- छात्र आंदोलन को विपक्षी एकजुटता देने की तैयारी
- जंतर-मंतर पहुंचे शिवसेना प्रमुख, बोले- 'युवाओं की आवाज को दबाना लोकतंत्र के खिलाफ'

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नई दिल्ली। कथित NEET पेपर लीक और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर जारी छात्र आंदोलन के बीच शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने आंदोलन को खुला समर्थन देते हुए विपक्षी दलों की एकजुटता पर जोर दिया है। दिल्ली पहुंचकर उन्होंने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों से मुलाकात की और उनके आंदोलन के प्रति अपना समर्थन जताया। बताया जा रहा है कि ठाकरे आंदोलन से जुड़े अभिजीत दिपके के लगातार संपर्क में रहे हैं। इससे पहले उन्होंने सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक से भी उनकी लंबी भूख हड़ताल को समाप्त करने की अपील की थी और उनके स्वास्थ्य को लेकर चिंता जताई थी। अब पुलिस लाठीचार्ज के बाद ठाकरे का दिल्ली पहुंचना इस आंदोलन को लेकर विपक्ष की सक्रियता का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है। उनका कहना है कि छात्रों की मांगों को केवल राजनीतिक मुद्दा मानकर नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
12 वर्षों की नाराजगी अब सामने आई - उद्धव ठाकरे
जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों से मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे ने केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस तरह से प्रदर्शन कर रहे युवाओं और महिलाओं के साथ व्यवहार किया जा रहा है, वह किसी लोकतांत्रिक व्यवस्था के अनुरूप नहीं है। ठाकरे के अनुसार, देश में दिखाई दे रहा जनाक्रोश अचानक पैदा नहीं हुआ, बल्कि पिछले कई वर्षों से बढ़ रहे असंतोष का परिणाम है, जो अब खुलकर सामने आ रहा है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे और छात्रों की मांगों को गंभीरता से नहीं लेती है, तो आंदोलन की रणनीति और स्वरूप में बदलाव किया जा सकता है। हालांकि, उन्होंने किसी संभावित नए कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं की।
INDIA गठबंधन की भूमिका पर जोर
सूत्रों के अनुसार, उद्धव ठाकरे छात्र आंदोलन के मुद्दे पर कांग्रेस नेता और लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी से टेलीफोन पर चर्चा करने वाले हैं। उनका मानना है कि विपक्षी दलों के INDIA गठबंधन को इस आंदोलन के समर्थन में एकजुट होकर सामने आना चाहिए। दिल्ली पहुंचने के बाद उनकी अरविंद केजरीवाल से भी बातचीत हुई, जिसमें छात्र आंदोलन को लेकर विपक्ष की साझा रणनीति पर चर्चा होने की बात सामने आई है। ठाकरे का मानना है कि यह केवल किसी एक दल का मुद्दा नहीं, बल्कि देश के छात्रों और युवाओं के भविष्य का सवाल है, इसलिए सभी विपक्षी दलों को मिलकर उनकी आवाज बुलंद करनी चाहिए।
इस्तीफे की मांग पर सरकार के रुख से नाराज विपक्ष
उद्धव ठाकरे का मानना है कि केंद्र सरकार शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को गंभीरता से नहीं ले रही है। इसी वजह से विपक्ष के भीतर यह विचार उभर रहा है कि आंदोलन को व्यापक जनसमर्थन दिलाने के लिए नई रणनीति अपनाई जाए। राजनीतिक हलकों में चर्चा है कि विपक्ष अब केवल संसद तक सीमित रहने के बजाय सड़क पर भी छात्रों के समर्थन में अपनी मौजूदगी मजबूत कर सकता है। हालांकि, सरकार की ओर से लगातार यह कहा गया है कि वह NEET से जुड़े मुद्दों पर संसद में चर्चा के लिए तैयार है और सभी कदम संसदीय प्रक्रिया के तहत उठाए जाएंगे। ऐसे में आने वाले दिनों में छात्र आंदोलन और विपक्ष की रणनीति दोनों पर देश की नजरें टिकी रहेंगी।