स्कूलों के 500 मीटर दायरे में 'स्टिंग' की बिक्री पर रोक, मंत्री के निर्देश के बाद कार्रवाई का इंतजार

    03-Jul-2026
Total Views |
Image Source:(Internet)

मुंबई: राज्य विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान विभिन्न मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस जारी है। इसी बीच स्कूलों के आसपास बिकने वाले लोकप्रिय एनर्जी ड्रिंक 'स्टिंग' का मुद्दा सदन में प्रमुखता से उठा। भाजपा विधायक विक्रम पाचपुते ने इस विषय को विधानसभा में उठाते हुए बच्चों के स्वास्थ्य पर इसके गंभीर दुष्परिणामों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित किया। इस पर खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) से जुड़े मामलों के मंत्री नरहरी झिरवल ने स्कूल परिसरों के 500 मीटर के दायरे में 'स्टिंग' की बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश दिए। इस फैसले के बाद अब सबकी नजरें एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे पर हैं, जिनकी सख्त कार्यशैली की लगातार सराहना हो रही है। विधानसभा परिसर में भी आज मुंढे की मौजूदगी चर्चा का विषय रही और यह सवाल उठने लगा कि क्या इस आदेश पर भी उसी सख्ती से अमल कराया जाएगा।

विधायक विक्रम पाचपुते ने बताई स्वास्थ्य संबंधी चिंताएं
विधानसभा में अपनी बात रखते हुए विधायक विक्रम पाचपुते ने कहा कि 'स्टिंग' एक बेहद सस्ता एनर्जी ड्रिंक है, जिसकी पहुंच आसानी से स्कूली बच्चों तक हो जाती है। उन्होंने बताया कि उत्पाद के लेबल पर स्वयं कंपनी ने यह उल्लेख किया है कि इसे छोटे बच्चों को नहीं दिया जाना चाहिए। इसके बावजूद स्कूलों के आसपास इसकी खुलेआम बिक्री हो रही है। पाचपुते ने कहा कि इस पेय में लगभग 32 मिलीग्राम कैफीन, टॉरिन और लगभग 34 प्रतिशत शर्करा होती है। कैफीन हृदय गति को तेज करता है, जबकि टॉरिन शरीर को अस्थायी ऊर्जा देता है। हालांकि, इसका असर खत्म होने के बाद शरीर में अचानक ऊर्जा की कमी महसूस होती है, जिससे दोबारा इसे पीने की इच्छा होती है और धीरे-धीरे इसकी आदत लग सकती है। उन्होंने इसे बच्चों के स्वास्थ्य के लिए गंभीर खतरा बताते हुए सरकार से तत्काल हस्तक्षेप की मांग की।

मंत्री नरहरी झिरवल का निर्देश, स्कूलों के आसपास बिक्री पर लगेगी रोक
विधायक के सवाल का जवाब देते हुए मंत्री नरहरी झिरवल ने कहा कि विशेषज्ञों के अनुसार किसी व्यक्ति को एक दिन में दो से अधिक 'स्टिंग' का सेवन नहीं करना चाहिए। उन्होंने स्वीकार किया कि यह पेय तत्काल जानलेवा नहीं है, लेकिन इसके लगातार सेवन से हृदय संबंधी जोखिम बढ़ सकते हैं। मंत्री ने कहा कि ऐसे एनर्जी ड्रिंक बच्चों में मधुमेह जैसी समस्याओं को बढ़ावा देने के साथ-साथ लत की प्रवृत्ति भी विकसित कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि कम उम्र में इस तरह की आदतें भविष्य में अन्य नशे की ओर भी ले जा सकती हैं। इन स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को देखते हुए सरकार ने स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में 'स्टिंग' की बिक्री पर रोक लगाने का निर्णय लिया है। साथ ही निर्देश दिया गया है कि यदि कोई दुकानदार इस आदेश का उल्लंघन करता पाया गया तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।

अब एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे की कार्रवाई पर टिकी निगाहें
सरकार की घोषणा के बाद अब सबसे बड़ा सवाल इसके प्रभावी क्रियान्वयन का है। एफडीए आयुक्त तुकाराम मुंढे अपनी कड़ी प्रशासनिक कार्यशैली और नियमों के सख्त पालन के लिए जाने जाते हैं। ऐसे में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि स्कूलों के आसपास 'स्टिंग' की बिक्री रोकने के निर्देशों को जमीन पर किस तरह लागू किया जाता है। विधायक विक्रम पाचपुते ने पत्रकारों से बातचीत में कहा कि उनका व्यक्तिगत मत है कि 'स्टिंग' शराब से भी अधिक नुकसानदायक साबित हो सकती है, क्योंकि इसका प्रभाव सीधे बच्चों और किशोरों पर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि नियम पहले से मौजूद हैं कि ऐसे उत्पाद छोटे बच्चों को नहीं बेचे जाने चाहिए, लेकिन उनका पालन नहीं हो रहा है। अब सरकार के निर्देशों के बाद यह उम्मीद की जा रही है कि एफडीए व्यापक अभियान चलाकर स्कूलों के आसपास दुकानों की जांच करेगा और उल्लंघन करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित करेगा। इससे बच्चों के स्वास्थ्य की सुरक्षा और कानून के प्रभावी पालन की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाया जा सकेगा।