नेपाल की विनाशकारी बाढ़ में 644 लोग लापता, इनमें 178 भारतीय नागरिक

    27-Aug-2026
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चार जिलों में तबाही, ट्रैवल कंपनियों से मिले आंकड़ों का सत्यापन जारी

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एबी न्यूज़ नेटवर्क। नेपाल (Nepal) में भोते कोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण फ्लैश फ्लड के बाद लापता लोगों का आंकड़ा बढ़कर 644 हो गया है। नेपाल पर्यटन बोर्ड ने गुरुवार को बताया कि इनमें 178 भारतीय नागरिक शामिल हैं। बाढ़ का सबसे ज्यादा असर रासुवा, नुवाकोट, धादिंग और गोरखा जिलों में हुआ है। पर्यटन बोर्ड के अनुसार ट्रेकिंग और ट्रैवल कंपनियों से प्राप्त प्रारंभिक एजेंसी-वार रिकॉर्ड में 127 नेपाली नागरिकों समेत 644 यात्रियों के लापता होने की जानकारी मिली है। हालांकि इन आंकड़ों का ट्रैवल एजेंसियों, गाइड, स्थानीय प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियों के साथ समन्वय कर सत्यापन किया जा रहा है। बोर्ड ने बताया कि भोते कोशी और त्रिशूली नदियों से लगे चारों जिलों के नदी किनारे के क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ है, जबकि अन्य क्षेत्र फिलहाल प्रभावित नहीं हैं। बाढ़ से कई सड़कें और दर्जनों पुल क्षतिग्रस्त हुए हैं, जिससे राहत और बचाव कार्य में भी मुश्किलें सामने आ रही हैं।
 

यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा के नागरिक भी लापता
नेपाल स्थित दूतावास सूत्रों के अनुसार अब तक 175 शव बरामद किए जा चुके हैं, जबकि स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों समेत बड़ी संख्या में लोग अभी भी लापता हैं। उपलब्ध ताजा जानकारी के मुताबिक 28 देशों के कुल 476 लोगों के लापता होने की रिपोर्ट मिली है। हालांकि अलग-अलग एजेंसियों से प्राप्त आंकड़ों में अंतर है और अंतिम संख्या का सत्यापन अभी जारी है। भारतीय नागरिकों के अलावा यूक्रेन के 53, ऑस्ट्रेलिया के 35 और कनाडा के 25 नागरिकों के भी लापता होने की जानकारी सामने आई है। नेपाल की सुरक्षा एजेंसियां हेलीकॉप्टर और जमीनी टीमों की मदद से प्रभावित इलाकों में तलाश एवं बचाव अभियान चला रही हैं। प्रभावित लोगों के लिए चिकित्सा सहायता, अस्थायी आश्रय, भोजन, पानी और दवाइयों की व्यवस्था की जा रही है। मलबे और क्षतिग्रस्त संपर्क मार्गों के कारण कई क्षेत्रों तक पहुंचना अभी भी बड़ी चुनौती बना हुआ है।

भारत में सीमा क्षेत्रों पर भी निगरानी
नेपाल में बाढ़ की स्थिति के बीच भारत ने अपनी सीमा से लगे क्षेत्रों में भी सतर्कता बढ़ा दी है। राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के महानिरीक्षक नरेंद्र सिंह बुंदेला ने ANI को बताया कि नेपाल में आई फ्लैश फ्लड का भारतीय सीमा क्षेत्रों में अब तक कोई प्रतिकूल बाढ़ प्रभाव सामने नहीं आया है। हालांकि संवेदनशील जिलों, विशेषकर कुशीनगर और पश्चिमी चंपारण में जलस्तर और पानी के डिस्चार्ज पर लगातार नजर रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकारें और केंद्रीय जल आयोग (CWC) लगातार निगरानी कर रहे हैं तथा जमीनी स्तर पर आवश्यक जागरूकता और तैयारी पूरी की जा चुकी है। अधिकारियों के अनुसार स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि नेपाल से आने वाले पानी के प्रवाह में किसी भी तरह की वृद्धि होने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।

भारत ने भेजी 37.5 टन राहत सामग्री
नेपाल में राहत एवं बचाव अभियान को मजबूती देने के लिए भारत ने मानवीय सहायता भी बढ़ाई है। विदेश मंत्रालय के अनुसार 37.5 टन ह्यूमैनिटेरियन असिस्टेंस एंड डिजास्टर रिलीफ (HADR) सामग्री, दवाइयों और खाद्य पैकेटों से लदी दूसरी खेप नेपाल के लिए रवाना की गई है। इससे पहले भारत के नेपाल स्थित दूतावास ने 10 टन राहत सामग्री नेपाली अधिकारियों को सौंपी थी। इस बीच नेपाल में फंसे भारतीय नागरिकों और उनके परिजनों की सहायता के लिए भारतीय दूतावास ने हेल्पलाइन नंबर जारी किए हैं। +977 985 131 6807, +977 970 910 7500 और +977 981 032 6117 पर संपर्क किया जा सकता है। ये नंबर व्हाट्सऐप पर भी उपलब्ध हैं। भारत और नेपाल की एजेंसियां लापता लोगों की पहचान, उनकी स्थिति की पुष्टि और जरूरत पड़ने पर सुरक्षित निकासी के लिए समन्वय कर रही हैं।

भारत ने बढ़ाया मदद का हाथ, परिवारों को राहत की उम्मीद
नेपाल की त्रासदी पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने संवेदना व्यक्त करते हुए हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया है। जयशंकर ने भारतीय नागरिकों की सुरक्षा और उनकी स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए संबंधित एजेंसियों तथा नेपाल सरकार के साथ समन्वय पर जोर दिया है। वहीं पुडुचेरी विधानसभा में आपदा में जान गंवाने वालों की याद में दो मिनट का मौन भी रखा गया। इस बीच भारत के अलग-अलग हिस्सों में परिवारों की बेचैनी बढ़ती जा रही है। किसी का बेटा, किसी का भाई तो कोई अपना जीवनसाथी नेपाल की आपदा के बीच लापता है। परिवारों की सबसे बड़ी उम्मीद अब राहत और बचाव दलों से है कि जल्द उनके अपनों की लोकेशन का पता चले और उन्हें सुरक्षित बाहर निकालकर घर लौटाया जा सके।