नागपुर में पहली तेज बारिश ने खोली मानसून तैयारियों की पोल! सुरक्षा व्यवस्था सवालों के घेरे में

    03-Jul-2026
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- 70 मिमी बारिश के बाद कई सड़कें जलमग्न
- निर्माण स्थलों पर बढ़ा हादसों का खतरा

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नागपुर : बुधवार रात हुई मानसून की पहली तेज बारिश ने शहर में चल रही विभिन्न अधोसंरचना परियोजनाओं की तैयारियों की हकीकत उजागर कर दी। करीब 70 मिमी बारिश के बाद शहर के कई हिस्सों में सड़कें जलमग्न हो गईं, अस्थायी डायवर्जन पानी और कीचड़ से भर गए तथा खुदाई वाले हिस्से पूरी तरह दलदल में तब्दील हो गए। इसका सबसे गंभीर उदाहरण रामेश्वरी रोड पर देखने को मिला, जहां निर्माण कार्य के लिए खोदे गए हिस्से में एक कार गिर गई। इस घटना ने निर्माण स्थलों पर सुरक्षा इंतजामों और मानसून पूर्व तैयारियों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश के कारण शहर के अनेक मार्गों पर यातायात प्रभावित रहा और वाहन चालकों, विशेषकर दोपहिया सवारों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। पहली ही तेज बारिश में सामने आई इन समस्याओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि निर्माण कार्यों के दौरान जल निकासी और सुरक्षा प्रबंधन को पर्याप्त प्राथमिकता नहीं दी गई।

जल निकासी और बैरिकेडिंग में दिखी कमी
वर्तमान में नागपुर में नागपुर महानगरपालिका (एनएमसी), लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), महारेल, महामेट्रो, नागपुर सुधार प्रन्यास (एनआईटी), नागपुर महानगर क्षेत्र विकास प्राधिकरण (एनएमआरडीए) तथा राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) जैसी कई सरकारी एजेंसियां फ्लाईओवर, अंडरपास, सीमेंट सड़कें, ड्रेनेज नेटवर्क, यूटिलिटी शिफ्टिंग और चौराहों के उन्नयन सहित विभिन्न परियोजनाओं पर एक साथ काम कर रही हैं। लेकिन पहली ही भारी बारिश ने इन परियोजनाओं के दौरान अपनाई गई व्यवस्थाओं की कमजोरियां उजागर कर दीं। निर्माणाधीन सड़कों पर बारिश का पानी भर जाने से कई स्थानों पर रास्ते पूरी तरह बंद जैसे हो गए, जबकि खुदाई वाले क्षेत्रों में मिट्टी और पानी मिलकर फिसलन भरी कीचड़ में बदल गए। इससे रोजाना आवागमन करने वाले नागरिकों के लिए गंभीर जोखिम की स्थिति उत्पन्न हो गई।

पूर्व, दक्षिण और बेसा-बेलतरोडी क्षेत्र सबसे अधिक प्रभावित
शहर के विभिन्न इलाकों में बारिश का व्यापक असर देखने को मिला। पूर्व नागपुर में महारेल द्वारा बनाए जा रहे फ्लाईओवर तथा कड़बी चौक-मोमिनपुरा कॉरिडोर के आसपास पहुंच मार्गों पर जलभराव और कीचड़ के कारण यातायात धीमा पड़ गया। दक्षिण नागपुर में एनएमसी की अमृत 2.0 ड्रेनेज परियोजना के तहत खोदी गई सड़कें दलदल में बदल गईं, जिससे विशेष रूप से दोपहिया वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बढ़ गया। वहीं इनर रिंग रोड पर पीडब्ल्यूडी की थ्री-इन-वन फ्लाईओवर परियोजना के आसपास भी जलभराव की स्थिति बनी रही। इसके अलावा एनएमसी द्वारा बनाई जा रही कई अधूरी सीमेंट सड़कें भी बारिश के कारण यातायात में बाधा बनीं। बेसा-बेलतरोडी क्षेत्र में एनएमआरडीए की ड्रेनेज परियोजना के तहत खुदी सड़कें पूरी तरह कीचड़ में बदल गईं, जिससे वाहन फिसलने का खतरा कई गुना बढ़ गया।

नागरिकों ने बेहतर समन्वय और कड़ी निगरानी की उठाई मांग
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि मानसून की पहली ही बारिश ने विभिन्न एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी को उजागर कर दिया है। कई निर्माण स्थलों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग, अस्थायी जल निकासी व्यवस्था, चेतावनी संकेत और सुरक्षा उपायों का अभाव साफ दिखाई दिया। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इन कमियों को दूर नहीं किया गया तो आगामी दिनों में भारी बारिश के दौरान दुर्घटनाओं की आशंका और बढ़ सकती है। नागरिकों ने प्रशासन से मांग की है कि सभी निर्माण एजेंसियों के कार्यों की नियमित निगरानी की जाए, मानसून के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए तथा जल निकासी और यातायात प्रबंधन की प्रभावी व्यवस्था बनाई जाए। उनका कहना है कि शहर का विकास आवश्यक है, लेकिन यह विकास नागरिकों की सुरक्षा की कीमत पर नहीं होना चाहिए। पहली ही बारिश ने स्पष्ट कर दिया है कि यदि बेहतर योजना और समन्वय नहीं किया गया तो अधोसंरचना परियोजनाएं मानसून के दौरान लोगों के लिए बार-बार खतरे का कारण बन सकती हैं।