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उज्जैन। मध्यप्रदेश के उज्जैन में सोमवार को शाही मस्जिद (Shahi Masjid) के एक हिस्से को हटाने की कार्रवाई के दौरान तनाव बढ़ गया। सड़क चौड़ीकरण के विरोध में बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के आसपास जमा थे। कार्रवाई शुरू होने के बाद प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प की स्थिति बन गई। पथराव की घटनाओं के बाद पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े और लाठीचार्ज किया। क्षेत्र में भारी पुलिस बल के साथ रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की तैनाती भी की गई। घटना उस समय हुई, जब उज्जैन नगर निगम सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रस्तावित मार्ग की जद में आ रहे मस्जिद के हिस्से को हटाने की प्रक्रिया आगे बढ़ा रहा था।
सड़क चौड़ीकरण के लिए 15 मीटर का प्रस्ताव, 272 ढांचे चिह्नित
शाही मस्जिद को लेकर विवाद उज्जैन में चल रहे बड़े सड़क चौड़ीकरण अभियान से जुड़ा है। यह काम वर्ष 2028 में होने वाले सिंहस्थ को देखते हुए शहर की यातायात व्यवस्था और श्रद्धालुओं की आवाजाही को सुगम बनाने के लिए किया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, सड़क चौड़ीकरण के लिए शहर में कई स्थानों पर संरचनाओं को हटाने या पीछे करने की कार्रवाई की जा रही है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, कुल 272 ढांचों को इस परियोजना के तहत चिह्नित किया गया है। गोपाल मंदिर और छत्री चौक के आसपास सड़क को करीब 15 मीटर चौड़ा करने की योजना है। शाही मस्जिद का वह हिस्सा, जो प्रस्तावित सड़क की सीमा में आ रहा है, इसी योजना के तहत हटाया जा रहा है।
रातभर मस्जिद के बाहर जुटे रहे लोग, प्रशासन से हुई बातचीत
कार्रवाई के विरोध में मुस्लिम समुदाय के लोग रविवार रात से ही मस्जिद के आसपास मौजूद थे। कई लोगों ने रातभर मौके पर रहकर प्रस्तावित कार्रवाई का विरोध किया। प्रशासन और मस्जिद प्रबंधन के बीच बातचीत भी हुई। न्यू इंडियन एक्सप्रेस के अनुसार, कलेक्टर रोशन सिंह ने कहा कि सड़क चौड़ीकरण की सीमा में आने वाले मकान, दुकानें और धार्मिक स्थल संबंधित समुदायों की सहमति से हटाए जा रहे हैं। शहर काजी खलीकुर रहमान ने भी लोगों से शांति बनाए रखने और अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। कुछ रिपोर्टों के मुताबिक, मस्जिद प्रबंधन और प्रशासन के बीच प्रभावित हिस्से को हटाने को लेकर सहमति बनी थी और मस्जिद समिति के सदस्यों ने प्रभावित हिस्से को हटाने की प्रक्रिया शुरू की थी।
मस्जिद की उम्र और धार्मिक ढांचे को लेकर उठे सवाल
मस्जिद के प्रतिनिधियों ने सड़क चौड़ीकरण में धार्मिक स्थल का हिस्सा हटाए जाने का विरोध किया। मस्जिद के इमाम मोहम्मद इब्राहिम ने इसके निर्माण को वर्ष 1390 का बताते हुए इसे करीब 636 वर्ष पुराना होने का दावा किया है। यह दावा मस्जिद के प्रतिनिधियों की ओर से किया गया है। उनका कहना है कि पहले भी क्षेत्र में सड़क चौड़ीकरण हुआ, लेकिन धार्मिक संरचनाओं को हटाने की जरूरत नहीं पड़ी। इस बीच मामले को लेकर कानूनी प्रक्रिया भी चलती रही। 9 सितंबर को मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने शाही मस्जिद के उस हिस्से को हटाने के खिलाफ दायर याचिकाएं खारिज कर दी थीं और नगर निगम को सड़क चौड़ीकरण की कार्रवाई आगे बढ़ाने की अनुमति दी थी।
हाईकोर्ट में सुनवाई के दिन ही बढ़ा तनाव
सोमवार को मामले की कानूनी प्रक्रिया के बीच मौके पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई। रिपोर्टों के अनुसार, पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच टकराव के दौरान पथराव हुआ, जिसके बाद पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया। कुछ रिपोर्टों में पुलिसकर्मियों के घायल होने की भी जानकारी सामने आई है। प्रशासन ने क्षेत्र में सुरक्षा बढ़ाते हुए बैरिकेडिंग की और लोगों की आवाजाही को नियंत्रित किया। शाही मस्जिद के अलावा सड़क चौड़ीकरण अभियान के तहत शहर में अन्य संरचनाओं पर भी कार्रवाई की जा रही है। इससे पहले मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव के उज्जैन स्थित पैतृक मकान का भी सड़क चौड़ीकरण के तहत एक हिस्सा हटाया गया था और यादव ने स्वयं वहां कार्रवाई की शुरुआत की थी। प्रशासन का कहना है कि यह पूरी कवायद सिंहस्थ 2028 से पहले शहर के बुनियादी ढांचे और यातायात व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए की जा रही है।