13 साल की IAS सेवा को कहा अलविदा, बोलीं- ‘यह सफर अविस्मरणीय रहा’

    31-Aug-2026
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लंदन की नौकरी छोड़ भारत लौटीं, IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई के बाद बनीं IAS

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। उत्तर प्रदेश कैडर की 2013 बैच की IAS अधिकारी दिव्या मित्तल ने 30 अगस्त 2026 को भारतीय प्रशासनिक सेवा से स्वैच्छिक इस्तीफे की घोषणा की। सोशल मीडिया पर साझा किए भावुक संदेश में उन्होंने अपनी 13 साल की प्रशासनिक यात्रा को ‘अविस्मरणीय’ बताया। उन्होंने लिखा कि एक साधारण परिवेश में पली-बढ़ीं और बेहतर व सफल जीवन का सपना देखा। IIT दिल्ली और IIM बेंगलुरु से पढ़ाई के बाद लंदन में नौकरी मिली और वहां उन्होंने दिन-रात मेहनत की। हालांकि, तमाम सुविधाएं मिलने के बावजूद उन्हें भीतर से कुछ अधूरा महसूस होता रहा। अपने देश से दूर रहने की बेचैनी ने उन्हें भारत लौटने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि उनकी शिक्षा, आत्मविश्वास और दुनिया में सिर ऊंचा करके चलने की क्षमता इस देश का कर्ज थी, जिसे वे चुकाना चाहती थीं। इसी सोच के साथ उन्होंने IAS सेवा में प्रवेश किया और देश के लिए कुछ करने का अवसर मिला।

देवरिया ने सिखाया- सही के लिए खड़ा होना कर्तव्य है दिव्या मित्तल ने अपनी पोस्ट में अलग-अलग जिलों में काम करने के अनुभवों को जीवन की बड़ी सीख बताया। उन्होंने कहा कि देवरिया ने उन्हें सिखाया कि सही बात के लिए खड़ा होना कोई विकल्प नहीं, बल्कि जिम्मेदारी है। मिर्जापुर ने यह समझाया कि ‘असंभव’ कोई तथ्य नहीं, बल्कि केवल एक राय है। मां विंध्यवासिनी के चरणों में उन्हें यह सीख मिली कि असली शक्ति किसी पद से नहीं, बल्कि ईश्वर की कृपा और लोगों के भरोसे से आती है। उन्होंने लिखा कि शुरुआत में उन्हें लगता था कि वे लोगों को कुछ देने आई हैं, लेकिन वास्तव में उन्हें लोगों से कहीं अधिक मिला। भूमि का अधिकार मिलने वाले परिवार की खुशी, दिव्यांग व्यक्ति को सम्मान के साथ जीवन जीने का अवसर और किसान के खेत तक पानी पहुंचने जैसी घटनाओं को उन्होंने अपने प्रशासनिक जीवन की सबसे बड़ी उपलब्धियां बताया। उन्होंने कहा कि हर सरकारी फाइल के पीछे एक इंसान होता है और उसकी गरिमा बनाए रखना ही न्याय है।

'पद खोया है, लेकिन वह आशीर्वाद जिंदगी भर साथ रहेगा’इस्तीफे की घोषणा करते हुए दिव्या मित्तल ने सहयोगी अधिकारियों और कर्मचारियों के प्रति भी आभार जताया। उन्होंने कहा कि मुश्किल समय में भी लोगों और सहकर्मियों ने उनका भरोसा बनाए रखा और आगे बढ़ने की हिम्मत दी। अपने संदेश में उन्होंने लहुरिया दह की पहाड़ियों की एक बुजुर्ग महिला का भावुक प्रसंग साझा किया। उन्होंने बताया कि गांव में पहली बार पानी पहुंचने पर महिला ने कुछ नहीं कहा, बल्कि कांपते हाथों से उनके सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया। दिव्या मित्तल ने लिखा कि “आज मैंने अपना पद खो दिया है, लेकिन वह स्पर्श जिंदगीभर मेरे साथ रहेगा।” उन्होंने कहा कि उनकी आंखें आज कृतज्ञता से नम हैं और प्रशासनिक सेवा से विदाई के बावजूद देश और लोगों के लिए देखे गए सपने उनके भीतर हमेशा जीवित रहेंगे।