‘मेरा घर धंस गया...’, नेपाल की बाढ़ में तबाही के बीच जिंदा रहने की जद्दोजहद

    27-Aug-2026
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नुवाकोट का देवीघाट बना सबसे ज्यादा प्रभावित इलाका

Image Source:(ANI)

एबी न्यूज़ नेटवर्क। नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने नुवाकोट जिले के देवीघाट इलाके में भारी तबाही मचाई है। उफनते पानी ने सड़कें बहा दीं, पुलों को तोड़ दिया और कई इमारतों को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया। कई परिवारों के घर तबाह हो गए और लोगों के सामने भोजन व रहने की समस्या खड़ी हो गई है। जमीन पर मौजूद स्थानीय लोगों ने आपदा के बाद के भयावह हालात बयां किए। स्थानीय निवासी जनक बहादुर नेपाली ने कहा, “मेरा घर धंस गया। गांव में 2-3 लोगों को छोड़कर बाकी सभी सुरक्षित हैं। हमें भोजन और रहने को लेकर परेशानी हो रही है। अभी तक सरकार की ओर से हमें कुछ नहीं मिला है।” देवीघाट को सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में बताया जा रहा है। स्थानीय लोगों के अनुसार इलाके में कुछ लोग अब भी लापता हैं और मलबे के नीचे लोगों के दबे होने की आशंका है।

‘सड़कें नहीं बचीं, पुल बह गया, मलबे में दबे हो सकते हैं लोग’
बाढ़ के बाद देवीघाट में राहत और बचाव कार्य के सामने सबसे बड़ी चुनौती संपर्क मार्गों का खत्म हो जाना है। एक स्थानीय निवासी ने बताया कि इलाके में अब सड़कें नहीं बची हैं। भारी मात्रा में कीचड़ और मलबा जमा है तथा वहां मौजूद पुल बाढ़ के तेज बहाव में बह गया। गुरुवार सुबह मलबे से दो शव बरामद किए गए। स्थानीय लोगों को आशंका है कि मलबे के नीचे अभी कई और लोग दबे हो सकते हैं। घटनास्थल पर क्षतिग्रस्त वाहन, टूटे मकान और बाढ़ के साथ बहकर आया मलबा तबाही की भयावह तस्वीर पेश कर रहे हैं। संचार और आवागमन व्यवस्था प्रभावित होने से बचाव दलों के लिए प्रभावित इलाकों तक पहुंचना भी चुनौती बना हुआ है। स्थानीय लोग खुद मलबा हटाने और फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। लगातार बनी हुई आशंका के बीच लोगों को डर है कि मलबे से और शव मिल सकते हैं।

644 यात्री लापता, 178 भारतीय नागरिक शामिल

नेपाल पर्यटन बोर्ड ने गुरुवार को बताया कि ट्रेकिंग और ट्रैवल कंपनियों से मिले शुरुआती आंकड़ों के आधार पर प्रभावित क्षेत्र से 644 यात्रियों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 178 भारतीय नागरिक, यूक्रेन के 53, ऑस्ट्रेलिया के 35, कनाडा के 25 और नेपाल के 127 नागरिक शामिल हैं। हालांकि इन आंकड़ों का सत्यापन अभी जारी है। स्थानीय गाइड और सुरक्षा एजेंसियों के समन्वय से लापता यात्रियों की वास्तविक स्थिति पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है। नेपाल में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक आने के कारण राहत और बचाव अभियान में अलग-अलग देशों के नागरिकों की पहचान और सुरक्षा की पुष्टि भी महत्वपूर्ण हो गई है। भारत सरकार भी नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों की जानकारी जुटाने और उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए लगातार नेपाली अधिकारियों तथा अन्य संबंधित एजेंसियों के संपर्क में है।

जयशंकर ने की उच्चस्तरीय समीक्षा, भारतीयों की सुरक्षा प्राथमिकता
नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने गुरुवार को नेपाल में बाढ़ की स्थिति को लेकर उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में विदेश सचिव विक्रम मिस्री, विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा काठमांडू और बीजिंग में तैनात भारतीय राजनयिक शामिल हुए। जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि बाढ़ प्रभावित इलाकों में मौजूद सभी भारतीय नागरिकों की स्थिति और उनके ठिकाने की जानकारी जुटाने के लिए तत्काल प्रयास किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि विदेश मंत्रालय विभिन्न मंत्रालयों, राज्य सरकारों, टूर ऑपरेटरों और परियोजना अधिकारियों के साथ समन्वय कर रहा है। भारत नेपाली पक्ष के साथ भी सुरक्षा और राहत प्रयासों पर करीबी सहयोग कर रहा है। सरकार की प्राथमिकता प्रभावित क्षेत्रों में फंसे भारतीयों की सुरक्षित स्थिति की पुष्टि करना और जरूरत पड़ने पर उन्हें सहायता उपलब्ध कराना है।

नेपाल के लिए भारत ने भेजी 37.5 टन राहत सामग्री
नेपाल में राहत अभियान को मजबूत करने के लिए भारत ने मानवीय सहायता भी तेज कर दी है। नई दिल्ली ने गुरुवार को 37.5 टन जरूरी मानवीय सहायता, दवाइयां और आपातकालीन खाद्य सामग्री की दूसरी खेप विमान के जरिए काठमांडू पहुंचाई। इसका उद्देश्य नेपाल में चल रहे राहत और बचाव अभियानों को आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराना है। दूसरी ओर, देवीघाट जैसे प्रभावित इलाकों में स्थानीय लोगों को भोजन, आवास और सुरक्षित संपर्क मार्गों की तत्काल जरूरत है। बाढ़ के बाद सड़क और पुलों के बह जाने से राहत सामग्री पहुंचाना कठिन हो गया है। मलबे के नीचे दबे लोगों की तलाश, लापता यात्रियों की पहचान और प्रभावित परिवारों तक मदद पहुंचाना फिलहाल सबसे बड़ी चुनौती है। नेपाल की इस आपदा ने एक बार फिर दिखाया है कि प्राकृतिक आपदा के बाद राहत कार्यों में स्थानीय प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और पड़ोसी देशों के बीच तेज समन्वय कितना महत्वपूर्ण होता है।