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नागपुर: महाराष्ट्र जन्म एवं मृत्यु पंजीकरण नियम, 2000 में महत्वपूर्ण संशोधन किए गए हैं। नए नियमों के तहत अब जन्म या मृत्यु की घटना के 30 दिनों के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य होगा। यदि निर्धारित अवधि के बाद पंजीकरण कराया जाता है, तो संबंधित व्यक्ति को अब जिला परिषद (जिला स्वास्थ्य अधिकारी) की अनुमति लेना आवश्यक होगा। फर्जी जन्म-मृत्यु प्रमाणपत्रों पर रोक लगाने और पंजीकरण प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी एवं विश्वसनीय बनाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने यह निर्णय लिया है। संशोधित नियमों के अनुसार जिला स्वास्थ्य अधिकारियों को सब-रजिस्ट्रार का दर्जा दिया गया है। ग्राम पंचायतों से प्राप्त विलंबित पंजीकरण के प्रस्तावों की जांच कर उन्हें सात दिनों के भीतर स्वीकृति या अनुमति पत्र जारी करना होगा। इसके अलावा विलंबित पंजीकरण, रिकॉर्ड में सुधार, अपंजीकृत जन्म एवं मृत्यु का सत्यापन तथा डुप्लीकेट या त्रुटिपूर्ण प्रविष्टियों की जांच का कार्य भी अब जिला परिषद के माध्यम से किया जाएगा।
आवश्यक दस्तावेज भी तय
राज्य सरकार ने यह सख्ती उन शिकायतों के बाद लागू की है, जिनमें कुछ विदेशी नागरिकों द्वारा महाराष्ट्र में विलंबित जन्म पंजीकरण के जरिए फर्जी प्रमाणपत्र हासिल करने की बात सामने आई थी। नए नियमों के तहत विलंबित जन्म या मृत्यु पंजीकरण के लिए अस्पताल का जन्म प्रमाणपत्र अथवा डिस्चार्ज कार्ड, माता-पिता का आधार कार्ड या मतदाता पहचान पत्र तथा आवश्यकता पड़ने पर स्कूल का प्रमाणपत्र प्रस्तुत करना अनिवार्य होगा। अधिकारियों का मानना है कि दस्तावेजों के कड़े सत्यापन से फर्जी पंजीकरण पर प्रभावी रोक लगेगी और सरकारी रिकॉर्ड की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी।
3,000 लंबित मामलों का निपटारा
जिला स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. राजकुमार गहलोत ने नागरिकों से अपील करते हुए कहा कि जन्म और मृत्यु प्रमाणपत्र अत्यंत महत्वपूर्ण दस्तावेज हैं, इसलिए निर्धारित समय सीमा के भीतर उनका पंजीकरण अवश्य कराएं। उन्होंने कहा कि समय पर पंजीकरण कराने से लोगों को जिला परिषद के अनावश्यक चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। डॉ. गहलोत के अनुसार, जिला परिषद स्वास्थ्य विभाग अब तक लगभग 3,000 लंबित प्रस्तावों का निपटारा कर चुका है, जबकि अभी भी करीब 1,000 प्रस्ताव लंबित हैं और प्रतिदिन नए आवेदन प्राप्त हो रहे हैं। ऐसे में नागरिकों से समय पर पंजीकरण कर नियमों का पालन करने की अपील की गई है।