‘सिर्फ लड़कियों पर ही पाबंदियां क्यों?’:दिल्ली CM रेखा गुप्ता

    30-Sep-2026
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- महिला सुरक्षा पर बोलीं दिल्ली सीएम - लड़कों के व्यवहार और परवरिश पर भी हो फोकस
- पुलिस-प्रशासन और न्यायपालिका की जवाबदेही तय हो

Rekha Gupta
 Image Source:(Internet)
 
नई दिल्ली। दिल्ली में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर बढ़ती चिंता के बीच मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता (Rekha Gupta) ने बुधवार को कहा कि यौन हिंसा की घटनाओं के बाद लड़कियों पर पाबंदियां लगाने के बजाय समाज को लड़कों के व्यवहार और परवरिश पर भी ध्यान देना चाहिए। मैत्रेयी कॉलेज के डायमंड जुबली समारोह में बोलते हुए उन्होंने सवाल उठाया कि किसी घटना के बाद परिवार और समाज अक्सर लड़कियों से यह क्यों कहते हैं कि वे कहां जाएं, किस समय बाहर निकलें और क्या सावधानी बरतें। मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल उनके व्यवहार को नियंत्रित करने से सुनिश्चित नहीं हो सकती। इसके लिए पुलिस, प्रशासन, स्थानीय निकाय और न्यायपालिका को भी अपनी जिम्मेदारियां प्रभावी ढंग से निभानी होंगी।
 
 
‘लड़कियों को समझाते हैं, लड़कों से कब बात करेंगे?’
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली में जब भी महिलाओं या लड़कियों की सुरक्षा से जुड़ी घटनाएं सामने आती हैं, तो समाज में सबसे पहले लड़कियों पर अतिरिक्त प्रतिबंध लगाने की चर्चा शुरू हो जाती है। उन्होंने सवाल किया, “लेकिन सिर्फ लड़कियों पर ही क्यों? लड़कों का क्या?” गुप्ता ने कहा कि लड़कों की काउंसलिंग, उनकी परवरिश और महिलाओं के प्रति उनके व्यवहार पर भी गंभीरता से बात होनी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 2014 के उस संदेश का भी उल्लेख किया, जिसमें बेटियों को बार-बार समझाने के साथ बेटों को भी समझाने की जरूरत पर जोर दिया गया था। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाज में यह बात स्पष्ट होनी चाहिए कि किसी महिला या लड़की की सहमति के बिना किया गया व्यवहार स्वीकार्य नहीं है और “नो मीन्स नो” की समझ बच्चों और युवाओं में विकसित करना जरूरी है।
 
रोशनी, कैमरे और पेट्रोलिंग पर प्रशासन की जिम्मेदारी
रेखा गुप्ता ने महिला सुरक्षा को केवल व्यक्तिगत सावधानी का विषय मानने के बजाय प्रशासनिक जिम्मेदारी से भी जोड़ा। उन्होंने कहा कि शहर में ऐसे स्थानों की पहचान की जानी चाहिए जहां पर्याप्त रोशनी नहीं है, कैमरों की जरूरत है या सुरक्षा कर्मियों की मौजूदगी बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने प्रशासन और स्थानीय निकायों से कहा कि सुरक्षा से जुड़ी कमियों को केवल चिन्हित करने तक सीमित न रखा जाए, बल्कि उन्हें समय पर दूर भी किया जाए। उनके अनुसार दिल्ली में ऐसा कोई क्षेत्र नहीं होना चाहिए जहां प्रकाश व्यवस्था, निगरानी या सुरक्षा व्यवस्था की कमी के कारण महिलाओं और बच्चों को असुरक्षित महसूस करना पड़े। पुलिस की प्रभावी पेट्रोलिंग और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी को भी उन्होंने सार्वजनिक सुरक्षा का अहम हिस्सा बताया।
 
महिलाओं से जुड़े मामलों में जल्द मिले न्याय
मुख्यमंत्री ने महिलाओं और बच्चियों से जुड़े मामलों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज करने की जरूरत पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब किसी महिला या बच्ची के साथ अपराध होता है और वह न्याय की अपेक्षा करती है, तो ऐसे मामलों में त्वरित कार्रवाई जरूरी है। गुप्ता के अनुसार तेज न्याय से पीड़ितों को राहत मिलने के साथ समाज में कानून के प्रति भरोसा भी मजबूत हो सकता है। उन्होंने पुलिस, प्रशासन और न्यायपालिका से अपनी-अपनी जिम्मेदारियां पूरी करने की अपील करते हुए कहा कि अपराध करने वालों के खिलाफ कानून के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने खुद को “एक महिला, एक मां और मुख्यमंत्री” के रूप में संबोधित करते हुए दिल्ली की बेटियों से कहा कि वे अकेली नहीं हैं और शहर में डर, आतंक या उत्पीड़न के लिए कोई जगह नहीं होनी चाहिए।

आस्था कुंज मामले के बाद सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की चिंता
मुख्यमंत्री के ये बयान दिल्ली-एनसीआर में महिलाओं और नाबालिगों की सुरक्षा को लेकर चल रही चर्चा के बीच आए हैं। हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली-एनसीआर में सामने आए यौन अपराधों की रिपोर्टों का स्वतः संज्ञान लेते हुए सार्वजनिक स्थानों की सुरक्षा पर गंभीर चिंता जताई। इनमें कालकाजी मंदिर के पास स्थित आस्था कुंज पार्क में नाबालिग के साथ कथित सामूहिक दुष्कर्म का मामला भी शामिल है। अदालत ने कहा कि पार्क, सड़क और बस जैसे सार्वजनिक स्थान अपर्याप्त रोशनी, निगरानी या पेट्रोलिंग के कारण जोखिम वाले क्षेत्र नहीं बनने चाहिए। सुप्रीम कोर्ट की कार्यवाही के बाद सार्वजनिक स्थलों पर सुरक्षा व्यवस्था, स्ट्रीट लाइट, सीसीटीवी और पुलिस गश्त को लेकर प्रशासन की जिम्मेदारी पर बहस तेज हुई है। ऐसे में रेखा गुप्ता का संदेश महिला सुरक्षा के लिए लड़कियों पर प्रतिबंध के बजाय लड़कों के व्यवहार, मजबूत कानून-व्यवस्था और सुरक्षित सार्वजनिक बुनियादी ढांचे पर समान रूप से ध्यान देने की जरूरत पर केंद्रित रहा।