नागपुर को मिला स्वतंत्र ‘पर्यटन जिला’ का दर्जा!

    16-Sep-2026
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महाराष्ट्र सरकार के फैसले से ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक और वन्यजीव पर्यटन को मिलेगा नया ढांचा

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नागपुर। नागपुर जिले के पर्यटन क्षेत्र को नई पहचान मिली है। महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर को स्वतंत्र ‘पर्यटन जिला’ का दर्जा देने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। पर्यटन विभाग ने इसके लिए शासन निर्णय (GR) जारी किया है। सरकार के अनुसार, इस फैसले का उद्देश्य जिले की ऐतिहासिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, प्राकृतिक और वन्यजीव पर्यटन क्षमता को एकीकृत तरीके से विकसित और प्रचारित करना है। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर बढ़ाने और पर्यटन के माध्यम से आर्थिक गतिविधियों को गति देने पर भी जोर रहेगा। नागपुर को इससे पहले **पर्यटन नीति-2016** के तहत आर्थिक और गैर-आर्थिक महत्व को देखते हुए विशेष पर्यटन जिले के रूप में चिन्हित किया गया था। अब पर्यटन संभावनाओं के विस्तार और जिले के भौगोलिक व ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए स्वतंत्र पर्यटन जिला बनाने का प्रस्ताव स्वीकृत किया गया है।

गोंड-बोंसले इतिहास से संतरा नगरी तक
नागपुर की पर्यटन पहचान में इतिहास और स्थानीय संस्कृति की महत्वपूर्ण भूमिका है। यह क्षेत्र गोंड शासकों और भोंसले राजघराने के इतिहास से जुड़ा रहा है। क्षेत्र में मौजूद किले, ऐतिहासिक इमारतें और अन्य पुरातात्विक अवशेष इस विरासत की झलक देते हैं। नागपुर की पहचान संतरा उत्पादन से भी जुड़ी है, जबकि जिले के प्राकृतिक क्षेत्र पर्यटन को एक अलग आयाम देते हैं। शासन के अनुसार, यहां की हरियाली, लोक परंपराएं, हस्तशिल्प, सांस्कृतिक कार्यक्रम और आदिवासी लोकनृत्य भी पर्यटन की संभावनाओं को मजबूत करते हैं। ऐसे में नए दर्जे के तहत इन अलग-अलग आकर्षणों को एक समन्वित पर्यटन विकास योजना से जोड़ने की संभावना बढ़ेगी।

'टाइगर कैपिटल’ से वन्यजीव सर्किट तक
नागपुर की भौगोलिक स्थिति इसे विदर्भ के प्रमुख वन्यजीव पर्यटन स्थलों का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार बनाती है। शहर से पेंच राष्ट्रीय उद्यान करीब 75 किमी, बोर टाइगर रिजर्व 70 किमी, उमरेड-करहांडला वन्यजीव अभयारण्य 50 किमी, ताडोबा-अंधारी टाइगर रिजर्व 140 किमी, नवेगांव-नागझिरा टाइगर रिजर्व 118 किमी और टिपेश्वर वन्यजीव अभयारण्य करीब 150 किमी की दूरी पर हैं। इसी वजह से नागपुर को ‘टाइगर कैपिटल ऑफ इंडिया’ के रूप में भी जाना जाता है। शहर में बालासाहेब ठाकरे गोरेवाड़ा इंटरनेशनल जूलॉजिकल पार्क और सफारी भी वन्यजीव पर्यटन का प्रमुख आकर्षण है। नए दर्जे के बाद इन स्थलों को जोड़ने वाले पर्यटन सर्किट, सुविधाओं और सेवाओं के विकास पर अधिक समन्वित तरीके से काम किए जाने की संभावना है।

रामटेक से दीक्षाभूमि तक पर्यटन के कई रंग

नागपुर जिले में धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन के भी कई प्रमुख केंद्र हैं। रामटेक का ऐतिहासिक राम मंदिर, खिंडसी की वाटर स्पोर्ट्स सुविधाएं और दीक्षाभूमि प्रमुख आकर्षणों में शामिल हैं। इनके साथ जिले की लोककलाएं, पारंपरिक हस्तशिल्प और सांस्कृतिक आयोजन भी पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। राज्य सरकार की पर्यटन विकास योजनाओं में नागपुर के धार्मिक स्थलों के लिए सुविधाओं, पहुंच मार्ग, पेयजल, पार्किंग और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास का प्रावधान भी दिखाई देता है। स्वतंत्र पर्यटन जिला बनने के बाद इन विविध स्थलों को एक साझा पर्यटन ढांचे के तहत विकसित और प्रचारित करने का अवसर मिलेगा, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और पर्यटन आधारित व्यवसायों की संभावनाएं भी बढ़ सकती हैं।