- भूकंप नहीं, ग्लेशियल कोलैप्स था तबाही का कारण

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। नेपाल में बुधवार को आई भीषण फ्लैश फ्लड की शुरुआत तिब्बत के ऊंचाई वाले पहाड़ी क्षेत्र से हुई। शुरुआती रिपोर्टों में इसे नेपाल-चीन सीमा के पास आए 4.4 तीव्रता के भूकंप से जोड़कर देखा गया, लेकिन अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) ने बाद में स्पष्ट किया कि वहां कोई भूकंप आया ही नहीं था। तिब्बत में पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का विशाल हिस्सा अचानक ढह गया, जिससे पैदा हुई भूकंपीय तरंगों को शुरुआत में भूकंप के रूप में दर्ज किया गया। सैटेलाइट तस्वीरों के शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, यह आइस-रॉक लैंडस्लाइड करीब 20 किमी उत्तर-पूर्व में स्थित रासुवागढ़ी नेपाल-चीन सीमा क्रॉसिंग के पास हुआ। इसके बाद मलबे से भरी बाढ़ ल्हेंदे नदी में पहुंची, जो आगे चलकर भोते कोशी नदी की सहायक नदी बनती है।
मलबे ने नदी रोकी, फिर टूटा प्राकृतिक बांध
ग्लेशियर और चट्टानों का भारी मलबा नदी में गिरने से पानी का प्राकृतिक बहाव रुक गया और वहां कुछ समय के लिए अस्थायी बांध जैसा अवरोध बन गया। इसके पीछे पानी लगातार जमा होता रहा। जब यह अवरोध टूट गया तो जमा पानी अचानक भारी दबाव के साथ नीचे की ओर बह निकला। पानी के साथ बर्फ, मिट्टी, चट्टानें और विशाल मात्रा में मलबा भी बहता गया। यह शक्तिशाली जलधारा ल्हेंदे नदी से होते हुए भोते कोशी नदी में पहुंची और तेजी से नेपाल की ओर बढ़ी। इस घटना को ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड (GLOF) जैसी हिमानी आपदा से जोड़कर भी देखा गया, हालांकि USGS ने इस विशेष घटना का तत्काल कारण ग्लेशियल कोलैप्स और डेब्रिस फ्लो बताया है। GLOF में आमतौर पर ग्लेशियल झील को रोकने वाला प्राकृतिक बांध टूटने से अचानक बड़ी मात्रा में पानी नीचे की ओर बहता है।
कुछ ही देर में ढह गया बुनियादी ढांचा
नेपाल पहुंचते-पहुंचते बाढ़ ने विकराल रूप ले लिया। भोते कोशी-त्रिशूली नदी कॉरिडोर में तेज बहाव ने पुलों को बहा दिया, सड़कें क्षतिग्रस्त कर दीं और जलविद्युत परियोजनाओं को भी नुकसान पहुंचाया। रसुवा, धादिंग और नुवाकोट समेत कई क्षेत्रों में बाढ़ का असर देखा गया। प्रभावित इलाकों से सामने आए वीडियो में पानी के साथ भारी मात्रा में पत्थर, कीचड़ और मलबा बहता दिखाई दिया। कई वाहन पानी में बह गए और घरों व अन्य इमारतों को भारी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट के अनुसार इस आपदा में 160 से अधिक लोगों की मौत हुई, जबकि सैकड़ों लोग लापता बताए गए। राहत और बचाव दल लगातार प्रभावित क्षेत्रों में लोगों की तलाश और बचाव अभियान में जुटे रहे। शुरुआती भ्रम के कारण आपदा की प्रकृति समझने में समय लगा, लेकिन बाद में सैटेलाइट तस्वीरों, भूकंपीय आंकड़ों और निगरानी केंद्रों की जानकारी से घटना की वास्तविक वजह सामने आई।
बढ़ते हिमानी खतरे की चेतावनी
नेपाल की यह आपदा बताती है कि ऊंचे पर्वतीय क्षेत्रों में होने वाली छोटी अवधि की प्राकृतिक घटनाएं किस तरह कुछ ही समय में सीमाओं के पार बड़े मानवीय संकट में बदल सकती हैं। बर्फ और चट्टानों का विशाल हिस्सा नदी को रोक सकता है और अस्थायी बांध टूटते ही पानी कई गुना ताकत के साथ नीचे की ओर पहुंच सकता है। दुनिया के कई पर्वतीय क्षेत्रों में ग्लेशियरों और उनसे जुड़ी झीलों की अस्थिरता चिंता का विषय बनी हुई है। 2023 के एक अध्ययन के अनुसार, दुनिया में करीब 1.5 करोड़ लोग ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड के खतरे वाले क्षेत्रों में रहते हैं, जिनमें चीन, भारत, नेपाल, पाकिस्तान और पेरू जैसे देश शामिल हैं। नेपाल की घटना ने एक बार फिर दिखाया है कि ग्लेशियरों के टूटने, भूस्खलन और अचानक आने वाली मलबा-बाढ़ की निगरानी और समय रहते चेतावनी प्रणाली कितनी जरूरी है।