गणेशोत्सव के बीच घर के बाहर ‘अघोरी अनुष्ठान’ की अफवाह से दहशत

    16-Sep-2026
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- नंद गांव में आंगन के बाहर हल्दी-कुमकुम से बना घेरा
- आटा की आकृति और नींबू मिलने से मचा हड़कंप

Aghori ritual
 Image Source:(Internet)
 
एबी न्यूज़ नेटवर्क। गणेशोत्सव (Ganeshotsav) के उत्साह के बीच सोमवार, 14 सितंबर को नंद गांव में एक घर के बाहर संदिग्ध तरीके से रखी गई सामग्री मिलने से कुछ समय के लिए दहशत का माहौल बन गया। ग्राम पंचायत कार्यालय के पास रहने वाले विजय मिसाल के घर के आंगन के बाहर सुबह एक गोलाकार रंगोलीनुमा आकृति बनाई गई थी। इसके बीच हल्दी-कुमकुम से तारे के आकार का निशान बनाया गया था। मौके पर आटे से बनी एक आकृति और कटा हुआ नींबू भी रखा मिला। सुबह लोगों की नजर इस पर पड़ने के बाद गांव में तरह-तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। कुछ ग्रामीणों ने इसे कथित तौर पर तंत्र-मंत्र या ‘अघोरी अनुष्ठान’ से जोड़कर देखा, जिससे आसपास के लोगों में चिंता फैल गई।
 
सूचना मिलते ही पुलिस और अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति पहुंची
घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस के साथ अखिल भारतीय अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति के पदाधिकारी भी मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लेने के साथ ग्रामीणों से बातचीत की और उन्हें किसी भी तरह की अफवाह या अंधविश्वास पर भरोसा नहीं करने की अपील की। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मौके पर मिली सामग्री के आधार पर किसी निष्कर्ष पर पहुंचने के बजाय घटना की वास्तविकता सामने आना जरूरी है। ग्रामीणों के अनुसार, नंद में इस तरह की संदिग्ध घटनाएं पहले भी सामने आ चुकी हैं। बार-बार ऐसी घटनाएं होने से स्थानीय लोगों में चिंता बढ़ी है और उन्होंने पुलिस से यह पता लगाने की मांग की है कि घरों के बाहर इस तरह की सामग्री कौन रख रहा है और इसके पीछे वास्तविक कारण क्या है।

कुछ दिन पहले कुही में भी सामने आया था मामला
नंद की घटना से कुछ दिन पहले कुही तहसील के एक श्मशान घाट पर भी इसी तरह का मामला सामने आया था। वहां मृत व्यक्ति की राख के साथ कथित तौर पर तांत्रिक क्रिया करने के आरोप में स्वयंभू तांत्रिक रामनरेश मथु विश्वकर्मा (58) को गिरफ्तार किया गया था। पुलिस ने उसके खिलाफ महाराष्ट्र के अंधश्रद्धा और काला जादू विरोधी कानून के तहत कार्रवाई की थी। लगातार सामने आ रहे ऐसे मामलों के बीच नंद के ग्रामीणों का कहना है कि पुलिस को घटना की जांच कर सच्चाई सामने लानी चाहिए, ताकि किसी तरह की अफवाह या अंधविश्वास के कारण गांव में भय का माहौल न बने।