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मुंबई। वसई-विरार गणेशोत्सव की तैयारियों के बीच वसई-विरार महानगरपालिका में भाजपा पार्षद की एक मांग को लेकर राजनीतिक और सामाजिक चर्चा शुरू हो गई है। भाजपा के ग्रुप लीडर एवं पार्षद अशोक गजानन शेल्के ने महानगरपालिका आयुक्त को पत्र देकर मांग की है कि गणेश विसर्जन स्थलों पर मंडप, बैरिकेडिंग और अन्य व्यवस्थाओं से जुड़े ठेके गैर-हिंदू ठेकेदारों को न दिए जाएं**। शेल्के ने अपने प्रतिनिधित्व में कहा है कि गणेशोत्सव हिंदू समाज की आस्था, धार्मिक परंपरा और भावनाओं से जुड़ा प्रमुख पर्व है। उनके मुताबिक, विसर्जन के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु विभिन्न स्थानों पर पहुंचते हैं, इसलिए वहां की व्यवस्थाएं संवेदनशील होती हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की है कि ठेके देते समय केवल वित्तीय पहलुओं के बजाय ठेकेदारों की धार्मिक-सांस्कृतिक संवेदनशीलता, सुरक्षा क्षमता और पृष्ठभूमि को भी ध्यान में रखा जाए।
‘अस्थायी कर्मचारियों की जानकारी जरूरी
शेल्के ने प्रशासन के सामने यह तर्क भी रखा है कि गणेश विसर्जन के दौरान मंडप, बैरिकेडिंग और अन्य व्यवस्थाओं के लिए विभिन्न क्षेत्रों से अस्थायी कर्मचारियों को काम पर लगाया जाता है। उनका दावा है कि यदि ऐसे कर्मचारियों की पूरी जानकारी प्रशासन के पास उपलब्ध नहीं रहती है तो भविष्य में कानून-व्यवस्था से जुड़ी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। उन्होंने आयुक्त से विसर्जन स्थलों पर काम करने वाले कर्मचारियों और ठेकेदारों की पृष्ठभूमि की जांच कराने की मांग की है। साथ ही उन्होंने कहा कि भक्तों की सुरक्षा, धार्मिक भावनाओं और शहर में शांति बनाए रखने के लिए विसर्जन व्यवस्था से जुड़े ठेके केवल हिंदू ठेकेदारों को दिए जाने चाहिए। हालांकि, इस मांग के बाद यह सवाल भी उठ रहा है कि सार्वजनिक निकायों में ठेके देने की प्रक्रिया में धार्मिक पहचान को आधार बनाया जाना उचित है या नहीं। इस मुद्दे पर प्रशासन की ओर से फिलहाल कोई निर्णय या आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
गरबा आयोजन को लेकर भी उठ चुकी हैं ऐसी मांगें
गणेशोत्सव के बाद नवरात्रि का पर्व शुरू होगा और मुंबई समेत महाराष्ट्र के कई शहरों में गरबा एवं अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इस बीच कुछ हिंदुत्व संगठनों की ओर से गरबा आयोजनों में मुस्लिम समुदाय के लोगों के प्रवेश पर रोक लगाने की मांग भी सामने आई है। महाराष्ट्र के मंत्री नितेश राणे की ओर से भी ऐसी मांग किए जाने की खबरें सामने आई हैं। ऐसे माहौल में वसई-विरार महानगरपालिका के भाजपा पार्षद की गणेश विसर्जन व्यवस्था को लेकर की गई मांग ने धार्मिक पहचान और सार्वजनिक आयोजनों में भागीदारी को लेकर बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। शेल्के ने अपनी मांग को श्रद्धालुओं की सुरक्षा और धार्मिक भावनाओं से जोड़ा है, जबकि अब प्रशासन के फैसले पर नजर रहेगी कि वह ठेके देने की प्रक्रिया में किन मानदंडों को प्राथमिकता देता है।