नेपाल में बाढ़ की तबाही के बीच दर्दनाक मंजर, लापता अपनों की शांति के लिए परिजन कर रहे अंतिम संस्कार

    03-Sep-2026
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- सात दिन से अपनों का इंतजार, अब प्रार्थनाओं में तलाश रहे सुकून


एबी न्यूज़ नेटवर्क। नेपाल में आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने हजारों परिवारों को गहरे सदमे में डाल दिया है। त्रिशूली के एक मठ में इन दिनों ऐसा भावुक मंजर देखने को मिल रहा है, जहां परिवार अपने उन प्रियजनों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान कर रहे हैं, जो बाढ़ के बाद से लापता हैं। हैरानी की बात यह है कि इन परिवारों के पास अब तक यह पुष्टि भी नहीं है कि उनके अपने जीवित हैं या बाढ़ की तेज धार में बह गए। सात दिन बीत जाने के बाद भी जब कोई सुराग नहीं मिला तो परिजनों ने उन्हें मृत मानकर बौद्ध परंपरा के अनुसार अंतिम प्रार्थनाएं शुरू कर दी हैं। मठ में स्थानीय लोग एकत्र होकर लापता लोगों की आत्मा की शांति के लिए अनुष्ठान कर रहे हैं।

‘घर के साथ बह गए लोग’
रसुवा क्षेत्र के स्थानीय निवासी तिशुंग घाले ने अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि उनके इलाके के कई लोग अपने घरों समेत बाढ़ में बह गए और सात दिन बाद भी उनका कोई पता नहीं चला है। उन्होंने बताया कि उनके विस्तारित परिवार के कई सदस्य भी लापता हैं। घाले के अनुसार, जिस क्षेत्र में वे रह रहे थे, वहां से करीब 42 लोग बाढ़ की चपेट में आकर लापता हो गए। उनके परिवार में बड़ी बहन, छोटी बहन और उसका पूरा परिवार भी शामिल है। इसके अलावा उनकी बड़ी बहन की एक बेटी, एक अन्य रिश्तेदार और मौसी सहित कई परिजन बाढ़ में बह गए। उन्होंने कहा कि अपने परिवार के सुरक्षित होने के बावजूद इतने रिश्तेदारों को खोना शब्दों से परे है। घाले ने कहा कि सात दिनों से कोई संपर्क नहीं होने के कारण उन्हें अब 95 प्रतिशत विश्वास है कि ये लोग इस दुनिया में नहीं रहे। इसलिए उनके नाम से प्रार्थना कर रहे हैं, ताकि यदि उनकी मृत्यु हुई है तो उनकी आत्मा को शांति मिल सके।


चीन की ओर से आया पानी

स्थानीय निवासी बोम बहादुर तामांग ने बताया कि यह बाढ़ बेहद असामान्य थी। उनके अनुसार, पहली बार चीन की ओर से आए पानी ने इलाके में इतनी बड़ी तबाही मचाई और कई बस्तियां पूरी तरह बह गईं। देखते ही देखते घर और उनमें रहने वाले लोग तेज बहाव की चपेट में आ गए। बाढ़ के बाद जिन परिवारों के सदस्य लापता हैं, वे अब त्रिशूली के मठ में पहुंचकर सामूहिक रूप से प्रार्थना कर रहे हैं। तामांग ने बताया कि बौद्ध धर्म में मृतकों की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना और धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा है। ऐसे में जिन लोगों के बारे में कोई जानकारी नहीं मिल पा रही है, उनके परिजन मठ में पहुंचकर यही धार्मिक प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। यह उनके लिए अपनों को विदाई देने और इस भयावह त्रासदी के बीच मानसिक शांति पाने का एकमात्र सहारा बन गया है।

1,114 शव बरामद, करीब 3,900 लोग अब भी लापता
फ्लैश फ्लड ने नेपाल के बड़े हिस्से में भारी तबाही मचाई है। राष्ट्रीय आपदा जोखिम न्यूनीकरण एवं प्रबंधन प्राधिकरण (NDRRMA) के अनुसार, अब तक 1,114 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि करीब 3,900 लोग अभी भी संपर्क से बाहर हैं। प्रशासन और बचाव एजेंसियां लगातार राहत एवं बचाव अभियान चला रही हैं। अधिकारियों के मुताबिक 11,993 लोगों को सुरक्षित बचाया जा चुका है। लापता लोगों की तलाश के लिए चौबीसों घंटे सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। हालांकि, कई दुर्गम इलाकों में बाढ़ और भूस्खलन के कारण राहत एवं खोज अभियान में मुश्किलें सामने आ रही हैं।

उम्मीद और मातम के बीच अटके परिवार
त्रिशूली के मठ में जुटे परिवारों की स्थिति इस आपदा की सबसे दर्दनाक तस्वीर पेश करती है। एक ओर वे अपने प्रियजनों के लौट आने की उम्मीद पूरी तरह छोड़ नहीं पा रहे, वहीं सात दिन से किसी तरह का संपर्क न होने के कारण उन्हें अनहोनी की आशंका भी सताने लगी है। ऐसे में धार्मिक अनुष्ठान उनके लिए उम्मीद और मातम के बीच एक भावनात्मक सहारा बन गए हैं। जिन लोगों का कोई अंतिम संस्कार नहीं हो सका, उनके परिजन प्रार्थना के जरिए उन्हें विदाई देने की कोशिश कर रहे हैं। मठ में गूंजती प्रार्थनाओं के बीच हर परिवार की आंखों में एक ही सवाल है—क्या उनका अपना कभी वापस आएगा या फिर यह प्रार्थना ही उनकी आखिरी विदाई बनकर रह जाएगी?