नेपाल की बाढ़ का बिहार पर असर, गंगा-कोसी-गंडक उफान पर! घर छोड़ रहे लोग

    03-Sep-2026
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घरों में घुसा पानी, नावों से हो रहा आवागमन; खाने-पीने और चारे का संकट

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एबी न्यूज़ नेटवर्क
। नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड का असर अब बिहार के कई इलाकों में दिखाई दे रहा है। गंगा, कोसी और गंडक समेत कई नदियों का जलस्तर तेजी से बढ़ने के कारण निचले और दियारा क्षेत्रों में रहने वाले लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। पटना के नकटा दियारा समेत कई नदी किनारे की बस्तियों में बाढ़ का पानी घरों में घुस गया है। सड़कें और पैदल रास्ते डूबने से लोगों का संपर्क प्रभावित हो गया है। हालात बिगड़ने पर परिवार बच्चों और मवेशियों को साथ लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर पलायन कर रहे हैं। प्रभावित लोगों का आरोप है कि राहत सामग्री और जरूरी सुविधाएं अभी तक पर्याप्त मात्रा में नहीं पहुंची हैं। राहत शिविरों में भी भोजन, पीने के पानी और पशुओं के लिए चारे की कमी बताई जा रही है। ऐसे में कई परिवार अपनी जरूरतें खुद पूरी करने को मजबूर हैं।

दो-तीन दिन पहले ही छोड़ना पड़ा घर
एक स्थानीय निवासी ने बताया कि गंगा का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है और यह खतरे के निशान को पार कर चुका है। पानी ने पूरे इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है और घरों में भी बाढ़ का पानी पहुंच गया है। लोगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाने के लिए नावों का सहारा लेना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल लोगों के लिए भोजन और पीने के पानी तथा मवेशियों के लिए चारे की व्यवस्था करने की अपील की। उनका कहना था कि परिवारों को दो-तीन दिन पहले ही घर छोड़कर निकलना पड़ा, लेकिन अब तक उन्हें पर्याप्त राहत सामग्री नहीं मिली है। नकटा दियारा निवासी निराला कुमार ने भी हालात को बेहद खराब बताया। उन्होंने कहा कि लगभग सभी घरों में पानी घुस चुका है, भोजन और पेयजल की भारी कमी है तथा रास्ते और सड़कें पूरी तरह बंद हो गई हैं। उनके मुताबिक आधे से अधिक लोग पहले ही अपना घर छोड़ चुके हैं। उन्होंने सामुदायिक रसोई शुरू करने और पशुओं के लिए भी भोजन-चारे की व्यवस्था करने की मांग की।

बच्चों और मवेशियों को लेकर पलायन
बाढ़ के कारण दियारा क्षेत्रों के लोगों के सामने इंसानों के साथ-साथ मवेशियों को बचाने की भी बड़ी चुनौती है। स्थानीय निवासी उमेश कुमार यादव ने बताया कि घरों में पानी घुसने के बाद लोग अपने बच्चों और मवेशियों को लेकर सुरक्षित स्थानों की ओर जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दियारा क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त सरकारी सहायता नहीं मिल रही और राहत का लाभ मुख्य बाजार क्षेत्र के लोगों तक ही सीमित रह जाता है। मवेशियों के लिए चारा और परिवार के लिए भोजन की व्यवस्था भी लोगों को अपने पैसे से करनी पड़ रही है। बाढ़ का असर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पर भी पड़ रहा है। गंगा किनारे श्मशान घाट पर दुकान चलाने वाले संतोष कुमार ने बताया कि नदी का पानी लगातार बढ़ रहा है। यदि जलस्तर करीब एक फुट और बढ़ा तो पानी सड़क तक पहुंच जाएगा और अंतिम संस्कार सड़क पर करने की नौबत आ सकती है। उन्होंने प्रशासन से नदी किनारे कटाव रोकने और रेत की बोरियां लगाने की मांग की है।

प्रशासन का दावा- राहत शिविर

बाढ़ के बीच प्रशासन की ओर से प्रभावित लोगों और मवेशियों के लिए राहत व्यवस्था तेज करने का दावा किया गया है। दीघा के भाजपा विधायक संजीव चौरसिया ने गंगा किनारे लगातार निरीक्षण कर जलस्तर की निगरानी करने की बात कही। उन्होंने बताया कि नकटा दियारा पंचायत क्षेत्र से बड़ी संख्या में मवेशी सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंच रहे हैं। इसके बाद अंचल अधिकारी को बुलाकर अस्थायी आश्रय और चारे की व्यवस्था शुरू की गई है। प्रभावित लोगों के लिए तत्काल टेंट और अस्थायी शेल्टर लगाए जा रहे हैं। विधायक के अनुसार, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) से भी समन्वय किया गया है और वे नकटा दियारा तथा बिंद टोली का दौरा कर स्थिति का जायजा लेंगे। उन्होंने भरोसा दिलाया कि सरकार की ओर से मिलने वाली सभी जरूरी बाढ़ राहत सुविधाएं प्रभावित लोगों तक पहुंचाई जाएंगी और किसी तरह की कमी नहीं होने दी जाएगी।

बिहार में बढ़ी चिंता; सरकार ने की तैयारी
बिहार में बिगड़ते हालात के बीच पड़ोसी नेपाल में आई भीषण बाढ़ ने संकट को और गंभीर बना दिया है। नेपाल के राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के आधिकारिक अपडेट के अनुसार, फ्लैश फ्लड से मरने वालों की संख्या 1,204 तक पहुंच गई है। यह संकट 26 अगस्त को तिब्बत-नेपाल सीमा के पास आई विनाशकारी बाढ़ के बाद शुरू हुआ, जिसने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र में पानी, मलबे और बड़े पत्थरों का तेज बहाव ला दिया। इससे बड़े पैमाने पर तबाही हुई। बिहार में भी नदियों के लगातार बढ़ते जलस्तर को देखते हुए दियारा और अन्य संवेदनशील इलाकों के लोगों ने तत्काल भोजन, पीने के पानी, सुरक्षित आश्रय और मवेशियों के लिए चारे की मांग की है। विधायक के अनुसार, मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने नेपाल में आई बाढ़ के बाद बिहार की स्थिति की समीक्षा की है और राज्य सरकार बाढ़ से निपटने के लिए तैयार है। अब सबसे बड़ी चुनौती बढ़ते जलस्तर के बीच प्रभावित परिवारों और उनके मवेशियों को सुरक्षित रखना है।