अमरावती अस्पताल अग्निकांड पर सियासत तेज, यशोमती ठाकुर ने चित्रा वाघ के दौरे को बताया ‘पर्यटन’

    29-Aug-2026
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तीन नवजातों की मौत के बाद अस्पताल पहुंचे नेता
व्यवस्थाओं पर आमने-सामने भाजपा-कांग्रेस

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अमरावती। जिला महिला अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड में तीन नवजात बच्चों की मौत के बाद अब मामले ने राजनीतिक रंग ले लिया है। हादसे के बाद मंत्री, विधायक, सांसद और विभिन्न राजनीतिक दलों के नेता अस्पताल पहुंचकर व्यवस्थाओं और घटना की जानकारी ले रहे हैं। भाजपा विधायक चित्रा वाघ ने भी अस्पताल का दौरा कर निरीक्षण किया और यहां की अव्यवस्थाओं पर अस्पताल प्रशासन को जमकर फटकार लगाई। उन्होंने कहा कि प्रशासन की लापरवाही से सरकार की बदनामी हो रही है। चित्रा वाघ के दौरे के बाद कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री यशोमती ठाकुर ने अस्पताल पहुंचने वाले नेताओं पर निशाना साधते हुए उनके दौरों को ‘पर्यटन’ करार दिया। ठाकुर ने आरोप लगाया कि सरकार को अमरावती की समस्याओं की चिंता नहीं है और नेताओं का अस्पताल आकर बयानबाजी करना महज दिखावा है।

‘फालतू ड्रामा बंद करें’, यशोमती ठाकुर का सरकार पर हमला
यशोमती ठाकुर ने कहा कि अमरावती में जिला महिला अस्पताल जैसी जरूरी स्वास्थ्य सुविधा को पर्याप्त फंड नहीं दिया जा रहा, जबकि अन्य धार्मिक स्थलों के लिए बड़ी राशि मंजूर की जा रही है। उन्होंने पालकमंत्री चंद्रशेखर बावनकुले पर भी निशाना साधते हुए कहा कि वे अभी अस्पताल तक नहीं पहुंचे हैं, जबकि उनका पानीपुरी खाते हुए वीडियो सामने आता है। ठाकुर ने कहा कि हनुमान गढ़ी के लिए 121 करोड़ रुपए दिए गए, लेकिन जिला महिला अस्पताल के लिए 9 करोड़ रुपए उपलब्ध नहीं कराए गए। उन्होंने नेताओं पर आरोप लगाते हुए कहा कि हर दिन कोई न कोई ‘हीरो या हीरोइन’ अस्पताल आएगा और यह दिखाने की कोशिश करेगा कि सरकार काम कर रही है, जबकि वास्तविकता में अमरावती की अनदेखी हो रही है। ठाकुर ने अस्पताल में आकर ‘फालतू ड्रामा’ और चिल्लाने के बजाय व्यवस्थाओं को सुधारने की मांग की।

फायर ऑडिट के दावों पर सवाल, ‘कौन झूठ बोल रहा है?’
चित्रा वाघ ने अपने दौरे के दौरान अस्पताल में आग की घटना को लेकर जिला कलेक्टर और मेडिकल ऑफिसर से भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि भंडारा की घटना के बाद सभी अस्पतालों का फायर ऑडिट कराने के निर्देश दिए गए थे। महिला अस्पताल के मामले में पहला पत्र 25 जून को दिया गया था। PWD अधिकारियों का दावा है कि उन्होंने 30 जून और 22 अगस्त को अस्पताल का दौरा किया था, जबकि मेडिकल ऑफिसर का कहना है कि कोई निरीक्षण करने नहीं आया। PWD की ओर से स्टाफ द्वारा सहयोग नहीं मिलने की बात कही गई। इन विरोधाभासी दावों पर जिला मजिस्ट्रेट ने भी माना कि किसी एक पक्ष की ओर से गलत जानकारी दी जा रही है। चित्रा वाघ ने कहा कि सरकार ने मामले की जांच के लिए कमेटी गठित की है, लेकिन पुलिस जांच भी जरूरी है। उन्होंने कहा कि तीन नवजात बच्चों की जान गई है, इसलिए जो भी दोषी पाया जाए, उसे निलंबित किया जाना चाहिए और किसी को माफ नहीं किया जाना चाहिए।

36 बच्चों को बचाने का दावा, फायर अलार्म और एंबुलेंस व्यवस्था पर भी सवाल

चित्रा वाघ ने कहा कि अस्पताल कर्मचारियों ने आग लगने के दौरान 36 बच्चों की जान बचाई। उन्होंने फायर सेफ्टी, वायरिंग और अस्पताल में उपलब्ध उपकरणों को लेकर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि यह 400 बेड का अस्पताल है और यहां नियमित फायर ऑडिट होना चाहिए। वाघ ने यह भी कहा कि अस्पताल का फायर अलार्म बार-बार बजने के कारण बंद कर दिया गया था। मेडिकल सुपरिटेंडेंट ने भी माना कि आग वास्तव में लगी थी और अलार्म बंद किया गया था। एंबुलेंस में डीजल नहीं होने की शिकायत को उन्होंने दुर्भाग्यपूर्ण बताया। वाघ के मुताबिक, यदि अस्पताल को पर्याप्त फंड मिल रहा है और इसके बावजूद मरीजों को बेहतर सेवा नहीं मिल रही है, तो प्रशासन को अपनी कमी स्वीकार करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकारी स्वास्थ्य सेवा उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। वहीं, उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ लोग लगातार सरकार की छवि खराब करने का काम कर रहे हैं। इस पूरे मामले में जांच के बाद ही लापरवाही के लिए जिम्मेदार लोगों की स्थिति स्पष्ट होगी।