NEET प्रदर्शन में घायल छात्रा की हालत में सुधार, वेंटिलेटर से हटाया गया

    27-Jul-2026
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- जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था और कड़ी
- आरएमएल अस्पताल ने जारी किया हेल्थ बुलेटिन

Student injured
 Image Source:(Internet)
 
नई दिल्ली। 20 जुलाई को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान घायल हुई 21 वर्षीय छात्रा (Student) की स्वास्थ्य स्थिति में लगातार सुधार हो रहा है। दिल्ली के डॉ. राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) अस्पताल ने सोमवार को जारी मेडिकल बुलेटिन में बताया कि छात्रा अब वेंटिलेटर से पूरी तरह हट चुकी है और स्वयं सामान्य रूप से सांस ले रही है। अस्पताल के अनुसार, लगभग पांच दिन पहले उसे सफलतापूर्वक वेंटिलेटर सपोर्ट से हटाया गया था। फिलहाल वह पूरी तरह होश में है, सतर्क है और डॉक्टरों के निर्देशों का सही तरीके से पालन कर रही है। अस्पताल ने यह भी बताया कि पिछले 72 घंटों से छात्रा को मुंह के जरिए भोजन दिया जा रहा है, जिसे उसका शरीर अच्छी तरह स्वीकार कर रहा है। डॉक्टरों का कहना है कि उसकी हालत फिलहाल स्थिर है, हालांकि पूरी तरह स्वस्थ होने तक उसे विशेषज्ञ डॉक्टरों की बहु-विषयक टीम की निगरानी में रखा गया है।
 
 
20 जुलाई के प्रदर्शन में 130 पुलिसकर्मी और 65 छात्र हुए थे घायल
इधर, दिल्ली पुलिस के सूत्रों ने बताया कि 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद की ओर निकाले गए 'संसद चलो' मार्च के दौरान हुई झड़पों में कम से कम 130 पुलिसकर्मी और करीब 65 छात्र घायल हुए थे। प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित होने के बाद पुलिस ने विभिन्न मामलों में अब तक 15 एफआईआर दर्ज की हैं। पुलिस का कहना है कि प्रदर्शन के दौरान कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच धक्का-मुक्की और टकराव की स्थिति बनी, जिसके कारण दोनों पक्षों के लोग घायल हुए। इस घटना के बाद छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं, जबकि पुलिस का कहना है कि उसने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक कदम उठाए थे।
 
सुरक्षा के लिए भारी पुलिस बल तैनात
दिल्ली पुलिस के अनुसार, छात्र आंदोलन अभी भी जारी है और प्रतिदिन औसतन 10 हजार लोग जंतर-मंतर और उसके आसपास एकत्र हो रहे हैं। भीड़ को नियंत्रित करने और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए करीब 3,000 पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है। पुलिस लगातार प्रदर्शन स्थल की निगरानी कर रही है ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था को पहले से अधिक मजबूत किया गया है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल भी तैनात किया गया है। प्रशासन का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन जारी रहे, लेकिन किसी भी तरह की हिंसा या अव्यवस्था की स्थिति उत्पन्न न हो।
 
2,000 से अधिक संदिग्धों की पहचान का दावा
दिल्ली पुलिस ने सुरक्षा व्यवस्था को और प्रभावी बनाने के लिए फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) कैमरों का उपयोग भी शुरू कर दिया है। पुलिस सूत्रों के मुताबिक, इन कैमरों की मदद से जंतर-मंतर पहुंचने वाले 2,000 से अधिक ऐसे लोगों की पहचान की गई है, जिनका पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। पुलिस का कहना है कि इस तकनीक का उद्देश्य प्रदर्शन में शामिल असामाजिक तत्वों की पहचान कर किसी भी संभावित हिंसा या कानून-व्यवस्था की समस्या को रोकना है। वहीं, छात्र संगठनों और कुछ सामाजिक संगठनों ने निगरानी की इस व्यवस्था पर सवाल भी उठाए हैं। ऐसे में छात्र आंदोलन, सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस कार्रवाई को लेकर राष्ट्रीय राजधानी में राजनीतिक और सामाजिक बहस लगातार तेज होती जा रही है।