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नागपुर। नीट-यूजी पेपर लीक मामले के बाद आत्महत्या करने वाली छात्रा आकांक्षा (Akanksha) चतुर्वेदी के माता-पिता ने अपनी बेटी के लिए न्याय, दोषियों को कड़ी सजा और उचित मुआवजे की मांग दोहराई है। केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बावजूद परिवार ने साफ कहा है कि वे केवल इस कार्रवाई से संतुष्ट नहीं हैं। आकांक्षा की मां नीलम चतुर्वेदी ने कहा कि उनकी बेटी अब वापस नहीं आएगी, इसलिए सरकार को केवल जिम्मेदारी तय करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए बल्कि उन सभी लोगों पर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए जिन्होंने पेपर लीक जैसी घटना को संभव बनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का कोई प्रतिनिधि अब तक उनके परिवार से मिलने नहीं आया। उनका कहना है कि परिवार ने बेटी की पढ़ाई के लिए जमीन तक बेच दी थी, जिसकी भरपाई केवल इस्तीफे से नहीं हो सकती। उन्होंने दोषियों को फांसी देने की मांग करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ने की बात कही।
'हमारी बेटी का सपना अधूरा रह गया'
आकांक्षा के पिता कृष्ण कुमार चतुर्वेदी ने कहा कि उनकी दुनिया उनकी बेटी के साथ ही खत्म हो गई। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि आकांक्षा डॉक्टर बनकर देश की सेवा करना चाहती थी, लेकिन पेपर लीक की घटना ने उसका सपना हमेशा के लिए छीन लिया। गौरतलब है कि मई में नीट-यूजी परीक्षा का प्रश्नपत्र लीक होने के बाद पूरे देश में विरोध प्रदर्शन शुरू हो गए थे, जिसके बाद सरकार ने 21 जून को दोबारा परीक्षा आयोजित कराई। इस बीच कथित तौर पर कई नीट अभ्यर्थियों द्वारा आत्महत्या किए जाने की घटनाओं ने इस विवाद को और गंभीर बना दिया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा ने घोषणा की है कि आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित मुआवजा दिया जाएगा। वहीं धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना इस्तीफा सौंपते हुए कहा कि वे छात्रों और युवाओं के हित में यह निर्णय ले रहे हैं ताकि देश का भविष्य भ्रम और अविश्वास के माहौल में न फंसे।
आंदोलन थमा, लेकिन जवाबदेही पर सवाल कायम
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर दिल्ली के जंतर-मंतर पर चला आंदोलन भी अब समाप्त हो गया है। सोशल मीडिया पर व्यंग्य के रूप में शुरू हुआ कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) का अभियान बाद में एक बड़े छात्र आंदोलन में बदल गया, जिसमें सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक भी शामिल हुए। सीजेपी ने केंद्रीय मंत्रियों जितेंद्र सिंह और जेपी नड्डा के साथ तीन दौर की बातचीत के बाद अपना आंदोलन वापस लेने की घोषणा की। हालांकि आंदोलन खत्म होने के बावजूद यह मामला केवल एक मंत्री के इस्तीफे तक सीमित नहीं रह गया है। पीड़ित परिवारों का कहना है कि असली न्याय तब होगा जब पेपर लीक के पूरे नेटवर्क का खुलासा होगा, दोषियों को कठोर सजा मिलेगी और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए परीक्षा व्यवस्था में ठोस और पारदर्शी सुधार किए जाएंगे। फिलहाल देशभर में इस मुद्दे पर जवाबदेही, शिक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता और छात्रों के भविष्य को लेकर बहस जारी है।