- निवेश और रोजगार बढ़ाने की दिशा में सरकार का बड़ा कदम

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मुंबई/नागपुर: महाराष्ट्र सरकार ने नागपुर मंडल में वर्षों से निष्क्रिय पड़े औद्योगिक भूखंडों को पुनः अधिग्रहित कर नए निवेशकों के लिए उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज कर दी है। राज्य के उद्योग मंत्री उदय सामंत ने विधान परिषद में जानकारी देते हुए बताया कि महाराष्ट्र औद्योगिक विकास निगम (एमआईडीसी) ने उद्योग स्थापित न करने वाले आवंटियों से कुल 39 औद्योगिक भूखंड वापस ले लिए हैं। इनमें हिंगना के 9 और बुटीबोरी के 30 भूखंड शामिल हैं। इन भूखंडों को अब एमआईडीसी के ‘मिलाप’ पोर्टल के माध्यम से नए उद्यमियों और निवेशकों के लिए उपलब्ध कराया गया है। मंत्री ने यह जानकारी विधान परिषद में सदस्य अभिजीत वंजारी, डॉ. परिणय फुके, प्रवीण दरेकर सहित अन्य सदस्यों द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न के उत्तर में दी। सरकार का मानना है कि लंबे समय से खाली पड़े औद्योगिक भूखंडों का प्रभावी उपयोग होने से नए उद्योग स्थापित होंगे, जिससे क्षेत्र में निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
153 उद्योग बंद, 270 एकड़ भूमि पर कब्जा
उद्योग मंत्री ने सदन को बताया कि हिंगना और बुटीबोरी औद्योगिक क्षेत्रों में वर्तमान में 153 औद्योगिक इकाइयां बंद पड़ी हैं, जिनके कब्जे में लगभग 270 एकड़ भूमि है। इसके अलावा नागपुर, वर्धा, भंडारा और गोंदिया जिलों में कुल 301 आवंटित औद्योगिक भूखंड ऐसी इकाइयों के पास हैं जो वित्तीय संकट, कानूनी विवाद या अन्य परिचालन संबंधी कारणों से वर्षों से बंद हैं। एमआईडीसी ने ऐसी सभी इकाइयों को नोटिस जारी कर निर्धारित समय सीमा के भीतर उत्पादन दोबारा शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यदि संबंधित इकाइयां तय अवधि में उत्पादन शुरू नहीं करती हैं, तो एमआईडीसी अपनी भूमि पुनः अधिग्रहण नीति के तहत उन भूखंडों को वापस लेकर नए निवेशकों को आवंटित करेगी। सरकार का कहना है कि इससे औद्योगिक भूमि का बेहतर उपयोग सुनिश्चित होगा और औद्योगिक विकास को नई गति मिलेगी।
नियमों के तहत ही होंगे हस्तांतरण
उदय सामंत ने औद्योगिक भूखंडों के कथित अनधिकृत लेन-देन को लेकर उठे सवालों का भी जवाब दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि एमआईडीसी द्वारा आवंटित औद्योगिक भूखंडों की सीधी बिक्री की अनुमति नहीं है। किसी भी प्रकार का हस्तांतरण या लीज व्यवस्था केवल एमआईडीसी की पूर्व स्वीकृति और निर्धारित नियमों के अनुरूप ही की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य निष्क्रिय भूमि को सक्रिय औद्योगिक परिसंपत्ति में बदलना है, ताकि नए उद्यमियों को पर्याप्त भूमि उपलब्ध हो सके। लंबे समय से बंद उद्योगों के कारण बड़ी मात्रा में औद्योगिक भूमि अनुपयोगी पड़ी होने से नए निवेश और रोजगार सृजन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था। ऐसे में सरकार की यह पहल नागपुर क्षेत्र में औद्योगिक विकास को गति देने और रोजगार के नए अवसर सृजित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।