युवा वन अधिकारी दीपाली चव्हाण की मौत से मचा था हड़कंप! पांच साल बाद आया फैसला

    20-Aug-2026
Total Views |
 
Deepali Chavan
 
नागपुर। महाराष्ट्र के वन विभाग को झकझोर देने वाले दीपाली चव्हाण (Deepali Chavan) आत्महत्या मामले में करीब पांच साल बाद अदालत का फैसला आया है। नागपुर की अदालत ने पूर्व उप वन संरक्षक (DCF) विनोद शिवकुमार को रेंज फॉरेस्ट ऑफिसर (RFO) दीपाली चव्हाण को आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से बरी कर दिया है। 25 मार्च 2021 को मेलघाट वन्यजीव विभाग के हरिसाल स्थित आवास में दीपाली चव्हाण ने आत्महत्या कर ली थी। उनकी मौत के बाद वन विभाग से लेकर प्रशासनिक महकमे तक हड़कंप मच गया था। मामले में सामने आए सुसाइड नोट ने पूरे प्रकरण को गंभीर बना दिया था। इसमें दीपाली ने कथित तौर पर लगातार मानसिक प्रताड़ना, जातिसूचक टिप्पणियों और वरिष्ठ अधिकारी के आक्रामक व्यवहार का उल्लेख किया था।
 
सुसाइड नोट में लगाए थे गंभीर आरोप
दीपाली चव्हाण ने अपने सुसाइड नोट में तत्कालीन वरिष्ठ अधिकारी विनोद शिवकुमार पर गंभीर आरोप लगाए थे। आरोप था कि उन्हें लगातार परेशान किया जाता था और धमकियां दी जाती थीं। नोट में यह भी दावा किया गया था कि शिवकुमार ने उन पर अनुसूचित जाति-जनजाति अत्याचार निवारण कानून के तहत झूठा मामला दर्ज कराने की धमकी दी थी। घटना के बाद मामले ने पूरे राज्य में व्यापक प्रतिक्रिया पैदा की। पुलिस ने शिवकुमार को घटना के दो दिन बाद नागपुर रेलवे स्टेशन से गिरफ्तार किया था। बढ़ते जनदबाव के बीच राज्य सरकार ने करीब एक सप्ताह के भीतर मामले की विभागीय जांच के लिए समिति गठित की। बाद में जांच की जिम्मेदारी डॉ. प्रसाराद सरोदे के नेतृत्व वाली विशेष जांच टीम (SIT) को सौंपी गई।
 
पांच साल चली सुनवाई
गिरफ्तारी के बाद विनोद शिवकुमार को अदालत से जमानत मिल गई थी। इसके बाद मामला लंबे समय तक न्यायिक प्रक्रिया में चलता रहा। करीब पांच वर्षों में कई सुनवाइयां हुईं और मामले की जांच व साक्ष्यों पर अदालत में विस्तार से विचार किया गया। अब नागपुर की अदालत ने शिवकुमार को दीपाली चव्हाण की आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप से दोषमुक्त कर दिया है। फैसले के साथ ही लंबे समय से चर्चा में रहे इस मामले में न्यायिक स्तर पर अध्याय बंद हो गया है। हालांकि दीपाली चव्हाण की मौत और उनके सुसाइड नोट में लगाए गए आरोपों ने वन विभाग में कार्यस्थल पर दबाव, वरिष्ठ-अधीनस्थ संबंधों और महिला अधिकारियों की सुरक्षा जैसे सवालों को भी व्यापक चर्चा में ला दिया था।