- कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गए संदीप से टूटा संपर्क

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। नेपाल में भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन के बाद भारत के कई राज्यों में अपने परिजनों की सलामती को लेकर चिंता बढ़ गई है। ओडिशा के खुर्दा जिले में ऑस्ट्रेलिया में रहने वाले पेशेवर संदीप महापात्र के परिवार का कहना है कि उनसे संपर्क टूट गया है। संदीप 22 अगस्त को कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए नेपाल पहुंचे थे। 25 अगस्त की शाम उन्होंने परिवार से बस से यात्रा के दौरान बात की थी। उन्होंने मोबाइल नेटवर्क में उतार-चढ़ाव की जानकारी दी थी। इसके बाद 26 अगस्त को बाढ़ की खबर सामने आने पर परिवार ने उनसे संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन फोन बंद या नेटवर्क से बाहर मिला। संदीप के छोटे भाई स्वरूप महापात्र ने बताया कि परिवार ने ओडिशा मुख्यमंत्री शिकायत प्रकोष्ठ में शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने केंद्र और ओडिशा सरकार से संदीप को जल्द तलाश कर सुरक्षित घर लाने की अपील की है।
रासुवा में हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट के कर्मचारी राम प्रसाद लापता
झारखंड की राजधानी रांची में भी एक परिवार अपने रिश्तेदार की जानकारी के लिए परेशान है। राम प्रसाद रासुवा स्थित अपर त्रिशूली हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट में एक अंतरराष्ट्रीय इंजीनियरिंग कंपनी के प्रशासनिक पद पर कार्यरत थे। यही इलाका आपदा के केंद्र में बताया जा रहा है। उनकी भाभी दित्या घोष के अनुसार बुधवार सुबह मैसेज के जरिए संक्षिप्त बातचीत के बाद राम प्रसाद से संपर्क पूरी तरह टूट गया। परिवार को जानकारी मिली है कि प्रोजेक्ट की सुरंग में करीब 135 लोगों के फंसे होने की आशंका है। घोष ने बताया कि वहां बचाव अभियान बेहद मुश्किल है। हेलीकॉप्टरों के उतरने में परेशानी हो रही है और आसपास का पूरा इलाका कीचड़ व दलदल में बदल गया है। परिवार ने भारत सरकार से नेपाली अधिकारियों के साथ समन्वय कर भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए हरसंभव सहायता देने की अपील की है।
बंगाल के स्नेहाशीष दत्ता की भी नहीं मिल रही खबर
पश्चिम बंगाल के हुगली जिले में भी स्नेहाशीष दत्ता के परिवार की चिंता बढ़ती जा रही है। तारकेश्वर के चाउलपट्टी क्षेत्र निवासी दत्ता 21 अगस्त को स्थानीय ट्रैवल एजेंसी के माध्यम से कैलाश पर्वत और मानसरोवर की तीर्थयात्रा पर निकले थे। परिवार के अनुसार पिछले बुधवार तक उनसे संपर्क बना हुआ था, लेकिन नेपाल में फ्लैश फ्लड आने के बाद बातचीत बंद हो गई। परिजन लगातार उनकी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं और प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान जारी रहने के बावजूद प्रभावित क्षेत्रों में सड़क, पुल और संचार व्यवस्था को भारी नुकसान पहुंचा है। ऐसे में लापता लोगों की सही लोकेशन पता करना और उन तक राहत दलों को पहुंचाना बड़ी चुनौती बनी हुई है। अलग-अलग राज्यों में परिवार सरकारी एजेंसियों से अपने परिजनों की स्थिति की पुष्टि और जल्द सुरक्षित निकासी की उम्मीद लगाए बैठे हैं।
178 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी
नेपाल पर्यटन बोर्ड के अनुसार भीषण बाढ़ के बाद रासुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों में 178 भारतीय नागरिकों के लापता होने की जानकारी सामने आई है। बाढ़ का मुख्य प्रभाव भोते कोशी और त्रिशूली नदियों के आसपास देखा गया है। तेज बहाव के कारण घरों, सड़कों, पुलों और जलविद्युत परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ है। आपदा के बाद कई इलाकों में लोगों का विस्थापन हुआ है। भारत सरकार ने नेपाल के लिए मानवीय सहायता भी बढ़ा दी है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 37.5 टन मानवीय सहायता एवं आपदा राहत सामग्री, दवाइयों और खाद्य पैकेटों से लदी दूसरी खेप नेपाल के लिए रवाना की गई है। इससे पहले नेपाल में भारतीय दूतावास ने 10 टन राहत सामग्री नेपाली अधिकारियों को सौंपी थी।
भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, परिवारों को राहत की उम्मीद
नेपाल की त्रासदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है। जयशंकर ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित एजेंसियों तथा नेपाल सरकार के साथ समन्वय पर जोर दिया है। वहीं पुडुचेरी विधानसभा में आपदा में जान गंवाने वालों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा गया। इस बीच भारत के अलग-अलग हिस्सों में परिवारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। किसी का बेटा, किसी का भाई तो कोई अपना जीवनसाथी नेपाल की आपदा के बीच लापता है। परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद अब राहत और बचाव दलों से है कि जल्द उनके अपनों की लोकेशन का पता चले और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर घर लौटाया जा सके।