अयोध्या के बाद बदरीनाथ धाम में भी चढ़ावे में गड़बड़ी के आरोप! मंदिर समिति ने गठित की जांच समिति

    04-Jul-2026
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- सीसीटीवी फुटेज और कर्मचारियों की भूमिका होगी जांच के दायरे में

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देहरादून: अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर उठे विवाद के बीच अब उत्तराखंड के प्रसिद्ध बदरीनाथ धाम में भी चढ़ावे के धन में कथित वित्तीय अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। इन आरोपों के बाद बदरीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (बीकेटीसी) ने मामले की निष्पक्ष जांच के आदेश देते हुए एक जांच समिति का गठन किया है। समिति के अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने कहा कि सोशल मीडिया पर सामने आए आरोपों को गंभीरता से लिया गया है और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। उन्होंने बताया कि संबंधित कर्मचारियों से स्पष्टीकरण भी मांगा गया है तथा यदि जांच में किसी भी प्रकार की वित्तीय अनियमितता या चढ़ावे के दुरुपयोग की पुष्टि होती है तो दोषियों के खिलाफ नियमों के अनुसार कड़ी कार्रवाई की जाएगी। समिति ने श्रद्धालुओं को भरोसा दिलाया है कि मंदिर में आने वाले चढ़ावे का प्रबंधन पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किया जाएगा।

भैरव सेना के आरोपों से शुरू हुआ विवाद
यह विवाद तब शुरू हुआ जब भैरव सेना नामक संगठन ने मंदिर प्रशासन पर चढ़ावे के धन के प्रबंधन में अनियमितताओं के आरोप लगाए। संगठन का दावा है कि बीकेटीसी अध्यक्ष से जुड़े एक कर्मचारी की कथित रूप से चढ़ावे के धन के दुरुपयोग में भूमिका रही है। हालांकि बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने इन आरोपों का खंडन करते हुए स्पष्ट किया कि संबंधित कर्मचारी उनके निजी सचिव नहीं हैं, बल्कि वह एक सरकारी कर्मचारी हैं, जो इससे पहले भी मंदिर समिति के तीन पूर्व अध्यक्षों के निजी सहायक के रूप में कार्य कर चुके हैं। वहीं, बीकेटीसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी सोहन सिंह रंगहर ने बताया कि जांच के दायरे में आने वाली अवधि के दौरान ड्यूटी पर तैनात कर्मचारियों को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। साथ ही मंदिर परिसर के सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जाएगी, ताकि तथ्यों की निष्पक्ष पुष्टि की जा सके और जांच प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनी रहे।

बढ़ी मंदिरों में वित्तीय पारदर्शिता की मांग
बदरीनाथ धाम में शुरू हुई यह जांच ऐसे समय में सामने आई है, जब अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ावे के कथित दुरुपयोग को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस जारी है। अयोध्या मामले में लगभग 70 किलोग्राम चांदी, 1,250 किलोग्राम सोना और करीब 200 करोड़ रुपये नकद चढ़ावे के प्रबंधन को लेकर गंभीर आरोप लगाए गए हैं। इन आरोपों के बाद विशेष जांच दल (एसआईटी) द्वारा जांच शुरू किए जाने पर मंदिर ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। साथ ही उनके खिलाफ प्राथमिकी (एफआईआर) दर्ज कराने की तैयारी भी की जा रही है। हालांकि बदरीनाथ और अयोध्या के दोनों मामले एक-दूसरे से जुड़े नहीं हैं, लेकिन लगातार सामने आ रहे ऐसे विवादों ने देश के प्रमुख धार्मिक संस्थानों में वित्तीय निगरानी, पारदर्शिता और जवाबदेही को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

श्रद्धालुओं का भरोसा बनाए रखने पर जोर
बीकेटीसी अध्यक्ष हेमंत द्विवेदी ने दोहराया कि समिति का उद्देश्य केवल आरोपों की सच्चाई सामने लाना और श्रद्धालुओं का विश्वास बनाए रखना है। उन्होंने कहा कि जांच पूरी तरह निष्पक्ष और बिना किसी पूर्वाग्रह के की जाएगी। यदि किसी कर्मचारी की वित्तीय अनियमितता या चढ़ावे के दुरुपयोग में संलिप्तता साबित होती है, तो उसके खिलाफ नियमों के तहत कड़ी और प्रभावी कार्रवाई की जाएगी। मंदिर समिति का कहना है कि श्रद्धालुओं द्वारा अर्पित दान और चढ़ावा आस्था का विषय है तथा उसके प्रबंधन में किसी भी प्रकार की लापरवाही या गड़बड़ी को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समिति ने भरोसा दिलाया कि जांच पूरी पारदर्शिता के साथ की जाएगी और तथ्य सामने आने के बाद उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।