- 15 हजार से ज्यादा सुरक्षाकर्मी जुटे, 4,451 लोगों को सुरक्षित निकाला

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। नेपाल में 26 अगस्त को आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने बड़े पैमाने पर तबाही मचा दी है। बाढ़ और भूस्खलन से अब तक 616 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,924 लोग अभी भी लापता बताए जा रहे हैं। राहत और बचाव अभियान में 15,431 सुरक्षाकर्मी लगाए गए हैं। चितवन में सबसे ज्यादा 233 मौतें हुई हैं। इसके बाद नवलपरासी ईस्ट में 158, गोरखा में 48, नवलपरासी वेस्ट में 47, धादिंग में 45, नुवाकोट में 41, तनहूं में 31 और रसुवा में 13 लोगों की जान गई है। आपदा में 2,301 लोग घायल हुए या उन्हें बचाया गया है। रसुवा के भोटेकोशी क्षेत्र में बाढ़ ने सबसे ज्यादा नुकसान पहुंचाया है। तिब्बत-नेपाल सीमा से अचानक आए पानी, मलबे और बड़े-बड़े पत्थरों ने भोटेकोशी और त्रिशूली नदी तंत्र के आसपास भारी तबाही मचाई।
1,924 लोग लापता, हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के 933 कर्मचारी भी शामिल
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेंद्र शाह ने रक्षाबंधन के अवसर पर देश को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार प्रभावित हर व्यक्ति तक पहुंचने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है। राहत अभियान में नेपाल आर्मी के 6,755, नेपाल पुलिस के 4,473 और आर्म्ड पुलिस फोर्स के 4,203 जवान तैनात हैं। अब तक 4,451 लोगों को सुरक्षित निकाला जा चुका है, जिनमें 191 लोग हाइड्रोपावर सुरंगों से और 517 लोगों को हेलिकॉप्टर से निकाला गया। नेपाल आर्मी और निजी क्षेत्र के 16 हेलिकॉप्टर धुंचे, त्रिशूली, तिमुरे और स्याब्रुबेसी जैसे इलाकों में लगातार उड़ानें भर रहे हैं। लापता लोगों में 933 हाइड्रोपावर परियोजनाओं से जुड़े कर्मचारी और 517 विदेशी नागरिक शामिल हैं। इसके अलावा 127 नेपाली नागरिक, जो विदेश में रहते हैं और नेपाल आए थे, भी लापता हैं। सुरक्षा बलों के 86 से ज्यादा जवान और सरकारी विभागों के कर्मचारी भी लापता सूची में हैं। ऊपरी त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट, रसुवागढ़ी हाइड्रोपावर स्टेशन और अन्य सुरंगों में फंसे लोगों की तलाश के लिए विशेष टीमें जुटी हैं।
129 विदेशी नागरिक सुरक्षित, भारतीयों को निकालने के लिए प्रयास जारी
अधिकारियों ने अब तक 129 विदेशी पर्यटकों और नागरिकों को सुरक्षित निकालकर उनकी पहचान की है। विदेशी नागरिकों की जानकारी और उनके परिवारों के साथ समन्वय के लिए नेपाल का विदेश मंत्रालय इमरजेंसी कंट्रोल रूम चला रहा है। भारत भी बाढ़ प्रभावित भारतीय नागरिकों को सुरक्षित निकालने के लिए नेपाल और चीन के साथ समन्वय कर रहा है। भारतीय विदेश मंत्रालय के अनुसार चीन में मौजूद करीब 400 भारतीय नागरिकों से संपर्क हो चुका है और वे सुरक्षित हैं। हालांकि 320 भारतीय अब भी संपर्क से बाहर हैं, जबकि भारतीय मूल के करीब 100 अन्य विदेशी नागरिकों से भी संपर्क नहीं हो पाया है। नेपाल से काठमांडू पहुंचे 21 भारतीय दिल्ली आ चुके हैं, जबकि त्रिशूली वन हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में काम करने वाले 63 भारतीयों को पहले ही बचाया जा चुका है। चीन की ओर फंसे 96 भारतीय भी सुरक्षित नेपाल पहुंच गए हैं।
भारत ने भेजी 47.5 टन राहत सामग्री, सुरंग बचाव व मेडिकल टीम भी पहुंची
बाढ़ के बाद नेपाल में सड़क, पुल और संचार व्यवस्था को बहाल करने का काम भी तेज किया गया है। रसुवा को काठमांडू से जोड़ने वाले वैकल्पिक मार्ग हल्के वाहनों के लिए खोल दिए गए हैं, जबकि काठमांडू-मुगलिंग हाईवे पर एकतरफा यातायात चल रहा है। नेपाल ने भारत और चीन से 70 मीटर लंबे 10 बेली ब्रिज की मांग की है। क्षतिग्रस्त 198 मोबाइल टावर साइट्स में से 145 को बहाल किया जा चुका है। भारत ने भी राहत और बचाव अभियान में सहायता बढ़ाई है। 26 अगस्त को भेजे गए पहले विमान में 10 टन राहत सामग्री, टेंट, कंबल, हाइजीन किट, सोलर लैंप और दवाएं थीं। 27 अगस्त को दूसरे विमान से 37.5 टन अतिरिक्त सामग्री भेजी गई। इसमें टेंट, कंबल, पंप, जनरेटर, दवाएं, भोजन और किचन सेट शामिल हैं। भारतीय वायुसेना के तीसरे सहायता विमान से 11 सदस्यीय विशेष मेडिकल और टनल रेस्क्यू टीम भी नेपाल पहुंची है। भारत ने एनडीआरएफ की टीमें और उपकरण भेजने के साथ ही कनेक्टिविटी बहाल करने के लिए तकनीकी सहायता और बेली ब्रिज उपलब्ध कराने की पेशकश की है।