लेकिन उन्हें आंतों का वेंटिलेशन (Intestinal ventilation) दिया गया था, वे लगभग 18 मिनट तक जीवित रहे। इससे पता चलता है कि उनके ऑक्सीजन का स्तर कुछ बढ़ गया है।
 
एक घंटे के प्रयोग में यह पाया गया कि जिन 75 प्रतिशत जानवरों का मलाशय साफ हो गया था और उन्हें दबाव में ऑक्सीजन मिली थी, वे एक घंटे तक जीवित रहे। यह साबित करता है कि चूहे और सूअर उचित परिस्थितियों में आंतों से सांस लेने में सक्षम हैं। यह भी माना जाता है कि अन्य स्तनधारी मलाशय के माध्यम से सांस ले सकेंगे।