नेपाल की बाढ़ में भारत की मदद तेज, 37.5 टन राहत सामग्री लेकर दूसरी उड़ान रवाना

    28-Aug-2026
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दवाइयां, खाद्य सामग्री और HADR सामान भेजा

IndiaImage Source:(Internet) 
 
नई दिल्ली। नेपाल (Nepal) में भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन से मची तबाही के बीच भारत ने राहत एवं बचाव अभियान के लिए सहायता बढ़ा दी है। गुरुवार को भारत से 37.5 टन मानवीय सहायता, जरूरी दवाइयां और खाद्य सामग्री लेकर दूसरा विमान नेपाल के लिए रवाना हुआ। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर इसकी जानकारी देते हुए कहा कि दूसरी उड़ान में 37.5 टन HADR (ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ) सामग्री, दवाइयां और खाद्य पैकेट भेजे गए हैं। उन्होंने कहा कि भारत नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और राहत कार्यों में हरसंभव सहयोग जारी रखेगा। यह सहायता ऐसे समय भेजी गई है जब नेपाल में बाढ़ के कारण सैकड़ों लोग लापता हैं और कई इलाकों में सड़क, पुल, घर और अन्य बुनियादी ढांचे को भारी नुकसान पहुंचा है।
 
 
पहले भेजी थी 10 टन राहत सामग्री
भारत की यह दूसरी राहत खेप बुधवार को भेजी गई 10 टन सामग्री के बाद रवाना हुई है। पहली खेप में राहत सामग्री, दवाइयां और जनरेटर समेत जरूरी सामान शामिल था। काठमांडू में भारतीय राजदूत नवीन श्रीवास्तव ने यह राहत सामग्री नेपाल के संस्कृति, पर्यटन एवं नागरिक उड्डयन मंत्री खड़क राज पौडेल को सौंपी थी। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत संकट की इस घड़ी में नेपाल के साथ मजबूती से खड़ा है और जरूरत के अनुसार हरसंभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। लगातार हो रही तेज बारिश के कारण आई बाढ़ और भूस्खलन ने नेपाल के कई हिस्सों में जनजीवन प्रभावित किया है। हजारों परिवारों के विस्थापित होने की खबर है। ऐसे में भारत की सहायता का उद्देश्य प्रभावित लोगों तक भोजन, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री पहुंचाने में नेपाल की मदद करना है। यह सहयोग भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति के तहत पड़ोसी देशों के साथ संकट के समय सहयोग की प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।
 
C-17 विमान में 30-40 टन तक राहत सामग्री
भारतीय वायुसेना ने राहत सामग्री को तेजी से नेपाल पहुंचाने के लिए अपनी परिवहन क्षमता का इस्तेमाल किया। C-17 ग्लोबमास्टर विमान के कमांडर एल. नायक ने बताया कि विमान में करीब 30 से 40 टन राहत सामग्री, चिकित्सा सामान और NDRF का पेलोड ले जाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि भारत से काठमांडू तक उड़ान का समय करीब एक घंटा 15 मिनट है। विमान में पर्याप्त ईंधन रखा गया है, जिससे जरूरत पड़ने पर वह करीब डेढ़ घंटे तक हवा में इंतजार कर सकता है। यदि मौसम या अन्य कारणों से काठमांडू में उतरना संभव नहीं हुआ तो भारत में दो एयरबेस को वैकल्पिक व्यवस्था के तौर पर चिन्हित किया गया है। इन एयरबेस को संभावित डायवर्जन और ईंधन भरने के लिए पहले ही सूचित कर दिया गया है। इस तरह आपदा के बीच मौसम और परिचालन संबंधी चुनौतियों को ध्यान में रखते हुए राहत मिशन की तैयारी की गई है।
 
C-130J ने पहुंचाई थी पहली खेप
हिंडन एयरफोर्स स्टेशन के एयर ऑफिसर कमांडिंग एयर कमोडोर आर. ढोभाल ने बताया कि आपदा की सूचना मिलते ही भारतीय वायुसेना ने C-130J हरक्यूलिस विमान तैयार किया था। नागरिक प्रशासन और NDRF की मदद से विमान में राहत सामग्री, दवाइयां और जनरेटर लोड किए गए और इसे तेजी से नेपाल रवाना किया गया। विमान करीब रात 8.30 बजे रवाना हुआ और दो घंटे के भीतर नेपाल पहुंचकर लगभग 10 टन राहत सामग्री पहुंचाई। उन्होंने कहा कि भारतीय वायुसेना देश के भीतर ही नहीं, बल्कि नेपाल, म्यांमार और श्रीलंका जैसे पड़ोसी देशों में भी राहत अभियान चलाती रही है। हाल में वेनेजुएला में भी राहत अभियान चलाया गया था। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वायुसेना आगे भी अतिरिक्त सहायता उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। मौजूदा अभियान में एक विमान रवाना हो चुका है और C-17 विमान की अगली उड़ान भी निर्धारित की गई थी।
 
राहत अभियान जारी, भारत की मदद से बढ़ी क्षमता
नेपाल में राहत और बचाव अभियान जमीन के साथ-साथ हवाई स्तर पर भी जारी है। बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थानीय एजेंसियां लोगों को सुरक्षित निकालने के साथ भोजन, पानी, चिकित्सा सहायता और अस्थायी आश्रय उपलब्ध कराने में जुटी हैं। कई स्थानों पर सड़क और पुल क्षतिग्रस्त होने के कारण राहत सामग्री पहुंचाना चुनौतीपूर्ण बना हुआ है। ऐसे में भारत द्वारा विमानों के जरिए भेजी जा रही राहत सामग्री नेपाल के आपदा प्रबंधन प्रयासों को तत्काल समर्थन दे रही है। विदेश मंत्री जयशंकर ने स्पष्ट किया है कि भारत नेपाल के अधिकारियों के साथ लगातार संपर्क में है और राहत प्रयासों में मजबूती से सहयोग करता रहेगा। दूसरी राहत उड़ान के जरिए भेजी गई 37.5 टन सामग्री भारत की त्वरित प्रतिक्रिया क्षमता को दर्शाती है। संकट की इस घड़ी में भारत की सहायता से नेपाल में प्रभावित लोगों तक जरूरी सामान और चिकित्सा संसाधन पहुंचाने के प्रयासों को गति मिलने की उम्मीद है।