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नई दिल्ली। कॉक्रोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने गुरुवार को संगठन पर लगाए जा रहे ‘B टीम’ के आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि उनकी लड़ाई किसी राजनीतिक दल के लिए नहीं, बल्कि छात्रों और शिक्षा व्यवस्था के लिए है। कांग्रेस या आम आदमी पार्टी की ‘B टीम’ के रूप में काम करने के आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए दिपके ने कहा कि राजनीतिक दल पहले यह तय कर लें कि वे उन्हें किसकी B टीम मानते हैं। उन्होंने कहा, “महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री कहते हैं कि मैं कांग्रेस की B टीम हूं और कुछ लोग कहते हैं कि मैं आम आदमी पार्टी की B टीम हूं। मुझे लगता है कि सभी लोगों को साथ बैठकर पहले यह तय करना चाहिए कि मैं किसकी B टीम हूं। हमारे अनुसार हम छात्रों की A टीम हैं।” उन्होंने स्पष्ट किया कि CJP का मुख्य फोकस विद्यार्थियों, सरकारी स्कूलों और शिक्षा के मुद्दों पर है।
‘स्कूल सुधार किसी एक संगठन का मुद्दा नहीं’
दिपके ने सरकारी स्कूलों की स्थिति सुधारने के अभियान को किसी एक राजनीतिक संगठन से जोड़ने पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि बेहतर स्कूल और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा बच्चों के भविष्य से जुड़ा मुद्दा है, इसलिए जो भी व्यक्ति या संगठन शिक्षा व्यवस्था में सुधार चाहता है, उसे इस दिशा में काम करना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षा के क्षेत्र में केवल आम आदमी पार्टी ही नहीं, बल्कि शिवसेना और महाराष्ट्र में एनसीपी से जुड़े नेता भी काम कर रहे हैं। ऐसे में स्कूल सुधार से जुड़े अभियानों का स्वागत किया जाना चाहिए। दिपके ने सवाल उठाया कि यदि विभिन्न राजनीतिक दल शिक्षा के मुद्दे पर काम कर रहे हैं, तो भाजपा को ऐसे अभियानों पर आपत्ति क्यों होनी चाहिए। उनके मुताबिक, बच्चों और देश के भविष्य से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक चश्मे से देखने के बजाय व्यापक सामाजिक सरोकार के रूप में लिया जाना चाहिए।
‘सार्वजनिक पद पर हैं तो डिग्री भी सार्वजनिक हो’
दिपके ने सार्वजनिक जीवन में मौजूद लोगों की शैक्षणिक योग्यता को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि चुनाव लड़ने वाले और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों की डिग्री एवं शैक्षणिक योग्यताएं जनता के सामने पारदर्शी होनी चाहिए। इसी संदर्भ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की शैक्षणिक डिग्री को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाया। दिपके ने कहा कि यदि उनसे उनकी डिग्री सार्वजनिक करने की मांग की जा रही है, तो सार्वजनिक पद पर बैठे अन्य लोगों की शैक्षणिक योग्यताओं पर भी सवाल पूछे जाने चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की डिग्री पिछले कई वर्षों से सार्वजनिक नहीं की गई है और दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया। दिपके ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता सभी के लिए समान होनी चाहिए और सवाल पूछने का अधिकार जनता के पास होना चाहिए।
CJP-D का दावा—पारदर्शिता और लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया पर जोर
दिपके की यह प्रतिक्रिया CJP-D के संस्थापक मनीष ब्रह्मभट्ट द्वारा संगठन के लॉन्च की घोषणा के बाद सामने आई है। ब्रह्मभट्ट ने संगठन को पारदर्शिता, जवाबदेही और लोकतांत्रिक निर्णय प्रक्रिया पर केंद्रित मंच बताया है। उन्होंने स्वयंसेवकों से अपील की कि आंदोलन को किसी एक राजनीतिक नेता या पार्टी की ‘टीम’ न बनाया जाए। उन्होंने कहा कि संगठन की राष्ट्रीय टीम का गठन लोकतांत्रिक प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा। इस दौरान लोगों को संगठन से जोड़ने के लिए सोशल मीडिया अकाउंट, व्हाट्सऐप नंबर और मिस्ड-कॉल सुविधा शुरू करने की भी घोषणा की गई। वहीं दिपके ने संकेत दिया कि संगठन आगे भी शिक्षा, सरकारी स्कूलों की स्थिति और सार्वजनिक जवाबदेही जैसे मुद्दों को प्रमुखता से उठाता रहेगा।