
नागपुर: नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बीच फंसे नागपुर के करीब 100 पर्यटक आखिरकार सुरक्षित अपने घर लौट आए। महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की मदद से पर्यटकों के भारत वापसी का रास्ता आसान हुआ। नागपुर लौटने के बाद यात्रियों ने नेपाल में देखे भयावह मंजर और वहां से निकलने के दौरान आई मुश्किलों को साझा किया। पर्यटकों के मुताबिक, लगातार बारिश, उफनती नदियों और खराब सड़क परिस्थितियों के बीच हर पल जान का खतरा बना हुआ था। कई यात्रियों ने बताया कि हालात इतने बिगड़ गए थे कि उन्हें अपने सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद भी कम होती जा रही थी।
रास्ते में आंखों के सामने बह गई बसपर्यटक योगेश गावंडे ने बताया कि उनका समूह काठमांडू में ठहरा था, जो बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्र से करीब 50 किलोमीटर दूर था। मौसम लगातार बिगड़ने के बाद पर्यटक वहीं फंस गए। भारत लौटने के लिए वाहनों की व्यवस्था की गई, लेकिन भारी बारिश और खतरनाक सड़क परिस्थितियों के कारण सफर बेहद चुनौतीपूर्ण रहा। गावंडे के अनुसार, रास्ते में उन्होंने अपनी आंखों के सामने एक बस को तेज बहाव में बहते हुए देखा। बढ़ते जलस्तर और उफनते पानी के बीच आगे बढ़ना किसी जोखिम से कम नहीं था। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार और मुख्यमंत्री फडणवीस की ओर से की गई मदद के लिए आभार जताया। समूह में शामिल एक बुजुर्ग महिला तीर्थयात्री ने बताया कि हालात देखकर कई लोगों को डर था कि वे शायद नागपुर वापस नहीं पहुंच पाएंगे। उन्होंने तेज बहाव में लोगों के बहने के भयावह दृश्य भी देखे।
फडणवीस की मदद से जगी घर लौटने की उम्मीदबुजुर्ग महिला ने बताया कि जिस समय सभी पर्यटक चिंता और डर में थे, उसी दौरान मुख्यमंत्री फडणवीस की ओर से मदद पहुंचने लगी। इससे समूह में सुरक्षित घर लौटने की उम्मीद जगी। इसके बाद पर्यटकों को नेपाल से बाहर निकालकर भारत की ओर रवाना किया गया और वे आखिरकार नागपुर पहुंच सके। इधर, नेपाल में बाढ़ का खतरा पूरी तरह टला नहीं है। नेपाल की National Disaster Risk Reduction and Management Authority (NDRRMA) ने भोटे कोशी नदी में पानी का बहाव बढ़ने के बाद नया अलर्ट जारी किया है। रसुवा, नुवाकोट और धादिंग जिलों में नदी के निचले इलाकों में रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की सलाह दी गई है। रसुवा के जिला प्रशासन कार्यालय से मिली सूचना के अनुसार भोटे कोशी में पानी के बहाव और उसकी आवाज में वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय प्रशासन और आपदा प्रबंधन एजेंसियां स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं।