- श्रद्धालुओं को दी शुभकामनाएं
- अमरनाथ यात्रा को बताया आध्यात्मिक परंपरा का अमर अध्याय

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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को वार्षिक अमरनाथ यात्रा शुरू होने के अवसर पर भगवान शिव के श्रद्धालुओं को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर में स्थित बाबा बर्फानी के पवित्र धाम की यात्रा करना अपने आप में एक बड़ा सौभाग्य है। प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं के नाम लिखे अपने संदेश में कहा कि हर वर्ष लाखों शिवभक्त बाबा अमरनाथ के दर्शन के लिए इस कठिन लेकिन अत्यंत पवित्र यात्रा पर निकलते हैं और यह अनुभव उनके जीवन की अविस्मरणीय आध्यात्मिक यात्रा बन जाता है। उन्होंने कहा कि अमरनाथ यात्रा भारत की सनातन आध्यात्मिक परंपरा का एक अमर अध्याय है, जिसमें देश-दुनिया के विभिन्न क्षेत्रों, भाषाओं और संस्कृतियों से जुड़े श्रद्धालु महादेव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए एकजुट होकर शामिल होते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह यात्रा भारत की सांस्कृतिक एकता और आस्था का जीवंत प्रतीक है।
सुरक्षा बलों, प्रशासन और सेवा में जुटे कर्मियों का जताया आभार
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में अमरनाथ यात्रा के सफल संचालन में जुटे सभी सुरक्षा बलों, प्रशासनिक अधिकारियों और सेवा कर्मियों का विशेष रूप से आभार व्यक्त किया। उन्होंने भारतीय सेना, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), जम्मू-कश्मीर पुलिस, भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी), सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ), राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ), स्वास्थ्यकर्मियों, प्रशासनिक अधिकारियों, सफाई कर्मचारियों और स्वयंसेवकों की सराहना करते हुए कहा कि इन सभी के समर्पण और सेवा भावना के कारण लाखों श्रद्धालु सुरक्षित और सुगमता से यात्रा पूरी कर पाते हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि दो महीने तक चलने वाली इस यात्रा के दौरान बाबा बर्फानी के धाम में भारत की 'अनेकता में एकता' की अद्भुत झलक दिखाई देती है, जहां अलग-अलग राज्यों और संस्कृतियों के लोग एक ही आस्था के सूत्र में बंधे नजर आते हैं।
पीएम मोदी ने श्रद्धालुओं से अपनाने को कहा पांच संकल्प
प्रधानमंत्री ने इस वर्ष की अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं से पांच महत्वपूर्ण 'संकल्प' अपनाने की अपील की। पहला संकल्प स्वच्छता बनाए रखने का है, ताकि यात्रा मार्ग और पवित्र स्थल साफ-सुथरे रहें। दूसरा संकल्प प्रशासन द्वारा जारी सभी निर्देशों, यातायात नियमों और सुरक्षा संबंधी दिशा-निर्देशों का पूरी निष्ठा से पालन करने का है। उन्होंने श्रद्धालुओं को फिसलन भरे रास्तों और खराब मौसम के प्रति विशेष सतर्क रहने की सलाह भी दी। तीसरे संकल्प के रूप में प्रधानमंत्री ने 'वोकल फॉर लोकल' अभियान को बढ़ावा देते हुए अपील की कि यात्री अपने कुल यात्रा खर्च का कम से कम 10 प्रतिशत जम्मू-कश्मीर के स्थानीय उत्पादों की खरीदारी पर खर्च करें। उनका कहना था कि इससे स्थानीय परिवारों और युवाओं की आजीविका को मजबूती मिलेगी और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को भी लाभ पहुंचेगा।
'एक पेड़ मां के नाम' और 'विकसित भारत' का भी दिया संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने श्रद्धालुओं से यह भी आग्रह किया कि इस वर्ष अमरनाथ यात्रा का समापन रक्षाबंधन के अवसर पर होने जा रहा है, इसलिए वे 'एक पेड़ मां के नाम' अभियान के तहत एक पौधा उपहार स्वरूप अवश्य भेंट करें या लगाएं। उन्होंने इसे पर्यावरण संरक्षण और मातृ सम्मान से जुड़ा एक महत्वपूर्ण अभियान बताया। अपने संदेश के अंत में प्रधानमंत्री ने श्रद्धालुओं से 'राष्ट्र प्रथम' की भावना को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि प्रत्येक नागरिक को पूरे वर्ष ईमानदारी से अपने कर्तव्यों का पालन करते हुए 'विकसित भारत' के निर्माण में सक्रिय योगदान देना चाहिए। प्रधानमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि श्रद्धा, अनुशासन, स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्रसेवा के इन संकल्पों के साथ निकाली गई अमरनाथ यात्रा न केवल आध्यात्मिक रूप से सफल होगी, बल्कि समाज और राष्ट्र के लिए भी प्रेरणादायक संदेश देगी।