यूक्रेन, चीन के मेडिकल छात्रों को मिल सकती है स्क्रीनिंग टेस्ट में बैठने की अनुमति

    18-Jun-2022
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National Medical Examination
(Image Credit: Twitter) 
 
नई दिल्ली :
कोरोना महामारी के चलते देश और देश के बाहर पढ़ रहे स्टूडेंट्स को कई परेशानियों का सामना करना पड़ा है। इस बीच मेडिकल के स्टूडेंट्स के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। दरअसल, देश के शीर्ष चिकित्सा शिक्षा नियामक ने हाल ही में प्रस्ताव रखा है जिसके तहत चीन और यूक्रेन के अंतिम वर्ष के मेडिकल छात्र जो महामारी या युद्ध के कारण अपना व्यावहारिक प्रशिक्षण पूरा कर पाए, उन्हें विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (FMGE) में बैठने की अनुमति दी जा सकती है। विदेशी चिकित्सा स्नातक परीक्षा (FMGE) एक स्क्रीनिंग टेस्ट जिसे विदेशी मेडिकल छात्रों को देश में प्रैक्टिस करने के लिए क्लियर करना होता है।
 
हालांकि, परीक्षा में उत्तीर्ण होने वाले छात्रों का देश में चिकित्सा का अभ्यास करने के स्थायी पंजीकरण की पात्रता के लिए उम्मीदवार को दो साल की इंटर्नशिप पूरी करनी होगी। गौरतलब है कि यह राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के प्रस्ताव के अनुसार अप्रत्याशित परिस्थितियों के कारण दी गई एकमुश्त छूट होगी। वर्तमान में, विदेशी मेडिकल स्नातकों को भारत में FMGE परीक्षा में बैठने के लिए अपना प्रशिक्षण और विश्वविद्यालय में एक साल की इंटर्नशिप पूरी करनी होती है। फिर उन्हें स्थायी पंजीकरण प्राप्त करने के लिए भारत में भी एक साल की लंबी इंटर्नशिप करनी पड़ती है।
 
लेकिन कोरोना महामारी की वजह से पिछले तीन सैलून में उत्पन्न परिस्थितियों के मद्देनजर यह छूट दी जा सकती है। यह “छूट केवल एक वर्ष के लिए लागू होगी, इसलिए छात्रों को इस साल इन देशों में पाठ्यक्रमों में प्रवेश लेने से बचना चाहिए, हालांकि चीन अब बहुत कम छात्रों को लौटने की अनुमति दे रहा है। चीन के कुछ छात्रों को ऑनलाइन इंटर्नशिप पूर्णता प्रमाण पत्र दिया गया। एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, दो साल की इंटर्नशिप नैदानिक प्रशिक्षण में अंतराल को पाटने में मदद करेगी। हालांकि, छूट से कई छात्रों को मदद मिलने की संभावना नहीं है। स्क्रीनिंग टेस्ट आयोजित करने वाले नेशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन द्वारा उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार, 2020 में परीक्षा देने वाले छात्रों में से केवल 16.5% ने ही इसे पास कर पाए थे।
 
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (एनएमसी) के स्नातक मेडिकल बोर्ड द्वारा यह प्रस्ताव प्रस्तुत किया गया था। प्रस्ताव में कहा गया है कि पहले और दूसरे वर्ष के मेडिकल छात्र, जो नवंबर 2021 के बाद अपने कॉलेज में शामिल हुए, भारतीय कॉलेजों में प्रवेश लेने के लिए फिर से NEET के लिए उपस्थित हो सकते हैं। ये छात्र, तीसरे और चौथे वर्ष के छात्रों के विपरीत, अन्य यूरोपीय देशों के विश्वविद्यालयों में स्थानांतरण नहीं ले सकते। वहीं, नवंबर 2021 में लागू हुए विदेशी मेडिकल ग्रेजुएट्स के लिए नए दिशा-निर्देश में कहा गया कि छात्रों को अपनी पूरी ट्रेनिंग और इंटर्नशिप एक ही यूनिवर्सिटी से पूरी करनी होगी।
 
महामारी के कारण NEET 2021 की काउंसलिंग में देरी होने के कारण, पहले वर्ष के कुछ छात्रों ने उसी वर्ष NEET के लिए उपस्थित होने का विकल्प चुना था। माना जा रहा है कि तीसरे और चौथे वर्ष के मेडिकल छात्रों को रूस, कजाकिस्तान या किर्गिस्तान जैसे अन्य यूरोपीय देशों के कॉलेजों में प्रवेश लेने की अनुमति दी जाएगी जो भारतीय मानदंडों का पालन करने वाले पाठ्यक्रम प्रदान करते हैं। हालांकि, प्रस्ताव में स्पष्ट रूप से इसका उल्लेख नहीं है। इस पर एक अधिकारी ने कहा, “भारत में इतने सारे मेडिकल छात्रों को समायोजित करने का कोई तरीका नहीं है। हमारे पास कुल 90,000 एमबीबीएस सीटें हैं और मेरिट सूची में ऊपर वाले बहुत से ऐसे लोग हैं जिन्हें शायद प्रवेश नहीं मिला है, तो हम उन्हें सीट कैसे दे सकते हैं?”
 
फिलीपींस के छात्रों को नहीं मिलेगी राहत
 
चीन और यूक्रेन के अंतिम वर्ष के मेडिकल छात्रों के लिए छूट दी गई है, लेकिन फिलीपींस में पढ़ने वाले लगभग 10,000 छात्रों का भविष्य अभी भी अधर में हैं। नवंबर 2021 में नए विदेशी मेडिकल स्नातक दिशा निर्देश लागू होने के बाद देश में पाठ्यक्रमों में शामिल होने वाले छात्रों के दो बैच FMGE स्क्रीनिंग टेस्ट के लिए पात्र नहीं होंगे। ऐसा इसलिए है क्योंकि नए दिशानिर्देशों की एक शर्त यह थी कि पाठ्यक्रम भारत में 5.5 साल या 54 महीनों में पढ़ाए जाने वाले चिकित्सा पाठ्यक्रमों के बराबर होना चाहिए। फिलीपींस में मेडिकल कोर्स चार साल में पढ़ाया जाता है और इससे पहले बेसिक बायोलॉजी में दो साल का बीएस कोर्स किया जाता है। और NMC का मानना है कि बीएस बायोलॉजी कोर्स की अवधि को मेडिकल ट्रेनिंग का हिस्सा नहीं माना जा सकता।