नाबालिगों को वाहन देने वाले 26 अभिभावकों पर कार्रवाई, हर केस में 30 हजार का जुर्माना

    10-Sep-2026
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नागपुर | नाबालिगों के वाहन चलाने से होने वाले सड़क हादसों को रोकने के लिए नागपुर शहर ट्रैफिक पुलिस ने अब अभिभावकों और वाहन मालिकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। वर्ष 2026 में नाबालिगों को वाहन चलाने या बाइक-स्कूटर चलाने की अनुमति देने से जुड़े 26 मामलों में अदालत ने आरोपियों को दोषी ठहराते हुए प्रत्येक पर 30 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। यानी 26 मामलों में कुल 7.80 लाख रुपए का दंड लगाया गया। इन मामलों में मोटर व्हीकल एक्ट की धारा 199ए के तहत 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया गया। इसके अलावा धारा 199(4) के तहत संबंधित वाहन मालिक या अभिभावक के ड्राइविंग लाइसेंस को 12 महीने के लिए रद्द या अयोग्य घोषित करने की कार्रवाई भी की गई। ट्रैफिक पुलिस का कहना है कि कार्रवाई का उद्देश्य केवल नाबालिगों को वाहन चलाने से रोकना नहीं, बल्कि उनके अभिभावकों को भी उनकी जिम्मेदारी का अहसास कराना है।

चाबी बच्चे को देना भी पड़ सकता है भारी
ट्रैफिक विभाग ने 2026 में नाबालिगों के वाहन चलाने से जुड़े कई मामले दर्ज किए थे। जांच और कोर्ट की कार्रवाई के बाद 26 मामलों में आरोपियों को दोषी ठहराया गया। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक, जब कोई नाबालिग बाइक, स्कूटर या अन्य मोटर वाहन चलाते हुए पकड़ा जाता है तो केवल बच्चे की जिम्मेदारी तय नहीं की जाती। यह भी जांच की जाती है कि वाहन उसे किसने उपलब्ध कराया और क्या अभिभावक या वाहन मालिक को इस बात की जानकारी थी। पुलिस का कहना है कि कम उम्र के बच्चों को वाहन की चाबी सौंपना गंभीर लापरवाही हो सकती है। ऐसे मामलों में अभिभावकों को कानूनी कार्रवाई के साथ आर्थिक दंड और लाइसेंस संबंधी कार्रवाई का भी सामना करना पड़ सकता है। इसलिए माता-पिता को बच्चों की जिद या सुविधा के लिए उन्हें वाहन चलाने की अनुमति नहीं देनी चाहिए।

स्कूल-कॉलेज रूट पर विशेष नजर
नाबालिग ड्राइविंग पर रोक लगाने के लिए ट्रैफिक पुलिस शहर के प्रमुख चौराहों, व्यस्त सड़कों और स्कूल-कॉलेज आने-जाने वाले मार्गों पर नियमित जांच कर रही है। दोपहिया वाहनों पर विशेष निगरानी रखी जा रही है। पुलिस अधिकारियों ने अभिभावकों के साथ शैक्षणिक संस्थानों और नागरिकों से भी सहयोग की अपील की है। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि परिवार और समाज की भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका है। अभिभावक बच्चों को वाहन देने के बजाय उन्हें यातायात नियमों और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करें। ट्रैफिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि नाबालिगों को वाहन उपलब्ध कराने वाले अभिभावकों और वाहन मालिकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई आगे भी जारी रहेगी।