CJP से आगे की कहानी: NEET आंदोलन में AISA की नेहा बोरा और साथियों ने भी निभाई अहम भूमिका

    27-Jul-2026
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- 23 दिन का अनशन, सोशल मीडिया से आंदोलन को दी नई धार

Neha Bora
 Image Source:(Internet)
 
नई दिल्ली। NEET-UG 2026 पेपर लीक को लेकर हुए देशव्यापी आंदोलन में जहां कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) सबसे अधिक सुर्खियों में रही, वहीं ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (AISA) की राष्ट्रीय अध्यक्ष नेहा बोरा (Neha Bora) और उनके साथियों ने भी इस आंदोलन को लगातार गति देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) के स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड एस्थेटिक्स की पीएचडी स्कॉलर और थिएटर आर्टिस्ट नेहा बोरा ने 23 दिनों तक अनशन किया, जिसके दौरान उनका करीब 7.5 किलोग्राम वजन कम हो गया। आंदोलन के दौरान उन्होंने इंस्टाग्राम रील्स, व्यंग्य और डार्क ह्यूमर के जरिए परीक्षा में कथित अनियमितताओं और सरकार की कार्यप्रणाली पर लगातार सवाल उठाए। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो और संदेश तेजी से वायरल हुए, जिससे आंदोलन को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी व्यापक पहचान मिली। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के 25 जुलाई को इस्तीफा देने के बाद नेहा और उनके साथियों ने फिल्म दिल से के गीतों पर नृत्य कर अपनी खुशी भी जाहिर की।
 
अनशन में साथ रहे आमीन अमीतोज और मनीष कुमार
नेहा बोरा के साथ AISA के दो अन्य प्रमुख कार्यकर्ता आमीन अमीतोज और मनीष कुमार भी लंबे समय तक भूख हड़ताल पर डटे रहे। अंबेडकर विश्वविद्यालय के पीएचडी स्कॉलर आमीन अमीतोज ने इस आंदोलन की तुलना 2020-21 के किसान आंदोलन से करते हुए कहा कि लंबे और शांतिपूर्ण संघर्ष से ही व्यवस्था में बदलाव संभव है। वहीं AISA के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष मनीष कुमार ने भी अनशन के दौरान 10 किलोग्राम से अधिक वजन घटने के बावजूद आंदोलन जारी रखा, हालांकि वे मीडिया की सुर्खियों से अपेक्षाकृत दूर रहे। अंततः राज्यसभा सांसद मनोज झा, सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव, वरिष्ठ अधिवक्ता प्रशांत भूषण, अभिनेता प्रकाश राज और अभिनेत्री शबाना आजमी सहित कई प्रमुख हस्तियों की अपील पर तीनों ने अपना अनशन समाप्त किया। इस दौरान छात्र संगठनों ने आंदोलन को केवल परीक्षा विवाद तक सीमित न रखकर शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग से भी जोड़ा।
 
'यह व्यवस्था परिवर्तन का अभियान'
अनशन समाप्त करने के बाद नेहा बोरा ने स्पष्ट किया कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा आंदोलन का अंतिम लक्ष्य नहीं, बल्कि बदलाव की दिशा में पहला कदम है। उनके अनुसार यह संघर्ष किसी एक व्यक्ति के खिलाफ नहीं, बल्कि शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए है। AISA ने अपनी पुरानी मांगों को दोहराते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को समाप्त करने, राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) को वापस लेने और आंदोलन में शामिल प्रदर्शनकारियों पर दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग रखी। नेहा ने कहा कि यह आंदोलन CJP के गठन से पहले ही शुरू हो चुका था और इसे केवल किसी एक संगठन से जोड़कर नहीं देखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, आने वाले समय में यह संघर्ष देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही और संस्थागत सुधार की दिशा में एक बड़े जनआंदोलन के रूप में याद किया जाएगा।