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मुंबई: निजी अनुदानित और आंशिक अनुदानित स्कूलों में प्रबंधन विवाद के कारण शिक्षकों की भर्ती अटकने से छात्रों की पढ़ाई प्रभावित नहीं होगी। राज्य के स्कूल शिक्षा एवं खेल विभाग ने इस संबंध में महत्वपूर्ण शासन निर्णय (जीआर) जारी किया है। नए नियम के अनुसार, यदि किसी शिक्षण संस्था का प्रबंधन विवाद एक वर्ष से अधिक समय से चैरिटी आयुक्त के समक्ष लंबित है, तो शिक्षा विभाग स्वयं उस स्कूल में रिक्त शिक्षकीय पदों पर 'पवित्र' (Pavitra) पोर्टल के माध्यम से भर्ती करेगा। वर्ष 2017 से पवित्र पोर्टल के जरिए पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया लागू है, लेकिन कई संस्थाओं में आंतरिक विवाद के कारण भर्ती नहीं हो पाती थी, जिससे वर्षों तक छात्रों को शिक्षकों की कमी का सामना करना पड़ता था।
शिक्षा विभाग करेगा पूरी प्रक्रिया की निगरानी
नए प्रावधान के तहत शिक्षा अधिकारी या विभागीय उपशिक्षा संचालक, मुख्याध्यापक अथवा प्रभारी मुख्याध्यापक की सहायता से रोस्टर अपडेट करेंगे और रिक्त पदों के 80 प्रतिशत तक भर्ती के लिए पवित्र पोर्टल पर विज्ञापन जारी करेंगे। उम्मीदवारों का चयन 1:1 अनुपात में बिना साक्षात्कार के किया जाएगा और उनकी नियुक्ति से इनकार नहीं किया जा सकेगा। मुख्याध्यापक को पदेन सचिव के रूप में नियुक्ति आदेश जारी करना अनिवार्य होगा। सहयोग नहीं करने पर उनके वेतन पर रोक लगाई जा सकती है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रबंधन विवाद में शामिल कोई भी पक्ष भर्ती प्रक्रिया में हस्तक्षेप नहीं करेगा। यदि कोई बाधा उत्पन्न की गई तो संबंधित स्कूल में प्रशासक नियुक्त किया जा सकता है। एक ही शिक्षा मंडल के विभिन्न जिलों में संचालित संस्थाओं के मामलों में विभागीय उपशिक्षा संचालक, जबकि अलग-अलग मंडलों में फैली संस्थाओं के मामलों में शिक्षा संचालक भर्ती प्रक्रिया का संचालन करेंगे।