'छात्रों के हित सर्वोपरि', जिम्मेदारी लेते हुए पद छोड़ा
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नई दिल्ली। NEET-UG पेपर लीक विवाद को लेकर पिछले कई सप्ताह से जारी देशव्यापी विरोध प्रदर्शन के बीच केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भेजे अपने इस्तीफे में प्रधान ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय छात्रों के व्यापक हित, देश की एकता और युवाओं के भविष्य को ध्यान में रखते हुए लिया है। उन्होंने कहा कि वे नहीं चाहते कि छात्र भ्रम, कानूनी जटिलताओं और राजनीतिक माहौल में उलझकर अपने करियर से भटक जाएं। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर जारी संदेश में उन्होंने लिखा कि शिक्षा के क्षेत्र से उनका चार दशक से अधिक का जुड़ाव रहा है और वे आगे भी शिक्षा सुधार तथा विद्यार्थियों के हितों के लिए काम करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि देश की प्रगति के लिए मजबूत, समावेशी और भविष्य उन्मुख शिक्षा व्यवस्था बेहद जरूरी है।
पेपर लीक पर सरकार की कार्रवाई गिनाई
धर्मेंद्र प्रधान ने अपने बयान में कहा कि 3 मई को आयोजित परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी मिलते ही केंद्र सरकार ने तत्काल कार्रवाई की। मामले की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) को सौंपी गई, परीक्षा रद्द कर दोबारा परीक्षा कराने का निर्णय लिया गया और अगले वर्ष से परीक्षा को कंप्यूटर आधारित (CBT) मोड में आयोजित करने की घोषणा की गई। उन्होंने कहा कि सरकार का सबसे बड़ा उद्देश्य 20 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य की रक्षा करना था। प्रधान के अनुसार, शुरुआत से ही उन्होंने नैतिक जिम्मेदारी स्वीकार की थी और यह सुनिश्चित करने का प्रयास किया कि मेहनत करने वाले योग्य विद्यार्थियों के भविष्य पर किसी प्रकार का नकारात्मक प्रभाव न पड़े। उन्होंने यह भी दोहराया कि सरकार परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने के लिए व्यापक सुधारों पर काम कर रही है।
विरोध प्रदर्शनों और वांगचुक की भूख हड़ताल के बीच बढ़ा दबाव
धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब देशभर में NEET पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन तेज हो गए हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर सहित कई शहरों में छात्र और विभिन्न संगठन परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं। इसी मुद्दे पर सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने 26 दिनों तक भूख हड़ताल भी की, जिसने इस आंदोलन को राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक चर्चा में ला दिया। अपने संदेश में प्रधान ने आरोप लगाया कि कुछ जिम्मेदार पदों पर बैठे लोगों ने छात्रों को गुमराह करने और स्थिति को और जटिल बनाने का प्रयास किया। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध प्रदर्शनों का फायदा राष्ट्रविरोधी तत्वों को नहीं मिलने देना चाहिए और इसी उद्देश्य से उन्होंने पद छोड़ने का फैसला लिया ताकि छात्रों का ध्यान दोबारा पढ़ाई और करियर पर केंद्रित हो सके।
मोदी का जताया आभार
अपने इस्तीफे में धर्मेंद्र प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उन्हें देश के शिक्षा मंत्री के रूप में सेवा करने का अवसर मिला, जिसके लिए वे सदैव कृतज्ञ रहेंगे। उन्होंने केंद्रीय मंत्रिमंडल के सहयोगियों, शिक्षा मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों का भी धन्यवाद दिया। प्रधान ने कहा कि हाल ही में घोषित पुनर्परीक्षा के परिणामों में आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों सहित बड़ी संख्या में प्रतिभाशाली विद्यार्थियों ने सफलता हासिल की है, जो सरकार के प्रयासों की सफलता को दर्शाता है। इस बीच केंद्र सरकार परीक्षा में होने वाली धांधली रोकने के लिए एक सख्त एंटी-पेपर लीक कानून लाने की तैयारी में है। प्रस्तावित कानून के तहत स्पेशल फास्ट-ट्रैक कोर्ट, विशेष टास्क फोर्स और परीक्षा से जुड़े अपराधों पर कठोर कार्रवाई जैसे प्रावधान शामिल किए जा सकते हैं, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाई जा सके।