WPI Inflation: थोक महंगाई दर पहुंचा रिकॉर्ड स्तर पर! आपकी जेब पर क्यों पड़ेगा भार, यहां पढ़ें

    14-Jun-2022
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(Image Credit: Twitter)
 
नई दिल्ली:
 
देश में लगातार बढ़ते महंगाई के पार से आम जनता पहले ही परेशान है। पेट्रोल-डीजल, रोजमर्रा की चीजों के दाम जहां आसमान छू रहे हैं इसी बीच अब थोक महंगाई दर (Wholesale Price Index-WPI) को लेकर बड़ी खबर सामने आई है। सरकारी आंकड़ों की मानें तो मई के महीने में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर 15.88 प्रतिशत के रिकॉर्ड उच्च स्तर पर पहुंच गई है। कई साल बाद यह सूचकांक (Wholesale Price Index-WPI) रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा है। बता दें, थोक महंगाई दर (Wholesale Price Index-WPI) के आंकड़ें वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी किये जाते हैं।
 
 
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय के अनुसार, मई में थोक मूल्य सूचकांक 15.08 प्रतिशत और अप्रैल में 13.11 प्रतिशत दर्ज किया गया। मंत्रालय द्वारा जारी आंकड़ों में सीपीआई आधारित मुद्रास्फीति (CPI Based Inflation) अप्रैल में 7.79 प्रतिशत की तुलना में मई में गिरकर 7.04 प्रतिशत हो गई। गौरतलब है कि WPI मुद्रास्फीति (WPI Inflation) लगातार 14 महीनों से दहाई अंक में बनी हुई है। 2013 में नई सीरीज की शुरुआत के बाद से यह संख्या कम से कम नौ साल में सबसे ज्यादा है। आधार वर्ष अब 2011-12 है। मनीकंट्रोल के मुताबिक, अर्थशास्त्रियों ने पिछले महीने WPI के आंकड़ों की तुलना पुरानी सीरीज से की थी और पाया कि यह 30 साल में सबसे ज्यादा है।
 
आपकी जेब पर पड़ेगा असर?
 
WPI थोक खरीदारों के दृष्टिकोण से माल की मुद्रास्फीति (Inflation) को इंगित करता है। यदि WPI अधिक है, तो इसके उच्च CPI या खुदरा मुद्रास्फीति (Retail Inflation) में स्नोबॉल होने की सबसे अधिक संभावना है। थोक कीमत खुदरा कीमतों के संभावित भविष्य का संकेत देती हैं। इसका मतलब यदि थोक विक्रेताओं (Wholesale Dealers) को अधिक भुगतान करना पड़ता है, तो वे खुदरा विक्रेताओं (Retailers) से अधिक कीमतों की मांग करेंगे। अंतत: उपभोक्ताओं (Consumers) को अधिक कीमत चुकानी पड़ेगी।